: मानवता व अध्यात्म का संदेश दे रहा स्वामी नारायण सम्प्रदाय
Sun, Jun 29, 2025
मानवता व अध्यात्म का संदेश दे रहा स्वामी नारायण सम्प्रदाय
आद्य संस्थापक घनश्याम महाराज को रविवार को लगेगा छप्पन भोग,110 वें वार्षिक पाटोत्सव पर भगवान का होगा विशेष श्रृंगार, पूजा व अभिषेकनर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को बढ़ा रहे आगे: स्वामी अखिलेश्वरअयोध्या। स्वामी नारायण सम्प्रदाय का स्वर्णिम इतिहास बिना नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद सम्भव ही नही है। महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया है। मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया। आज वर्तमान में उनके बेटे नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को आगे बढ़ा रहे है।
श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में स्वामी नारायण जी महाराज का 110 वां वार्षिक पाटोत्सव पर मंदिर में विशेष पूजा हो रही है। रविवार को स्वामी नारायण मंदिर रायगंज में भगवान का भव्य अभिषेक, श्रृंगार व पूजन किया गया तत्पश्चात छप्पन भोग लगाकर आरती होगी। अयोध्या में स्वामी नारायण संप्रदाय के आद्य संस्थापक घनश्याम महाराज की बाल्यावस्था श्री स्वामीनारायण मंदिर मे बीता था। यह वही स्थान है जहां भगवान स्वामीनारायण जी महाराज के माता-पिता रहते थे और 110 वर्ष पहले उसी घर में भगवान को प्रतिष्ठित किया गया आज उसका वार्षिक उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पांच दिवसीय पाटोत्सव का कार्यक्रम अयोध्या स्वामीनारायण मंदिर के महंत स्वामी अखिलेश्वर दास जी महाराज के संयोजन में मनाया जा रहा। श्री महाराज जी ने बताया कि भगवान के पाटोत्सव के अवसर पर 29 जून को भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों से भोग लगाया जायेगा। सुबह 6 बजे भगवान की मंगला आरती की गई 6 बजे अभिषेक उसके बाद श्रृंगार आरती राजभोग और 10 बजे से 56 भोग के दर्शन के लिए भगवान का पाठ दर्शनार्थियों के लिए खोला जायेगा। पाटोसव के अवसर पर आए संतो श्रद्धालुओं और भक्त जनों को संबोधित करते हुए स्वामी अखिलेश्वर दास जी महाराज ने कहा की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और श्री स्वामी नारायण जी महाराज ने यही संदेश हम सबको दिया है जिसे पूरे मन श्रद्धा के साथ उनको करना चाहिए। पाटोत्सव अवसर पर स्वामी अखिलेश्वर दास जी महाराज ने बताया कि स्वामी जी ने समाज को भय मुक्त किया है और सभी को एक साथ रहने का संदेश दिया है। स्वामी जी महाराज समाज से भेदभाव छुआछूत से दूर हट कर स्वामीनारायण भगवान और राधा कृष्ण देव की सेवा को ही सर्वोपरि माना है और बताया कि मनुष्य को सभी की सेवा निरंतर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री केशव प्रसाद जी महाराज के हाथों यहां प्राण प्रतिष्ठा हुआ था। आचार्य तेजेन्द्र प्रसाद जी मोटा महाराज के पुत्र वर्तमान गद्दीपति आचार्य कौशलेंद्र प्रसाद जी के पावन आशीर्वाद से यह उत्सव सम्पादित हुआ। शास्त्री अखिलेश्वर दास जी महाराज ने बताया कि अयोध्या सप्तपुरीयों में सबसे महत्वपूर्ण पूरी है और यहां भगवान राम का जन्म हुआ था भगवान राम के जन्म स्थान का विवाद भी समाप्त हो गया। भगवान रामलला अपने दिव्य भव्य मंदिर में विराजमान हो गयें है। अब देश-विदेश से लोग आ रहें है अयोध्या का विकास हो रहा, स्वामी नारायण मंदिर रायगंज मे आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद व नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज के सानिध्य में मंदिर अपने शिखर की ऊचाई को छूएगा। मंदिर में जो सेवाएं यहां चलती हैं वह निरंतर चलती रहेगी। मंदिर में गुजरात से सौकड़ों संत व भक्त मौजूद रहें।मैनेजर राहुल शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत किया।
: रथयात्रा महोत्सव पर हनुमत निवास मंदिर में अनुपम छटा निखरी
Sat, Jun 28, 2025
रथयात्रा महोत्सव पर हनुमत निवास मंदिर में अनुपम छटा निखरीहनुमत निवास मंदिर में धूमधाम से मना रथयात्रा महोत्सव,निकली भव्य भगवान जगन्नाथ की रथयात्राकांठ के दिव्य रथ पर सवार होकर निकले भगवान जगन्नाथ, जगह जगह लोगो ने किया पुष्प वर्षाअयोध्या। