: सगुरु कबीर दास समाज सुधारक थे, उनकी भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति,जो हमारे आत्मा में बसा है: चंपत राय
Thu, Jun 12, 2025
सगुरु कबीर दास समाज सुधारक थे, उनकी भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति,जो हमारे आत्मा में बसा है: चंपत रायज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पर सदुरु कबीर साहब की 627वीं जयंती कबीर मठ में धूमधाम से मनाई गईसदगुरु कबीर मानव एकता के पैरोकार थे: उमाशंकर दासअयोध्या। ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पर सदुरु कबीर साहब की 627वीं जयंती कबीर मठ जियनपुर मोहबरा बाजार, अयोध्याधाम में धूमधाम से मनाई गई। समारोह की अध्यक्षता करते हुए संत परीक्षा साहेब ने कहा कि कबीर ज्ञान, नाम, आचार्य के अद्भुत अनोखे महापुरुष थे। जाति, पाति, धर्म, पंथ को मानने वाला व्यक्ति कबीर साहब को कभी समझ नही पायेगा। हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम धर्म नहीं पंथ है। जो किसी व्यक्ति के द्वारा बनाया गया है। जो चेतना के द्वारा सत्य और असत्य का का परख करता हो वह धर्म है। सदगुरु कबीर ने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। वर्तमान समय में भी कबीर दास ने जो कहा वह आज सत्य हो रहा है। मुख्य अतिथि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि सगुरु कबीर दास समाज सुधारक थे। उनकी भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति है। जो हमारे आत्मा में बसा है। इसी भक्ति का नाम आध्यात्म है। कबीर दास का जन्म हिन्दू या मुस्लिम में हुआ यह चर्चा का विषय नही है। बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है और उसका प्रचार-प्रसार हो। कबीर दास का जन्म भक्ति काल में हुआ। उसी समय जगतगुरु रामानंदाचार्य महाराज ने कहा था जाति पाति पूछय न कोई, हरि को भजैय सो हरि का होई। विश्व कबीर विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष संत उमाशंकर दास ने कहा कि सदगुरु कबीर मानव एकता के पैरोकार थे। उन्होंने भ्रम जाल से मुक्ति पाने का संदेश दिया। उत्तर प्रदेश में कबीर पंथियों की 60 प्रतिशत आबादी है। जो लगभग 22 करोड़ होती है। कबीर पंथ के साधु संत अपनी भागीदारी को लेकर एकजुट होने की बात कर रहे हैं। समारोह का संचालन सरल दास ने किया। कार्यक्रम का संयोजन धर्म प्रकाश दास, अचिन्त दास, दुःखशमन दास द्वारा किया गया। इससे पहले जयंती समारोह का शुभारंभ बीजक पाठ से हुआ। कार्यक्रम में संत निहाल साहेब, बनवारी पति,ब्रह्मचारी, संत निर्मल साहेब बिहार, संत विकास साहेब कौशांबी, संत राम साहेब कौशांबी, संत विचार साहेब, संत प्रकाश साहब, संत विनय शरण साहेब, संत विवेक ब्रह्मचारी, महंत रामेश्वर दास, डॉ. अनिल सिंह, संत शील दास आदि ने अपने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व जिपं अध्यक्ष राजित राम पटेल, उमाशंकर सिंह, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष साकेत रामचंद्र वर्मा, ज्ञानचंद वर्मा, डॉ. अवधेश वर्मा, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा आदि उपस्थित रहे।
: जयंती पर आस्था से रोशन हुआ पुण्य सलिला सरयू का तट
Thu, Jun 12, 2025
जयंती पर आस्था से रोशन हुआ पुण्य सलिला सरयू का तटदिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के तत्वावधान में मां सरयू की दिव्य फूल बंगले की झांकी सजाई गई व 5100 बत्ती की महाआरती के साथ सरयू में अद्वितीय दीपदान किया गयाअयोध्या। सरयू जयंती की रात पुण्यसलिला के तट पर आस्था की इंद्रधनुषी छटा बिखरी। विधि- विधान से पुण्यसलिला का पूजन किया गया। सरयू तट पर झांकी सजी और जगह-जगह पुण्यसलिला की हजारों दीपों से आरती की गई।
रामनगरी अयोध्या में जेष्ठ पूर्णिमा पर माँ सरयू की जयंती बड़े धूम धाम से मनाई गई। जिसमें अयोध्या के संत भी शामिल हुए। दिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के तत्वावधान में मां सरयू की दिव्य फूल बंगले की झांकी सजाई गई और 5100 बत्ती महाआरती व प्रसाद वितरण कर पूरे सरयू में अद्वितीय दीपदान किया गया जिसमें पूरा सरयू तट दीपों से रोशन हो गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय पवन ने मां सरयू की आरती की।
