: हनुमानगढ़ी के पहलवानों का दबदबा वैश्विक पटल पर स्थापित है: महंत संजयदास
Sat, Mar 9, 2024
हनुमानगढ़ी के इस अखाड़ा पर नन्हे पहलवान के साथ बड़े पहलवान भी सीख रहे हैं एक से बढ़कर एक दांव
अयोध्या। रामनगरी की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी मल्य विद्या का भी गढ़ है। जहां के पहलवानों ने पूरे देश ही नही बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहलवानी का दबदबा स्थापित किया है। हनुमानगढ़ी के बड़े अखाड़े पर जोर अजमाइश करने वाले पहलवान वैश्विक पटल पर अपने नाम का झंडा फहराया है। उसी बड़े अखाड़े पर पहलवानी के दांव पेंच सीखने के लिए पहलवानों की प्रतियोगिता हो रही है।
कुश्ती की प्रतिभा में निखार लाने के लिए मजबूत इरादा और बहादुरी की जरूरत होती है। आज अगर हम कुश्ती सीख रहे पट्ठों पर जमकर मेहनत करें और वो भी मन लगा कर पहलवानी सीख लें तो निश्चित तौर पर जिला ही नहीं प्रदेश व देश में अपना व मां बाप का नाम जरूर रोशन कर सकेंगे। ये कहना है राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञान दास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास जी महाराज का। महंत संजय दास अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमान गढ़ी के बड़े अखाड़ा में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता में पहलवानी के लिए तैयार हो रहे पट्ठों की हौसला अफजाई करने पहुंचे थे। गौरतलब है कि अयोध्या के डाभसेमर स्थित अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट स्टेडियम से आए उपक्रीड़ा अधिकारी विवेक कुमार व कोच नवरत्न कुमार द्वारा इन पहलवानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनकी फिटनेस और तजुर्बा परखने के लिए इससे पहले भी एक कंप्टीशन जिला स्तरीय कराया गया है, और शुक्रवार को ये दूसरा कंप्टीशन कराया गया है, जिसमें पहले, दूसरे तथा तीसरे स्थान पर आने वाले नए पहलवानी के पट्ठों को महंत संजय दास द्वारा पुरस्कृत किया गया। बता दें कि अयोध्या हनुमान गढ़ी पर स्थित इस अखाड़े ने देश को बड़े बड़े पहलवान दिए हैं, जिनकी पहलवानी का डंका आज भी बजता है। इस दौरान हनुमान गढ़ी के वरिष्ठ पहलवान महंत राजेश दास, उत्तर प्रदेश केसरी पहलवान बाबा मनीराम दास सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
: 'रामेश्वरमय' हुई श्रीराम की नगरी
Sat, Mar 9, 2024
करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में वह ओत प्रोत रहते थे: महंत बालयोगी रामदास
महाशिवरात्रि पर अयोध्या में गूंजा हर-हर महादेव का महाघोष
अयोध्या पहुंचे लाखों श्रद्धालु, सीएम योगी के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था रही तगड़ी
प्रसिद्ध नागेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
अयोध्या। श्रीहरि की साकेत नगरी अयोध्या शुक्रवार को भगवान राम के भी ईश्वर यानी 'रामेश्वर' को समर्पित हो गई। भोर के तीन बजे से ही हर-हर महादेव के महाघोष और भोले शंकर के जयकारों के बीच शिव भक्तों का सैलाब पहले सरयू नदी के घाट पर और इसके बाद शिव मंदिरों उमड़ पड़ा। प्रातः से ही सरयू में डुबकी लगाकर भक्त अपने आराध्य भोलेनाथ के दर्शन को आतुर दिखे। शिवरात्रि पर अयोध्या में जुटने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार ने सुरक्षा चक्र को काफी मजबूत कर दिया था। सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। रूट डायवर्सन के माध्यम से भीड को नियंत्रित किया गया। वहीं राममंदिर में दर्शनार्थियों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी।
सरयू तट पर विराजमान करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में वह ओत प्रोत रहते थे। राम नाम के साथ बाबा का अनुराग भोलेनाथ में भी अटूट था और बाबा ने ही मां के तट पर स्थित शिवलिंग का शिरोचार्य किया और यह परंपरा निरंतर चलने लगी।बाबा भुनेश्वरनाथ महादेव प्राचीनता की पुष्टि उस सतह से होती है जिस पर वह शिवलिंग स्थापित है और वर्षों पहले करतलिया बाबा ने सहेजा और उनके शिष्य सूर्यनारायण दास ने मंदिर का निर्माण करवाया और वर्तमान पीठाधीश्वर महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बाबा भोले के दरबार को और भी दिव्य भव्य मंदिर बनवा दिया। भोले के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला का निर्माण करवाया। मां सरयू की उत्पत्ति श्री हरि के आंसुओं से हुई है और सरयू तट पर विराजमान भुनेश्वर नाथ महादेव का नित्य प्रति श्रद्धालु भक्तगण मां सरयू के जल से अभिषेक करके पुण्य अर्जित कर रहे हैं। करतलिया बाबा आश्रम के महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बताया की प्रभु श्री राम और भोले बाबा एक दूसरे को श्रेष्ठ मानते हैं और उनकी अभिन्नता शास्त्रों के साथ-साथ सिद्ध संत करतलिया बाबा ने साक्षात पहचानी है जो आज मां सरयू के तट पर बाबा भुनेश्वर नाथ महादेव के रूप में विराजमान है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी महाराज ने कई बार प्रभु श्री राम और बाबा भोलेनाथ का वर्णन किया है और ऐसा माना जाता है कि अगर कोई राम जी का अपमान करके शिवजी को अपनाता है या शिव जी का अपमान करके राम जी को अपनाता है तो उसे किसी की भक्ति नहीं प्राप्त होती है। बल्कि दोनों आराध्य ऐसे भक्तों पर रुष्ट हो जाते हैं।
