: रामकथा राष्ट्र व्यथा का समाधान है: प्रभंजनानन्द शरण
Sun, Jan 21, 2024
प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण ने श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर बड़े ही धूमधाम के साथ श्री राम जन्म उत्सव व भगवान राम की बाललीलाओं का बड़ा सुंदर प्रसंग सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया
सियारामकिला झुनकी घाट में महंत करुणानिधान शरण महाराज की अध्यक्षता में बह रही गीत संगीत की त्रिवेणी
अयोध्या। श्रीराम का चरित्र मानव जीवन की कसौटी है।एक पूर्ण मानव का चरित्र कैसा होना चाहिये?इसका मानदण्ड श्रीराम का आदर्श चरित्र ही है।व्यक्ति का चरित्र ही समाज के चरित्र को आकार देता है।जब कोई राम जैसा व्यक्तित्व अवतरित होता है तो चरित्र की ख़ुशबू चारों ओर फैलने लगती है। उक्त बातें प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण ने सियारामकिला झुनकी घाट मंदिर में राम कथा के पंचम दिवस में कही। श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए प्रभंजनानन्द शरण ने कहा कि हर मनुष्य अपने चरित्र को सँवारने की होड़ में लग जाता है। क्षुद्रताओं को छोड़ श्रेष्ठता की ओर दौड़ने लगता है।जीवन का एक कटु सत्य यह है कि श्रेष्ठ आदर्शों से प्रेरित लोग ही श्रेष्ठ जनों की राह पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में क्षुद्रताओं का बोलबाला है। हर क़दम पर लूट और घोटाला है।इसका कारण यह है कि आज का आदमी क्षुद्र आदर्शों से प्रेरित है।असत्य कितना भी लुभावना क्यों न हो वो सत्य की कभी बराबरी नहीं कर सकता। व्यासजी ने कहा कि इन्द्र भी जिस वैभव सम्पन्न अयोध्या की राजसम्पदा के लिये तरसते थे श्रीराम को उसे छोड़ने में एक क्षण भी नही लगे।लोभ के विरूद्ध त्याग का युद्ध होता है।श्रीराम पैदल यात्रा करते हुये वन की ओर प्रस्थान करते है और समाज के आख़िरी व्यक्ति तक को हृदय से लगाते है।श्रीराम की बडप्पनता यह थी कि उन्होनें केवट को बड़ा बना दिया।चित्रकूट में कोल-भील को हृदय से लगाते है।सारी दुनिया को देने वाले राम शबरी से माँगकर फल खाते है।तब समाज में राम राज्य की स्थापना हुयी थी।वर्तमान समय में जब मानव दिशाहीन हो गया है,क्षुद्र स्वार्थों मे जी रहा है ऐसे में श्रीराम का चरित्र समाज के लिये अत्यावश्यक है।
प्रभंजनानन्द जी ने कहा कि रामचरितमानस में दो वाटिकाओ का वर्णन है वाटिका जो पुष्प वाटिका है और एक भोगी की वाटिका जो अशोक वाटिका है। विदेह नगर की वाटिका पुष्प वाटिका है। देह नगर की वाटिका है अशोक वाटिका।दोनों वाटिकाओं का केन्द्र बिन्दु जगतजननी जानकी जी है।पुष्प-वाटिका में शब्दों की सुन्दर चित्रकारी द्वारा राम और सीता के मनोभावों का मनोरम वर्णन किया है। मानव रूप में जन्मे राम मानव मन के किसी भी कोमल भाव से अछूते नहीं रहे। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में भावी जीवनसंगिनी को निरखते श्रीराम के मन में प्रेम और क्षोभ एक साथ हिलोरे मारता है। वही सीता भी भावी जीवनसाथी के रूप में राम की कामना के साथ पिता जनक के प्रण का स्मरण कर दुखी होती हैं। प्रभु श्रीराम के दिव्य रूप और गुणों पर चिंतन और मनन करने से अन्तःकरण में पवित्रता शुभता उदारता की भावनायें आती हैं और दिव्यता का प्रस्फुटन होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत करुणानिधान शरण महाराज ने किया। मंदिर में रामजन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। आज बधाई गायन से सियारामकिला में गीत संगीत की त्रिवेणी बजती दिखी। हर कोई उत्सव में आनंदित होता दिखा। मंदिर में प्रथम आचार्य का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सोमवार को वैदिक आचार्यों द्धारा प्राण प्रतिष्ठा किया जायेगा।
: भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पहुंचे वृंदावन धाम के संत धर्माचार्य
Sun, Jan 21, 2024
वृंदावन से उच्चकोटि के संत जगतगुरु पीपाद्वारचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज सहित दर्जनों धर्माचार्य पहुंचे श्री राधा मोहन कुंज, महंत सनत कुमार शरण ने संतों का किया अभिनन्दन
जगतगुरु पीपाद्वारचार्य बलराम देवाचार्य ने मुहूर्त के विवाद पर कहा, भगवान तो जिस घड़ी बैठ जाएं, वही शुभ हो जाता है
अयोध्या।वृंदावन से उच्चकोटि के संत जगतगुरु पीपाद्वारचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि जन्मभूमि पर श्रीरामलला के विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुहूर्त पर विवाद खड़ा करने वालों को गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस देख लेना चाहिए। भगवान जिस घड़ी अपने जन्मस्थान पर बैठ जाएंगे, वही शुभ घड़ी है। उन्होंने कहा कि महाराजा दशरथ ने जब अपने पुत्र श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए अपने गुरु वशिष्ठ जी से मुहूर्त पूछा तो उन्होंने इसका बहुत सुंदर जवाब दिया। तुलसीदास जी ने इस प्रसंग का जो वर्णन किया है, उसमें वशिष्ठ जी कहते हैं- 'सुदिन सुमंगल तबहिं जब राम होहिं युवराज।' उन्होंने कहा कि मुहूर्त प्राकृतिक व्यक्ति के लिए होता है। भगवान तो जिस घड़ी बैठ जाएं, वही शुभ है। इस विषय पर विवाद तो है ही नहीं, इस पर त्रेता युग की मुहर लगी हुई है। भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने जगतगुरु पीपाद्वारचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज आज श्री राधा मोहन कुंज पहुंचे। महंत सनत कुमार शरण ने कहा कि वह प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने की घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ईश्वर की विशेष अनुकंपा से यह शुभ बेला आ गया। अयोध्या में जो कुछ हो रहा है, वह अकल्पनीय है।
: रघुवंश अभिराम अमृत महोत्सव के चौथे दिन 15 हजार शिवलिंगों का हुआ भव्य अभिषेक
Sun, Jan 21, 2024
भगवान शिव साक्षात विश्वास स्वरूप व माता पार्वती साक्षात श्रद्धा स्वरूप: महंत दिलीप दास
अयोध्या । मां सरयू के पावन तट राजघाट पर प्रभु श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के समय रघुवंश अभिराम अमृत महोत्सव के चौथे दिन 15 हजार शिवलिंगों का पूजन किया गया। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर सवा लाख शिवलिंग पूजन का संकल्प चल रहा है। जिसमे प्रतिदिन 15 हजार शिवलिंग का निर्माण किया जाता है वैदिक विद्वानों द्वारा पूजन कराया जाता है अभिषेक किया जाता है। उसके बाद विसर्जन किया जाता है यह पूरा कार्यक्रम महंत धर्मदास जी महाराज की अध्यक्षता में रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के संयोजक स्वामी दिलीप दास त्यागी महाराज के संयोजन में चल रहा है। अमृत महोत्सव के चौथे दिवस की बेला में महंत दिलीप दास महाराज ने भगवान शिव पार्वती विवाह कथा श्रवण करते हुए बताया कि भगवान शिव साक्षात विश्वास के स्वरूप है और माता पार्वती साक्षात श्रद्धा स्वरूप है, उन्होंने कहा जब गृहस्थ आश्रम में दांपत्य जीवन श्रद्धा विश्वास युक्त होगा पति में विश्वास और पत्नी में श्रद्धा का समागम होगा परिवार में कार्तिकेय जैसा पुरुषार्थवान एवं गणेश जी जैसा विवेकवान संतान की प्राप्त होगी । शिव पार्वती का विवाह मानव समाज में श्रद्धा व विश्वास का मिलन होता है।