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास मंदिर में रथयात्रा महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। मंदिर से भगवान जगन्नाथ की भव्य यात्रा निकली भगवान को रथारूढ़ कर मंदिर प्रांगण से नगर भ्रमण कराया गया। भगवान के रथयात्रा महोत्सव का दर्शन कर साधु-संत एवं भक्तजनों ने अपना जीवन धन्य बनाया और पुण्य के भागीदार बने। अंत में उपस्थित जनों को प्रसाद वितरित हुआ। इससे पहले शुक्रवार की सुबह सर्वप्रथम मठ के गर्भगृह में विराजमान भगवान को नया वस्त्र धारण कराकर दिव्य श्रृंगार किया गया। उसके बाद पूजन-अर्चन किया। फिर विविध व्यंजनों का भोग लगाकर उनकी भव्य आरती उतारी। सायंकाल भी भगवान को भोग लगाकर महाआरती उतारी गई। तदुपरांत उन्हें रथ पर विराजमान कराकर मठ परिसर से बाहर निकाला गया जो नगर भ्रमण कराया कर पुनः मंदिर वापस लाया गया। रथ पर विराजमान अपने आराध्य और उनके रथयात्रा महोत्सव का दर्शन कर साधु-संत, भक्तजन आहलादित थे। जिनकी खुशी का कोई ठिकाना नही रहा। वह अपनी सुध बुध खोकर खुशी से झूमने को आतुर दिखे। पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। भक्तिमय वातावरण में भक्तगण पूरी तरह सराबोर रहे। रथयात्रा महोत्सव पर हनुमत निवास मंदिर में एक अनुपम छटा निखरी। जिसकी चकाचौंध में पूरा मठ प्रांगण अलोकित रहा। उत्सव पर अयोध्या धाम के नामचीन कलाकारों ने आश्रम के पूर्वाचार्यों द्वारा रचित पद गाकर चार-चांद लगा दिया। इससे श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों ने अपने गायन-वादन से रथयात्रा महोत्सव की महफिल सजा दी। हनुमत निवास के वर्तमान पीठाधिपति प्रख्यात साहित्यकार युवा चिंतक विचारक महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया। उन्होंने कहा कि मठ में रथयात्रा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह महोत्सव प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाता है। जिसमें हम अपने भगवान को रथारूढ़ कराकर मंदिर से नगर में भ्रमण कराते हैं। इस दौरान हजारों की संख्या में भक्तगण भगवान के रथयात्रा महोत्सव का दर्शन करते हैं। उसी अनुसार इस बार भी रथयात्रा महोत्सव मना। भक्तजनों ने पूरे श्रद्धा भाव संग भगवान के रथ को खींच कर अपना जीवन कृतार्थ किया।
: महंत दयाराम दास जी भजनानंदी संत होने के साथ-साथ विलक्षण प्रतिभा के धनी रहे: राम उजागर दास
Tue, Jun 24, 2025
महंत दयाराम दास जी भजनानंदी संत होने के साथ-साथ विलक्षण प्रतिभा के धनी रहे: राम उजागर दासश्रीदयाराम दास मानस सेवा ट्रस्ट के तत्वाधान में मना महंत दयाराम दास महाराज को 26वीं पुण्यतिथि महोत्सवमहोत्सव महंत रामानंद दास रामायणी महाराज के पावन सानिध्य में मनाया गयाअयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों मे शुमार श्रीपरमहंस आश्रम, वासुदेवघाट के पूर्वाचार्य महंत दयाराम दास महाराज को 26वीं पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया गया। पुण्यतिथि महोत्सव को परमहंस आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामानंद दास रामायणी महाराज ने अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। यह कार्यक्रम श्रीदयाराम दास मानस सेवा ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित रहा। पुण्यतिथि पर सोमवार को मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। सभा में अयोध्या धाम के विशिष्ट संत-महंतों और मठ से जुड़े शिष्य-अनुयायियों ने साकेतवासी महंत की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। संतों ने पूर्वाचार्य के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस अवसर पर परमहंस आश्रम के अधिकारी राम उजागर दास ने बताया कि श्रीदयाराम दास मानस सेवा ट्रस्ट के द्वारा पूर्वाचार्य महंत दयाराम दास महाराज की पुण्यतिथि पर वार्षिक भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में रामनगरी के सभी संत-महंत सम्मिलित हुए। जिन्होंने प्रसाद ग्रहण किया। इससे पहले मठ में साकेतवासी महंत की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। संतों द्वारा उन्हें निष्ठा से याद किया गया। उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साकेतवासी महंत भजनानंदी संत होने के साथ-साथ विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे। वह गौ एवं संत सेवी थे। अपने शिष्य अनुयायियों को भी सेवा का पाठ पढ़ाया। सेवा धर्म के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में कई सेवा प्रकल्प के कार्य संचालित हुए। जिनमें बहुत से प्रकल्प आज भी चल रहे हैं। वर्तमान समय में श्रीदयाराम दास मानस सेवा ट्रस्ट समाजसेवा के क्षेत्र कई अप्रतिम कार्य कर रहा है। अंत में अधिकारी राम उजागर दास महाराज ने
पधारे हुए संत-महंतों का स्वागत-सत्कार कर भेंट, विदाई दिया। पुण्यतिथि पर मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, अधिकारी राजकुमार दास, महंत अयोध्या दास, महंत गिरीश दास, महंत भूषण दास, महंत शशिकांत दास, स्वामी छविराम दास, महंत सीताराम दास, महंत अवधकिशोर शरण, महंत रामलोचन शरण, महंत परशुराम दास, महंत राममिलन दास, महंत पवनकुमार दास, महंत प्रिया शरण, महंत प्रियाप्रीतम शरण, महंत श्रीधर दास, महंत गंगा दास, महंत हरिभजन दास, महंत रामनंदन दास आदि संत-महंत एवं मंदिर से जुड़े भक्तगण उपस्थित रहे।