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद यह पहली महाशिवरात्रि है, इसलिए भोले के उपासक इसे और भी खास मान रहे हैं। बता दें कि भगवान श्रीराम जहां महादेव को अपना ईश्वर बताते हैं और उनके ज्योतिर्लिग की स्थापना करते हैं, वहीं देवाधिदेव शिव भी हनुमान के रूप में रुद्रावतार लेकर रामकाज और प्रभु भक्ति का प्रतिमान गढ़ देते हैं। श्रीराम और शिव के बीच इस अलौकिक संबंध की झलक अयोध्या में हर जगह बिखरी दिखाई दी। नगर के विभिन्न शिवालयों में भोर से ही श्रद्धा और भक्ति में सराबोर शिव भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली।
: हमारी सेना हमेशा लोगों की सेवा, सुरक्षा व सनातन धर्म की रक्षा हेतु संकल्पित: महंत संजयदास
Thu, Mar 7, 2024
हनुमानगढ़ी का भोग प्रसाद देश के कोने-कोने पहुंचा रहा संकट मोचन सेना
251 और 551 रुपये के ई-मनीऑर्डर पर संकटमोचन सेना डाक विभाग के माध्यम से पहुंचा रहा हनुमानजी का प्रसाद
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी का लड्डू अब देश के किसी भी कोने में बैठे श्रद्धालुओं को आसानी से उपलब्ध हो रहा। जिले में डाक विभाग द्वारा शुरू की गई विशेष सेवा के जरिए श्रद्धालुओं को अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर से चढ़ा हुआ प्रसाद, तुलसी पत्र, महावीरी, महावीर यंत्र सहित अन्य प्रसाद भक्तों को घर बैठे मिल रहा है। इस प्रसाद को घर बैठे पाने के लिए श्रद्धालु डाक विभाग को 251 और 551 रुपये का ई-मनीऑर्डर भेज कर प्राप्त कर रहें है। प्रधान डाकघर विभाग ने श्री हनुमानगढ़ी धाम अयोध्या के संकट मोचन सेना द्धारा ये प्रसाद भक्तों तक पहुंचा रही है। इस पुनीत कार्य में संकट मोचन सेना के कार्यकर्ता पूरी तन्मयता से लगे हुए है। सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजयदास जी महाराज के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव जी कहते है ये सेवा हमारे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। इसी बहाने हम भक्तों की सेवा करके अपने आप को धन्य मानते है। शिवम ने कहा कि पूज्य गुरुदेव महंत संजयदास जी महाराज के आशीर्वाद से नित्य सौकड़ों प्रसाद डाक द्धारा भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी टीम इस कार्य को पूरी सफाई से करती है।.श्री हनुमानजी का विशेष भोग प्रसाद संकट मोचन प्रसाद व महावीर प्रसाद दो प्रकार से भक्तों को भेजा जाता है। जिसमें संकट मोचन प्रसाद 251 रुपये का होता है जिसमें महावीरी, हनुमान जी का चित्र और अयोध्या दर्शन बुक व देशी घी लड्डू होता है तो वही महावीर प्रसाद 551 रुपये का जिसमें देशी घी लड्डू, तुलसी माला, हनुमान जी का यंत्र महावीरी व हनुमान जी का चित्र होता है। श्री श्रीवास्तव कहते है ये पैसा एकदम न्यूनतम है इसके मूल में भक्तों की सेवा है। जो भक्त अयोध्या नही आ पाते है उनको घर बैठे श्री हनुमानजी का प्रसाद संकट मोचन सेना उपलब्ध कराती है। हनुमानगढ़ी का प्रसाद लेने के लिए भक्तों को 251 या 551 रुपये का मनीऑर्डर देना होगा।मनीऑर्डर सब पोस्टमास्टर अयोध्या-पिन कोड 224123 को भेजना होगा।मनीऑर्डर भेजने के बाद संकटमोचन सेना ट्रस्ट के जरिए हनुमानगढ़ी मंदिर के सौजन्य से उपलब्ध प्रसाद को डाक विभाग भक्तों तक पहुंचाएगा।
सिद्धपीठ श्रीहनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास जी महाराज कहते है हमारी सेना हमेशा लोगों की सेवा, सुरक्षा व सनातन धर्म की रक्षा हेतु संकल्पित है। हमें खुशी है कि हमारी सेना भक्तों को प्रसाद बिल्कुल साफ सफाई से डाक विभाग द्धारा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से लाखों करोड़ों भक्त श्री हनुमानजी का भोग प्रसाद प्राप्त कर पायेंगे। अयोध्या की महिमा का प्रसार होगा। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। श्रीहनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी व संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष हेमन्त दास जी महाराज कहते है कि ये बड़ी खुशी की बात है कि श्री हनुमानजी का भोग प्रसाद घर बैठे सभी को प्राप्त हो रहा है। इसके लिए संकटमोचन सेना के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि हनुमानजी सभी का कल्याण करेंगे। प्रसाद की व्यवस्था में शिवम श्रीवास्तव के साथ विराट दास, रामानन्द दास सहित हनुमानगढ़ी के तमाम नागा साधु संत लगे रहतें है।