: भगवान रामलला के साथ प्राकट्य हुए भगवान स्वामीनारायण
Fri, Mar 31, 2023
मानवता व अध्यात्म का संदेश दे रहा स्वामी नारायण संप्रदाय
दिन में 12 बजे भगवान रामलला व रात्रि 10 बजकर 10 मिनट पर भगवान स्वामीनारायण का हुआ प्राकट्य उत्सव, ड्राई फूड्स के लगे 56 भोग
मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद ने स्वामी नारायण संप्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया
नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए संप्रदाय को बढ़ा रहे आगे
अयोध्या। रामनगरी का एक ऐसा मंदिर जहां एक ही दिन में भगवान रामलला व भगवान स्वामीनारायण का प्राकट्य उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। इस दौरान पूरे मंदिर को फूलों व रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया था। दोपहर के ठीक 12 बजे भगवान रामलला का प्राकट्य उत्सव हुआ तो रात्रि 10 बजकर 10 मिनट फर भगवान स्वामीनारायण का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। यह महोत्सव मंदिर के महंत स्वामी शास्त्री अखिलेश्वर दास जी के देखरेख में हुआ।
भगवान स्वामीनारायण के जन्म स्थली छपिया है जहां पर भगवान का जन्म हुआ तो अयोध्या में भगवान स्वामीनारायण का बाल्यकाल की लीला की वैसे भी अयोध्या को सभी तीर्थों का मस्तक कहा जाता है। ऐसे में स्वामी नारायण सम्प्रदाय जिसका डंका आज पूरे विश्व में फैला है।
स्वामी नारायण सम्प्रदाय का स्वर्णिम इतिहास बिना नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद सम्भव ही नही है। महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फभारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया है। मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया। गुजरात के गलियों गलियो में घर घर जाकर भगवान स्वामी नारायण जी की महिमा का गुणगान कर लोगो को सम्प्रदाय से जोड़ा। आज वर्तमान में उनके बेटे नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को आगे बढ़ा रहे है। अयोध्या के समीप गोंडा की अलख गुजरात तक पहुंच कर पूरी दुनिया को मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के आराध्यदेव बाल स्वरूप घनश्याम प्रभु की जन्मस्थली छपिया से 60 किलोमीटर दूर रामनगरी अयोध्या में नूतन भव्य भवन का निर्माण है जो स्वामी नारायण मंदिर रायगंज के नाम से सुप्रसिद्ध है।
स्वामीनारायण का जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप में हुआ था। 1792 में उन्होंने नीलकंठ वर्णी नाम को अपनाते हुए 11 वर्ष की आयु में भारत भर में सात साल की तीर्थ यात्रा शुरू की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कल्याणकारी गतिविधियां की और इस यात्रा के 9 वर्ष और 11 महीने के बाद वह 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में उन्हें अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हें साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया। 1802 में अपने गुरु के द्वारा उनकी मृत्यु से पहले उन्हें उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया गया। सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजित की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से वह स्वामीनारायण के रूप में जाने जाते हैं। उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप में जाना जाता है सम्प्रदाय के विभिन्न ऐतिहासिक मठ मंदिर आज अपने आराध्य के प्रति अपनी आस्था को प्रदर्शित कर रहा हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय आज अपने शिखर पर है ऐसे में राम नगरी अयोध्या का स्वामीनारायण मंदिर अपनी सेवा त्याग के लिए जानी जाती है। अयोध्या के स्वामीनारायण मंदिर के महंत स्वामी शास्त्री अखिलेश्वर दास जी कहते है भगवान श्री स्वामी नारायण जी महाराज अयोध्या में बाल लीला किए थे क्योंकि उनका जन्म स्थान अयोध्या से लगभग 60 किलोमीटर दूर गोंडा स्थित छपिया नामक स्थान पर हुआ था। वर्तमान समय में स्वामीनारायण मंदिर के संस्थान पूरे देश के सभी धार्मिक स्थलों पर विद्वान हैं। शास्त्री अखिलेश्वर दास जी महाराज ने बताया कि अयोध्या सप्तपुरीयों में सबसे महत्वपूर्ण पूरी है और यहां भगवान राम का जन्म हुआ था भगवान राम के जन्म स्थान का विवाद भी समाप्त हो गया भव्य मंदिर का निर्माण बहुत ही जोर शोर से हो रहा है। अब देश विदेश से लोग आएंगे ऐसे में अयोध्या का विकास भी होगा। स्वामी नारायण मंदिर रायगंज में आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद व नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज के सानिध्य में मंदिर अपने शिखर की ऊचाई को छूएगा। मंदिर में जो सेवाएं यहां चलती हैं वह निरंतर चलती रहेगी।
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Fri, Mar 31, 2023
अयोध्या राममय, अयोध्यावासी निहाल, मठ-मंदिरों में गूंज रही स्तुतियां, रामनगरी में छाया उत्सव का उल्लास
हनुमत निवास में महंत मिथलेश नन्दनी शरण के संयोजन में बाज रही बधाईयां, चहुंओर हो रहा नृत्य गायन
अवध में चहुओर बाजे बाजे रसीली बधाइयां..
