: फूल बंगले में बिराजे लाल दरबार साहब
Sat, Jun 7, 2025
फूल बंगले में बिराजे लाल दरबार साहबतपती गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए होता है फूलबंग्ला झांकी: महंत रामनरेश शरणअयाेध्या।फूल-बंगला से सजकर सुरम्यता के वाहक बने मंदिर। भगवान राम की नगरी अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की प्रमुख पीठ कनक भवन परिसर में स्थित दरबार श्री लाल साहब में रविवार काे दिव्य,शुभव्य फूल-बंगला झांकी सजायी गई। झांकी काे मन्दिर के वर्तमान महन्त रामनरेश शरण महाराज ने अपनी सानिध्यता प्रदान की।
यहां पर हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी काे दिव्य भव्य फूल-बंगला झांकी का आयाेजन किया जाता है। उसी कड़ी में आज जेठ माह के शुक्ल पक्ष की वही एकादशी तिथि थी, जिसके परिप्रेक्ष्य में झांकी सजी। विविध प्रकार के सुन्दर पुष्पों से आश्रम सुशाेभित हाे रहा था। भक्तगण बारी-बारी से अपने आराध्य का दर्शन कर धन्य हुए। पूरा मन्दिर परिसर खचाखच श्रद्धालुओं से भरा रहा। जहां तिल फेंकने भर की रत्ती भर जगह नही बची।
इस माैके पर दरबार लाल साहब के महन्त रामनरेश शरण महाराज ने कहाकि फूल-बंगला झांकी का दर्शन करने के लिए अयाेध्यानगरी समेत अन्य प्रान्तों के साधु-संत व भक्तगण यहां आते हैं। जाे भगवान के दिव्य श्रृंगार का दर्शन कर आनन्दित हाे उठते हैंं। उन्होंने कहाकि सैंकड़ाे वर्षाें से मन्दिर में फूल-बंगला झांकी सजायी जा रही है। झांकी की मनाेरमता अपने आप देखते हुए बनती है। जेठ का महीना सबसे तपन वाला माना गया है। इस महीने में बेतहाशा गर्मी पड़ती है, जिससे मनुष्य से लेकर पशु-पक्षी व जानवर बेहाल रहते हैं। हम लाेगाें का मनाेभाव है कि भगवान को भी गर्मी लगती है। उसी भाव के साथ इस तपते महीने में फूल-बंगले की झांकी का आयाेजन हाेता है, जिससे भगवान को शीतलता मिल सके। पुष्प ठण्डक प्रदान करते हैं। इस दौरान गायकों ने अपनी गायकी से सबका मन हर लिया। देर रात्रि तक दर्शन पूजन चलता है। मन्दिर के महंत ने आये भक्तो व सन्त महन्त आदि का प्रसाद देकर स्वागत सम्मान किया।
: गुरुदेव भजनानंदी संत होने के साथ-साथ गौ एवं संत सेवी रहे: गणेशानंद
Sat, Jun 7, 2025
गुरुदेव भजनानंदी संत होने के साथ-साथ गौ एवं संत सेवी रहे: गणेशानंदश्रीरामकृष्ण मंदिर रामकोट के पूर्वाचार्य महंत रामबचन दास महाराज को पुण्यतिथि पर संत-महंतों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन कियाअयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्रीरामकृष्ण मंदिर रामकोट के पूर्वाचार्य महंत रामबचन दास महाराज को पुण्यतिथि पर संत-महंतों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। पुण्यतिथि पर मठ प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। सभा में रामनगरी के संत-महंतों ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संतों ने पूर्वाचार्य को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। साथ ही साथ उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर संत महंत, भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया। अंत में श्रीरामकृष्ण मंदिर के वर्तमान पीठाधिपति रामायणी शीतल दीदी व महामंडलेश्वर गणेशानंद दास महाराज द्वारा आए हुए संत-महंत, विशिष्टजनों का स्वागत-सत्कार कर भेंट, विदाई दिया गया। श्रीरामकृष्ण मंदिर पीठाधीश्वर रामायणी शीतल दीदी व गणेशानंद दास महाराज ने कहा कि मठ में गुरुदेव का पुण्यतिथि महोत्सव निष्ठापूर्वक मनाया