ग्रंथों में भी मां सरयू का विशेष वर्णन किया गया है माना जाता है कि महाराजा रघु की प्रार्थना पर महर्षि वशिष्ठ ने तपस्या करके ब्रह्मदेव को प्रसन्न कर मां सरयू को पृथ्वी पर अवतरित कराने का वरदान प्राप्त किया था। वहीं वर्णन में कहा गया है कि जब ब्रम्हदेव सृष्टि की रचना कर रहे थे तो उससे पहले ही ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी और भगवान विष्णु ब्रह्म देव को दर्शन दिया था। दर्शन के बाद ब्रम्हदेव की तपस्या को देख भगवान विष्णु इतना खुश हो गए थे कि उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे। तभी ब्रह्मा जी ने ऑसुओं को अपने हाथों से रोक उसे मानसरोवर पर स्थापित किया था।इसीलिए सरयू को नेत्रजा भी कहा जाता है। जेष्ठ पूर्णिमा पर मां सरयू महोत्सव का आयोजन बृहद स्तर पर रहा। अयोध्या के स्थानीय नागरिक व संतों ने मां सरयू की भव्य आरती की।
कार्यक्रम के संयोजक दिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के अध्यक्ष एवं करतलिया बाबा आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने कहा कि रामनगरी अयोध्या में आज के दिन मां सरयू का अवतरण हुआ था। पवित्र पावन माँ सरयू की भव्य आरती का बड़ा अद्भुद दृश्य होता है। उन्होंने बताया कि यह उत्सव 4 पीढ़ियों से होता आ रहा है। जिसमें मां सरयू को प्रातः भोग प्रसाद व देर शाम दिव्य आरती होती आ रही है। महंत रामदास कहते है यह करतलिया बाबा सरकार के समय से होता आ रहा है। इस मौके पर,महंत दिलीप दास,पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय, माता प्रसाद पाण्डेय, महंत कन्हैया दास, महंत कमल दास, श्रीचंद यादव, हरिहर यादव, मौजी राम यादव आदि लोग मौजूद रहें।
: रघुभूमि से तपोभूमि की यात्रा श्रीराम के जयघोष के साथ रवाना
Wed, Jun 11, 2025
रघुभूमि से तपोभूमि की यात्रा श्रीराम के जयघोष के साथ रवानायात्रा का उद्देश्य प्रभु राम के आगमन स्थलों को जागृत करना एवं संरक्षित करना: महंत जनार्दन दासमाँ सरयू के जल आचमन के साथ लोकमंगल की कामना कीअयोध्या। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या से रणभूमि से तपोभूमि की तीन दिवसीय यात्रा जय श्रीराम के उद्घोष के साथ बक्सर के लिए रवाना हुई। लोक दायित्व के तत्वाधान में बुधवार को माँ सरयू के अवतरण दिवस पर यात्रा के प्रमुख पवन कुमार के नेतृत्व में तुलसीदास जी की छावनी के पीठाधीश्वर श्री महंत जनार्दन दास जी महाराज, स्वामी दिलीप दास जी महाराज, अध्यक्ष रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट व अवध विश्वविद्यालय के डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी ने अयोध्या धाम के लता चौक से ध्वज दिखाकर बक्सर के लिए 276 किलोमीटर की यात्रा को रवाना किया। इससे पहले प्रभु श्री राम व लक्ष्मण के स्वरूप का तिलक कर लोक दायित्व के पदाधिकारियों द्वारा मां सरयू के जल का आचमन किया एवं लोक मंगल की कामना की। इस यात्रा में समाज के लगभग सभी वर्गों के लोग शामिल रहे। तुलसीदास जी की छावनी के पीठाधीश्वर श्री महंत जनार्दन दास जी महाराज व लोक दायित्व के प्रमुख एवं यात्रा के संयोजक पवन कुमार ने बताया कि यह यात्रा आज अयोध्या धाम से शुरू हुई है। 13 स्थानों पर राम जी के रुकने, विश्राम करने, रात्रि शयन आदि के प्रमाण शास्त्रों में मिलते है। उन स्थानों में प्रथम दिवस पर अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, दूसरे दिन कारो धाम जिनमें आजमगढ़, मऊ, बलिया तथा तीसरे दिन बक्सर पहुंच कर विश्राम लेगी। इस यात्रा में एक रथ सहित लगभग दो दर्जन गाड़ियां साथ चल रही है। स्थानीय लोगों द्वारा जगह जगह यात्रा में पुष्प वर्षा के साथ रामजी की आरती की जा रही है। यात्रा में संकीर्तन मंडली प्रभु श्रीराम के आगमन स्थलों पर हरिकीर्तन करती हुई चल रही है। यात्रा को लेकर आमजनमानस में काफी उत्साह है। इस यात्रा में दीनानाथ सिंह, अंलकार कौशिक, सीता राम प्रजापति, अरविंद सिंह, राणा सिंह, अविनाश शाही, अभिषेक पाण्डेय, गौरव रघुवंशी, अवधेष प्रताप, दिनेश सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय शामिल रहे।