: अम्माजी मंदिर में पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव का उल्लास चरम पर
Tue, Mar 28, 2023
कोशलेस सदन के जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य "विद्याभाष्कर" का अम्मा जी मंदिर के ट्रस्टियों ने किया अभिनन्दन
अयोध्या। दक्षिण भारतीय परम्परा के अम्माजी मंदिर में पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव के अवसर पर सोमवार को सांयकाल वाहन से भगवान की शोभायात्रा बाजे-गाजे के साथ निकाली गई। इस रथयात्रा में तमिलनाडु से आए पारम्परिक वाद्ययंत्रों को भी शामिल किया गया। रथारूढ़ भगवान की सवारी को चेन्नई व अन्य क्षेत्रों से आए तमिल भाषी श्रद्धालु रस्से के सहारे खींच रहे थे।
परम्परागत रूप से निकाली जाने वाली यह रथयात्रा गोलाबाजार, तुलसी उद्यान होकर मुख्य मार्ग से सब्जी मंडी होकर तोताद्रि मठ, अशर्फी भवन होते हुए पुनः पहुंची।
इसके पहले अम्माजी मंदिर में दिव्य ग्रंथो का पारायण एवं विराजमान भगवान का अभिषेक कर विधिपूर्वक पूजन किया गया।
अम्माजी मंदिर दिव्य देश में
कोशलेस सदन के जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य "विद्याभाष्कर" का दिव्य प्रवचन सत्र चला। इसके बाद अम्माजी मंदिर ट्रस्टियों ने विद्याभाष्कर का अभिनन्दन किया। मंदिर में रामजन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। पूरा कार्यक्रम दक्षिण परम्परा के अनुसार मनाया जा रहा है। प्रवचन सत्र में आज यानी मंगलवार को रामलला सदन देवस्थान् पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज का प्रवचन चलेगा तो बुधवार को अशर्फी भवन की महानता जगद्गुरू श्री धराचार्य महाराज का प्रवचन होगा।
: भगवान रामलला के उत्सव विग्रह का हुआ महामिलन महोत्सव
Mon, Mar 27, 2023
अम्माजी मंदिर से रथ पर विराजमान होकर रामलला सदन देवस्थान् पहुंचे भगवान रामलला, हुआ विशेष पूजन आरती
अष्टमी को रामलला सदन देवस्थान् से भगवान रामलला रथ पर सवार होकर पहुंचेगे अम्माजी मंदिर
अयोध्या। रामलला सदन देवस्थान् मंदिर में रामजन्म उत्सव का उल्लास अपने शिखर पर है। मंदिर में दक्षिण भारतीय परम्परा के अनुसार भगवान का विधिवत पूजन अभिषेक जा रहा है। दक्षिण भारत के प्रख्यात संत पार्थ स्वामी द्धारा स्थापित भगवान रामलला का मिलन महामहोत्सव रविवार को देर शाम मनाया गया।दक्षिण भारतीय परम्परा के अम्माजी मंदिर में शुरू हुए पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव के अवसर पर रविवार को सांयकाल मंगलगिरि वाहन से भगवान की शोभायात्रा बाजे-गाजे के साथ निकाली गई। इस रथयात्रा में तमिलनाडु से आए पारम्परिक वाद्ययंत्रों को भी शामिल किया गया। रथारूढ़ भगवान की सवारी को चेन्नई व अन्य क्षेत्रों से आए तमिल भाषी श्रद्धालु रस्से के सहारे खींच रहे थे। यह यात्रा रामलला सदन देवस्थान् पहुंची जहां भगवान को मंदिर में विराजमान कराके दक्षिण परम्परा अनुसार आचार्यों द्धारा आरती पूजन किया गया इसके बाथ प्रसाद वितरण कर भगवान को पुनः रथ पर विराजमान कराके अम्मा जी मंदिर ले गये।
रामलला सदन देवस्थान् पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज के निर्देशन में भगवान रामलला के महा मिलन महोत्सव मनाया गया।
डा राघवाचार्य कहते है कि रामलला सदन देवस्थान् मंदिर में विराजमान भगवान रामलला का उत्सव विग्रह पूज्य पार्थ स्वामीजी द्धारा स्थापित अम्मा जी मंदिर से से यहा स्थापित हुई है। उन्हीं उत्सव विग्रह का मिलन महोत्सव मनाया गया जिसमें रामलला सदन देवस्थान् में अम्मा जी मंदिर से उत्सव विग्रह आयी जिसका यहां विशेष पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि अष्टमी तिथि को रामलला सदन का उत्सव विग्रह अम्मा जी मंदिर रथों पर विराजमान होकर जायेगी।
: विश्व के भाग्य की कपाट अयोध्या नगरी खोलेगी : वेदांती जी
Sun, Mar 26, 2023
कहा, अयोध्या समाधान-मूलक है, व्यवस्था-मूलक है और धर्म की रक्षा करती है
सीताराम विवाह महोत्सव की कथा में ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कहा,विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है
हिंदू धाम में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन मंगलवार को, जुटेंगे देश के प्रख्यात कवि
अयोध्या। भारत से विश्व के भाग्य की कपाट कोई नगरी खोलेगी तो वह अयोध्या है। इसी से राष्ट्रोदय होगा, विश्व को नई दृष्टि मिलेगी, क्योंकि अयोध्या समाधान-मूलक है, व्यवस्था-मूलक है और धर्म की रक्षा करती है।भारत को राम जैसा आदर्श अयोध्या ने दिया है।अयोध्या भू वैकुण्ठ है।अयोध्या में आते ही व्यक्ति के भीतर का सारा युद्ध समाप्त हो जाता है जो युद्ध रहित है वही अयोध्या है।अयोध्या को देवताओं की पुरी कहा गया है और अयोध्या वासियो को साक्षात् जगन्नाथ का रूप। उक्त बातें ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कही। श्री वेदांती जी हिंदू धाम में श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा पंचम दिवस व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें।
ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कहा कि भगवान श्रीसीताराम जी के विवाह ने ही दुनिया को विवाह संस्कार का आदर्श सिखलाया। उन्होंने कहा कि विवाह केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है।श्रीराम के विवाह के जरिए हम विवाह की महत्ता और उसके गहन अर्थों से परिचित हो सकते हैं। महाराज जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीराम-सीता आदर्श दंपति हैं। श्रीराम ने जहां मर्यादा का पालन करके आदर्श पति और पुरुषोत्तम पद प्राप्त किया वहीं माता सीता ने सारे संसार के समक्ष अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है। दो प्राणी अपने अलग- अलग अस्तित्वों को समाप्त कर एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों में परमात्मा ने कुछ विशेषताएँ और कुछ अपूर्णताएँ दे रखी हैं। विवाह सम्मिलन से एक- दूसरे की अपूर्णताओं को अपनी विशेषताओं से पूर्ण करते हैं, इससे समग्र व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसलिए विवाह को सामान्यतया मानव जीवन की एक आवश्यकता माना गया है। एक- दूसरे को अपनी योग्यताओं और भावनाओं का लाभ पहुँचाते हुए गाड़ी में लगे हुए दो पहियों की तरह प्रगति- पथ पर अग्रसर होते जाना विवाह का उद्देश्य है। हिंदू धाम रामजन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह महोत्सव वशिष्ठ भवन पीठाधीश्वर महंत राघवेश दास वेंदाती जी महाराज के संयोजन में हो रहा है। कार्यक्रम में 28 मार्च मंगलवार को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया है जिसमे देश के तमाम नामागिरामी कवि शामिल होगे।