: मठाधीश मस्त माननीय सुस्त...
Tue, Dec 7, 2021
रामनगरी का प्रसिद्ध रामायण मेला ढूढ रहा अपना अस्तित्व
अव्यवस्थाओं के बीच आज रामायण मेला का हुआ उद्घाटन
अयोध्या । चार दशक से शुरू हुए रामायण मेला अब महज औपचारिक बनकर रह गया है। मेले के प्रति लोगों का आकर्षक भी अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी लाखों के भीड़ की गवाह बने रामायण मेला में अब सैकड़ों की संख्या भी जुटानी मुश्किल हो चली है। आयोजन समिति, सरकारी सहायता न मिलने का रोना-रोकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। तो वहीं अयोध्या के प्रमुख मठाधीश भी इस मेले को लेकर अपना नाम ढो रहे है। लेकिन मेले लिए बुनियादी जरूरतों को मुहैया करने के नाम पर अपने हाथ खड़े कर लेते है। 40 वर्ष पहले रखी गयी रामायण मेला की नींव अब जर्जर हो चुकी है। औपचारिकता के नाम पर स्थानीय कलाकारों व कथावाचकों के हवाले करके रामायण मेला को उसके हाल पर छोड दिया गया है। जिले में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा का दबदबा है लोकसभा सदस्य भाजपा का, 5 विधानसभा सीटें इनके कब्जे में है, नगरनिगम बनने के बाद हुए मेयर के चुनाव में भी सत्ता दल भाजपा के महापौर ने जीत हासिल की है, तो वही योगी आदित्यनाथ सूबे के मुखिया का लगाव अयोध्या से काफी है,जो किसी से छुपा नहीं है। राजनैतिक रूप से खुशहाल इस क्षेत्र में रामायण मेला की दयनीय स्थिति उस सच्चाई के सामान है जिसे किसी भी कीमत पर दर किनार नहीं किया जा सकता है इन सभी हालात के बीच न तो किसी राजनैतिक दल को रामायण मेलें में दिलचस्पी है और न ही उस भावना की जिसे पिरोकर रामायण समारोह की शुरूआत की गयी थी। अयोध्या में होने वाले इस मेले को राजनैतिक कारणों से लगातार हानि पहुंची है। सत्तारूढ़ दल के माननीय भी इस मेले की दशा सुधारने में कोई रूचि नहीं दिखा रहे है। रामायण मेला औपचारिकता मात्र बनकर रह गया है। जब से सूबे में योगी सरकार बनी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव रामायण मेले के लगभग 1 महीने पहले मनाया जाता है जिसकी भव्यता के कारण रामायण मेला का अस्तित्व धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। रामायण मेले की शुरुआत उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने 1982 में किया था तब यह रामायण मेला राम की पैड़ी पर मनाया जाता था राम की पैड़ी बनने के उपरांत यह रामायण मेला अपना स्थान परिवर्तन करता रहा लेकिन राम कथा पार्क बनने के बाद यह अस्थाई हो गया और निरंतर वहीं पर अगहन मास की विवाह पंचमी के अवसर पर तीन दिवसीय मनाया जाने लगा। वैसे तो रामायण मेले का उद्घाटन लगभग सूबे के मुख्यमंत्री करते थे और समापन विधानसभा अध्यक्ष लेकिन इस रामायण मेले से इसका उद्घाटन कौन करेगा यह अंतिम सत्र में भी तय नही किया जा सका। आज इस मेले का शुभारम्भ मणिरामदास छावनी के महंत एवं मेला समिति के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास जी के उत्तराधिकारी महंत कमननयन दास, रसिक पीधाधीश्वर जनमेजय शरण, दिगम्बर अखाड़ा महंत सुरेश दास, श्री रामाश्रम साधनाश्रम महंत जयराम दास, हनुमानगढ़ी महंत बलरामदास, वरूण दास, रामलखनदास आदि प्रमुख रहे। कार्यक्रम का संचालन संत कमलेश दास पुरूषोत्तम दास द्वारा किया गया। रामायण मेला 10 तक चलेगा।
: गौ सेवक बचई बाबा का सारा जीवन सेवा भाव में बीता है: महंत संजय दास
Tue, Dec 7, 2021
हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के अध्यक्षता में संतों ने बचई बाबा को पुष्पांजलि अर्पित किया