गया। पुण्यतिथि पर अयोध्यानगरी के सभी विशिष्ट संत-महंत, धर्माचार्य सम्मिलित हुए। जिन्होंने महाराज श्री को नमन करते हुए श्रद्धापूर्वक याद किया। गुरुदेव भजनानंदी संत होने के साथ-साथ गौ एवं संत सेवी रहे। उन्होंने अयोध्या धाम में एक विशाल आश्रम की स्थापना करवाकर उसका कार्यभार संभाला। आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। आजीवन मठ उत्तरोत्तर समृद्धि में लगे रहे। जहां वर्तमान में गौ, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया, त्योहार आदि परंपरागत रूप से मनाया जा रहा। पूरे भारतवर्ष में मंदिर से जुड़े करोड़ों शिष्य-अनुयायी, परिकर हैं। जो समय-समय पर मठ के परंपरागत उत्सव में सम्मिलित होकर पुण्य के भागीदार बनते हैं। पुण्यतिथि पर हनुमानगढ़ी के सरपंच महंत रामकुमार दास, निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदराम दास, महंत जयराम दास, महंत राममिलन शरण, महंत गोविंद दास, महंत रामानुज शरण, महंत उद्धव शरण, महंत महेश दास, महंत वीरेंद्र दास, महंत हरिभजन दास, महंत श्यामसुंदर दास, महंत प्रिया शरण, महंत सीताराम दास, महंत रामलखन शरण, महंत रामेश्वर दास, महंत भरत प्रपन्नाचार्य, भरत दास, आनंद दास, पूर्व पार्षद पुजारी रमेश दास, पार्षद प्रतिनिधि प्रियेश दास, घनश्याम यादव, एडवोकेट संजय तिवारी आदि उपस्थित रहे।
: घर से चले थे... लौटे ही नहीं, सड़क ने निगल लिए अयोध्या के तीन लाल
Fri, Jun 6, 2025
घर से चले थे... लौटे ही नहीं, सड़क ने निगल लिए अयोध्या के तीन लालजिनकी सांसे थम गई: विवेकपापा, शाम को आऊंगा और फिर,सवाल सिर्फ मौत का नहीं, सिस्टमबहराइच। अयोध्या के चार दोस्त बुधवार सुबह एक साथ कार में बैठे। किसी ने हँसते हुए चाय ली होगी, किसी ने घर पर कह दिया होगा- 'शाम तक लौटेंगे।' मगर किसे पता था, कि ये सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। नानपारा टोल प्लाजा के पास एक तेज रफ्तार बस से उनकी कार की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। मौके पर मौजूद लोगों ने जब दरवाजे खोले, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
तिवारी (32) वैदेही नगर कॉलोनी के रहने वाले। घर में इकलौते कमाने वाले थे। पीछे बुजुर्ग पिता दो छोटे बच्चे और बेसुध पत्नी को छोड़ गए। अभय पांडेय मोहल्ला वैदेही नगर। माता-पिता वृद्ध हैं, बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा। विनोद श्रीवास्तव पक्की ड्योढ़ी, अयोध्या। जिनकी मुस्कान मोहल्ले में सबको भाती थी, आज सबकी आंखों में आंसू हैं। रामकुमार यादव (पठान टोला) को बहराइच से लखनऊ रेफर किया
खामोशीः विवेक की पत्नी बार-बार मोबाइल स्क्रीन देख रही थीं। आखिरी कॉल पर विवेक ने कहा था- 'पापा को बोल देना घबराए नहीं, मैं जल्दी लौट आऊंगा।' अब वही मोबाइल बगल में रखा है और विवेक तावीज की तरह सफेद चादर में लिपटा है।
बस वाले बेखबर, जिम्मेदार बेपरवाहः हादसे के वक्त बस में कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन अब तक साफ नहीं है कि ड्राइवर किसकी गलती से टक्कर हुई। पुलिस का कहना है जांच जारी है, लेकिन सवाल वही पुराना है-क्या ये हादसा टल सकता था? क्या रफ्तार पर कोई कंट्रोल नहीं? क्या हर मौत के बाद बस एक एफआईआर ही काफ़ी है?
का भी है हर साल हजारों जानें सिर्फ लापरवाह ड्राइविंग, खराब रोड मैनेजमेंट और लचर ट्रैफिक निगरानी की भेंट चढ़ती हैं। क्या अब भी हमारी सड़कें सुरक्षित नहीं बनेंगी? क्या अब भी हादसे के बाद मुआवजा ही इंसाफ़ माना जाएगा?