: संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है: शीतल दीदी
Sat, Mar 25, 2023
कहा, संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है
रामकृष्ण मंदिर में महामंडलेश्वर गणेशानंद जी के संयोजन में वैदिक आचार्य कर रहे नवाह्न पारायण पाठ
अयोध्या। रामकृष्ण मंदिर में रामजन्मोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है।मंदिर में सुबह नवाह्न पारायण पाठ संगीतमय किया जा रहा है जो महामंडलेश्वर गणेशानंद के संयोजन में हो रहा है। तो वही शाम में प्रख्यात कथावाचिका मंदिर की महंत शीतल दीदी जी के श्रीमुख से राम कथा की अमृत वर्षा रही है। चतुर्थ दिन की कथा में शीतल जी ने अहिल्या उद्धार जनकपुर दर्शन, धनुष भंग, और सीता राम विवाह का वर्णन किया। सीता राम विवाह को लेकर पूरे पंडाल को रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है, क्योंकि संत के चरण तीर्थों में घूमते-रहते हैं, वो सभी जगह जाते हैं, इसलिए जब कभी भी संत आएं तो उनके चरणों को धो लेना चाहिए, क्योंकि उनके चरणों में सारे तीर्थों का स्पर्श पहले से ही विद्यमान रहता है। इसीलिए संतों को तीर्थंकर कहा जाता है।
: हिंदू धाम मंदिर में श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा की बह रही रसधार
Sat, Mar 25, 2023
राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की: ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती
अयोध्या। श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथाहिंदू धाम मंदिर अयोध्या में चल रही है। व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने रामायण का सार भगवान का नाम की महिमा पर व्याख्यान किया।उन्होंने कहा कि भगवान राम हमारे जीवन के प्रत्येक रंग में समाए हुए हैं। हमने पाश्चात्य सभ्यता को काफी हद तक अपनाया, परंतु 'राम-राम' कहना नहीं छोड़ा। हम प्रतिदिन अच्छे बुरे अवसरों पर राम नाम ही लेते हैं।
आज भी हम 'राम-राम' या 'जय रामजी की' कहकर अभिवादन करते हैं। जीवन के अंतिम समय में बिछुड़ने पर राम-राम का ही उल्लेख होता है। समस्या के आने पर, विपत्तियों से घिरने पर 'हे राम' अथवा 'अरे राम' सहसा ही हमारे मुख से निकल पड़ता है। जीवन में प्रसन्नचित होने पर हम रामजी की कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की। राम नाम स्वयं ज्योति है, स्वयं मणि है। राम नाम के महामंत्र को जपने में किसी विधान या समय का बंधन नहीं है। राम का नाम जपने से हो जाता है मानव का कल्याण।
वेंदाती जी ने बताया कि राम से बड़ा राम का नाम है अर्थात राम मिले ना मिले लेकिन राम का नाम जपना मात्र ही मानव के कल्याण के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि राम नाम में बहुत शक्ति है, क्योंकि राम का नाम वैसे तो केवल दो अक्षर का ही होता है परंतु इस दो अक्षर के नाम में संपूर्ण संसार का रहस्य छिपा है। इसलिए 2 अक्षर के इस प्यारे से नाम राम का जाप प्रत्येक प्राणी को करना चाहिए, क्योंकि राम नाम ही एक ऐसा मूल मंत्र है जिसका जाप करने से मनुष्य अपने सांसारिक दु:खों पीड़ा से मुक्ति पा सकता है और संसार रूपी भवसागर से पार उतर सकता है। उन्होंने रामायण का एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब राम रावण की लंका पर चढ़ाई करने की ठान लेते हैं और नल-नील नामक 2 वानर भाइयों की मदद से सौ योजन अथाह सागर पर सेतू बनाने की योजना बनाते हैं। लेकिन जब वानरों द्वारा सागर में फेंके जाने वाले पत्थरों पर भगवान राम अपने नाम को लिखा देखते हैं तो वह सोचते हैं कि इस पर राम नाम क्यों लिखा जा रहा है। इस पर बल बुद्धि के ज्ञाता श्री हनुमान ने कहा कि सृष्टि में युगों युगों तक राम नाम के इस सेतू द्वारा ही लोग राम नाम लिखे इन पत्थरों में श्रीराम के दर्शनों को अनुभव करेंगे। कार्यक्रम के संयोजक डा राघवेश दास वेदांती जी ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया।
: मानवता की शिक्षा देने के लिए प्रभु मानव रूप में इस धरा पर आते हैं: जगद्गुरू
Sat, Mar 25, 2023
रविवार को भगवान लक्ष्मी नारायण का वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा,मां सरयू का जल दुग्ध एवं फलों के जूस से होगा अभिषेक
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन के भव्य माधव भवन में रामनवमी के पावन उपलक्ष म चल रही सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शतक श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस मे व्यास पीठ पर विराजमान जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए प्रेरणा देते हैं प्रभु को साक्षी मानकर विष पीकर भी भगवान शिव अमर हो जाते हैं और मन में हीन भावना रखकर अमृत पान कर कर भी दैत्य राहु का वध प्रभु करते हैं परीक्षित सुखदेव जी से कहते हैं। प्रभु कोई ऐसी कथा श्रवण कराएं जिससे मेरा मन और भी स्थिर हो जाए सुखदेव जी महाराज पशु रूप में गज और ग्राह की कथा का श्रवण कराते हैं। उन्होंने कहा कि गज के विपत्ति में पड़ जाने पर जब संसार का सभी साथ छूट गया तो गज ने एक कमल पुष्प अपनी सूंड में लेकर प्रभु नारायण को स्मरण किया भगवान बैकुंठ से दौड़कर आते हैं काल रुपी ग्रह का संघार करते हैं। शरणागत रक्षक हैं प्रभु भगवान श्री राम के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा मनुष्य को मानवता की शिक्षा देने के लिए प्रभु मानव रूप में इस धरा पर आते हैं। जगद्गुरु जी ने कहा कि भगवान श्री राम के जैसा भ्रातृत्व प्रेम यदि हमारे जीवन में आ जाए तो इस घोर कलयुग में भी हम मनुष्य प्रसन्नता पूर्वक रह सकते हैं। भक्त जनों की रक्षा के लिए और दुष्टों के विनाश के लिए धर्म की स्थापना के लिए भगवान इस धराधाम में रामकृष्ण आदि रूपों में अवतरित होते हैं। महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म तक की कथा का श्रवण कराया सभी भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजनों के साथ नृत्य किया बधाई वितरित की। कथा के मुख्य यजमान बद्रीनारायण बलदवा, राधेश्याम खेतान, सुभाष रांदढ एवं विभिन्न राज्यों से पधारे भक्तजन कथा का श्रवण कर आनंदित हो रहे हैं।रविवार को भगवान लक्ष्मी नारायण का वार्षिकोत्सव के उपलक्ष में सरयू जल दुग्ध एवं फल के जूस द्वारा अभिषेक होगा।