अयोध्या। अजंनी गौ सेवा समिति के संस्थापक श्री हनुमानगढ़ी के सागरिया पट्टी से जुड़े वरिष्ठ नागा गौ सेवक के सशक्त हस्ताक्षर बचई बाबा को रामनगरी अयोध्या के सभी संतों महंतों ने भाव पूर्ण श्रद्धांजलि देकर नमन किया। यह पूरा आयोजन सागरिया पट्टी के महंत हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के पावन अध्यक्षता में हुआ। हनुमान गढ़ी के संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा व भंडारा में रामनगरी के सभी संत महंत शामिल हुए। आये हुए अतिथियों के स्वागत संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत सत्यदेव दास, महंत जनार्दन दास, पुजारी हेमंत दास परम्परागत तरीकें से किये। इस मौके पर हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज, अनि अखाड़ा के महंत धर्मदास महाराज, महासचिव गौरीशंकर दास, हरिद्वारी पट्टी के महंत मुरली दास, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी राम दिनेशाचार्य, महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत सुरेश दास, महंत इन्द्रदेव दास, हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य महंत डा महेश दास, महंत अर्जुन दास,महंत रामकुमार दास,अभय दास, अभिषेक दास सहित पूरी हनुमानगढ़ी व रामनगरी के विशिष्ट संत महंत मौजूद रहे।
: रामकथा भगवान के लीला, चरित्र, गुणों की गाथा है: रामानन्दाचार्य
Tue, Dec 7, 2021
चक्रवर्ती महाराज श्रीदशरथजी के राजमहल बड़ास्थान में श्री सीताराम विवाह महोत्सव में बह रही रामकथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। रामनगरी के चक्रवर्ती महाराज श्रीदशरथजी के राजमहल बड़ास्थान में श्री सीताराम विवाह महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी के श्री मुख से हो रहा है। कथा के पंचम दिवस में रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। श्री रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान के लीला चरित्र गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। पूज्य महाराज जी ने कहा कि किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है लेकिन यह भगवान की कथा है सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है। इसे बार-बार कहने एवं सुनने की इच्छा हमेशा बनी रहती है। भगवान राम लक्ष्मण भरत और शत्रुहन के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है। हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए हर घर में रामचरित मानस हो तथा नित्यदिन इसको पढ़े व लोगों को श्रवण कराएं। रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि हनुमान जी को रामनाम प्रिय है जहां भी रामकथा होती है वहां वे कथा सुनने आते हैं। हनुमान जी के हृदय में श्रीराम का निवास है। भगवान कभी जन्म नही लेते है हमेशा अवतार होता है। व्यासपीठ का पूजन यजमान नरेश कुमार गर्ग व उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता गर्ग ने किया। महोत्सव का सफल संचालन कार्यक्रम के व्यवस्थापक बिंदुगाद्यायाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता चक्रवर्ती महाराज श्री दशरथजी के राज महल बड़ा स्थान के महंत बिंदुगाद्यायाचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज कर रहे है। राम कथा में श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास जी महाराज सहित रामनगरी के विशिष्ट संत धर्माचार्य व दशरथ राज महल बड़ा स्थान से जुड़े संत साधक सहित रमेश दास शास्त्री, कामधेनु पीठाधीश्वर महंत आशुतोष दास,गौरव दास शास्त्री, शिवेंद्र शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
व्यासपीठ का पूजन करते यजमान नरेश कुमार गर्ग व उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता गर्ग