अयोध्या। योग लगन ग्रहवार तिथि सकल भए अनुकूल, चर अरू अचर हर्ष युत राम जनम सुख मूल…रामजन्म का प्रसंग निरूपित करती श्रीरामचरित मानस की यह पंक्ति रामजन्मोत्सव पर साकार होती दिखी। रामजन्मोत्सव में गुरुवार नगरी उत्सव के रंग में डूब गई थी। अयोध्यावासी निहाल हैं, चहुंओर उल्लास है। सबके चेहरे पर रामजन्मोत्सव की शुभ घड़ी पर उल्लास झलक रहा था। मंदिरों में गीत-संगीत उत्सव का चरम परिभाषित कर रहे थे।
नवमी राम की, राम का सुमिरन करा जाती है नवमी राम की। मौका था प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव का श्री हनुमत निवास में प्रख्यात साहित्यकार महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज के सानिध्य में जन्मोत्सव मनाया जा रहा था। इस अवसर पर मंदिर परिसर का अलग ही नजारा था। भक्तों द्वारा नृत्य किये जा रहे थे। ढोलक की थाप पर विविध भाषाओं में संत महंत अपने आराध्य की आराधना कर रहे थे, बधाई गीत गा रहे थे। महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने बताया कि प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर बन रहा है देश में ही नहीं विदेशों में यह उत्सव मनाया जा रहा है, जितने सनातनी हैं सब राममय हो गए हैं और अपने आराध्य के जन्म उत्सव में अयोध्या आ रहे हैं। जो अयोध्या नहीं आ पा रहे हैं वह अपने घर में मना रहे हैं ऐसा वातावरण या तो त्रेतायुग में था या मंदिर निर्माण के समय अब लौट रहा है।
भगवान श्री राम के जन्मोत्सव की अलौकिक छटा हनुमत निवास मंदिर में देखी जा सकती है। 10 बजे से ही महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज के सानिध्य में रंगभरी बधाई गान प्रारंभ थी। अवध में चहुओर बाजे बाजे रसीली बधाइयां से परिसर में उपस्थित हजारों की संख्या में भक्त नाचने लगे और यह क्रम 12 बजे तक चलता है जैसे ही घड़ी की तीनों सुईयां एक पूरा परिसर श्री राम लला की जय कारे से गुंजायमान हो उठा, घंटा घडियाल बजने लगे। भगवान के प्रकट होते ही आरती उतारी गई। जिसके बाद भी घंटो तक परिसर में बधाई चलती रही।मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा में भी भगवान के जन्म उत्सव की कथा हुई व्यासपीठ से महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने बताया प्रभु का जन्म दुष्टों के संहार मात्र के लिए हुआ था यह एक बहाना है प्रभु का अवतार पृथ्वी पर मानव कल्याण के लिए हुआ था क्योंकि आनंदकंद प्रभु श्री राम वसुंधरा पर मर्यादा की स्थापना के लिए अवतार लिए और समाज को अपने चरित्र की लीला से संदेश दिया। जन्म की कथा सुन उपस्थित सभी भक्त भावविभोर हो गए। अंत में आरती उतार प्रसाद वितरण किया गया।
: मिथिला से आई सखियों ने बधाई गायन से किया मंत्रमुग्ध
Fri, Mar 31, 2023
आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में भगवान का अनुपम दिव्य अलौकिक जन्मोत्सव
अयोध्या।आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में किलाधीश महंत मैथिली रमण शरण महाराज के सानिध्य में भगवान का अनुपम दिव्य अलौकिक जन्मोत्सव मनाया गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था की भगवान त्रेता युग में नहीं आज ही प्रकट हुए हैं, बधाई गीत से पूरा परिसर गुंजायमान हो रहा था। इस अवसर पर मिथिला से आई सखियों अपने ही बधाई गान से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर जगतगुरु रामानुजाचार्य रत्नेश प्रपन्नाचार्य महाराज, महंत राम रोशन दास, राम भूषण शरण, अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण सहित सैकड़ों की संख्या में संत महंत और हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहें।
किलाधीश महंत मैथिली रमण शरण महाराज ने बताया कि आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में जन्मोत्सव की परंपरा सदियों पुरानी है और प्रतिवर्ष मिथिला से सखियां आती हैं और उनके द्वारा 9 दिन मंदिर परिसर में बधाई गायन होता है और भव्य जन्मोत्सव मनाया जाता है, बधाई गान के बाद सभी को प्रसाद वितरण किया गया।