: महात्मा 18 वर्षों तक लगातार पंचाग्नि तपस्या का लेता है संकल्प: महंत परशुराम दास
Fri, Feb 16, 2024
श्री संकट मोचन हनुमान किला में संतों ने पंचाग्नि तपस्या अनुष्ठान को समारोह पूर्वक किया प्रारंभ
धूनी थापते करते त्यागी संत
अयोध्या। अयोध्या तपस्या की भूमि है, यहां पर अनेक तपस्वी संत हुए है। जिन्होंने अपने जप तप के बल पर पूरी दुनिया में अपने प्रभुत्व को स्थापित किया है। वैष्णो त्यागी संतो महात्माओं में पंचाग्नि में बैठकर साधना करने का बहुत महत्व है। यह साधना बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर गंगा दशहरा तक चलती है।जो महात्मा पंचाग्नि तपस्या का संकल्प लेता है, उसे यह तपस्या 18 वर्षों तक लगातार करनी होती है। किसी कारण बस एक भी दिन खंडित होने पर पुनः यह प्रक्रिया एक से प्रारंभ होकर 18 वर्षों तक चलेगी। यह साधना खुले आसमान में होती है इसमें अपने चारों तरफ आग का गोला बनाकर सर पर अग्नि रखकर जपतप अनुष्ठान करना होता है। अयोध्या में त्यागी संतो के आश्रमों में बसंत पंचमी के पावन तिथि से अनुष्ठान प्रारंभ हो गया है। इसी क्रम में धर्मपथ पर स्थित श्री संकट मोचन हनुमान किला में संतों ने पंचाग्नि तपस्या अनुष्ठान को प्रारंभ कर दिया है जो प्रतिदिन सुबह लगभग 10 बजे इस तपस्या में बैठते हैं और जब सूर्य भगवान अपनी पूर्ण ऊष्मा प्रदान करते हैं, तब तक यह तपस्या करते हैं माघ मास से प्रारंभ होकर यह तपस्या फागुन चैत्र वैशाख ज्येष्ठ मास में जब सूर्य भगवान पृथ्वी पर सबसे अधिक उसका प्रदान करते हैं उसे समय भी यह तपस्या होती है और इसका विश्राम बरसात प्रारंभ होने के पहले गंगा दशहरा के अवसर पर समापन किया जाता है पुनः अगले वर्ष बसंत पंचमी से यह तपस्या प्रारंभ होती है।
अवध उत्थान समिति के अध्यक्ष पंचाग्नि साधक संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास ने बताया कि श्रीसंकट मोचन हनुमान किला मंदिर में बसंत पंचमी को लगभग आधा दर्जन संतों ने संकल्प के साथ पंचाग्नि तपस्या का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इसको संतों की भाषा में धूनी तपस्या भी कहा जाता है और जब ठंड का मौसम समाप्त होता है। बसंत ऋतु प्रारंभ होती है और वर्षा ऋतु तक यह तपस्या की जाती है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में दर्जनों संत इस तपस्या को करते हैं और कई संत तो ऐसे हैं जो एक बार 18 वर्ष का संकल्प पूरा करके दूसरी बार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुरुदेव भगवान और प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से मैं भी यह साधना कर रहा हूं और इसका विश्राम गंगा दशहरे के दिन सभी संत मां सरयू के पूजन हवन यज्ञ तर्पण के साथ करते हैं।
: उदासीन संगत ऋषि आश्रम में लगी आग, सामान खाक
Fri, Feb 16, 2024
महंत डॉ भरत दास के कमरे में लगी आग,सूचना पाते ही पंजाब गए श्रीमहंत वापस लौटे
अयोध्या। उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली में श्रीमहंत डॉ भरत दास के कमरे में अज्ञात कारणों से आग लग गई। मठ में मौजूद लोगों को जब तक मामले की जानकारी होती तब तक कमरे में मौजूद रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया। फायर ब्रिगेड के पहुंचने के पहले लोगों ने आग पर काबू पा लिया। जानकारी मिलने पर एसपी एसपी सिटी और कोतवाल सहित फायर विग्रेट के अधिकारी पहुंचे। महंत ने बताया कि वे कुछ दिन पहले वे पंजाब में गए थे। उनका कमरा पूरी तरह बंद था। बुधवार की रात लगभग एक बजे अज्ञात कारणों से आग लग गई। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी उन्हें शिष्यों द्वारा मिली तो वह तत्काल अयोध्या के लिए निकल पड़े। उन्होंने बताया आज के कारण कुछ महत्वपूर्ण चीजें जल गई हैं। इधर मठ में मौजूद लोगों ने प्रांगण में लगे सबमर्सिबल के माध्यम से आग पर काबू पाया। महंत ने आग लगने का अंदेशा सीसीटीवी कैमरे की लगे वायर में शॉर्ट सर्किट बताया है।
: धर्मनाथ भगवान की जन्मभूमि रतनपुरी में हुआ पंजामृत महाअभिषेक
Fri, Feb 16, 2024
क्षुल्लक प्रशांत सागर महराज के सानिध्य में जल, नारियल जल, इक्षुरस, घी, दूध, दही, सर्वोषधि, चतुष्कोण कलश, चंदन विलेपन, पुष्पवृष्टि से मंगल आरती एवं पूर्णकलश पूर्वक पंचामृत अभिषेक हुआ
अयोध्या। तीर्थक्षेत्र कमेटी के अन्तर्गत जैनधर्म के 15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ की जन्मभूमि पर हुआ पंचामृत महाअभिषेक। परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के पावन प्रेरणा एवं मंगल आशीर्वाद से प्रतिदिन भगवान धर्मनाथ की जन्मभूमि रौनाही जी तीर्थ पर महाअभिषेक हो रहा है। उसी क्रम में अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंत्री विजय कुमार जैन ने गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के शिष्य क्षुल्लक प्रशांत सागर महराज के सानिध्य में जल, नारियल जल, इक्षुरस, घी, दूध, दही, सर्वोषधि, चतुष्कोण कलश, चंदन विलेपन, पुष्पवृष्टि, मंगल आरती एवं पूर्णकलश पूर्वक पंचामृत अभिषेक भगवान धर्मनाथ की प्रतिमा के मस्तक पर किया। अन्त में सारे विश्व में शांति की कामना से भगवान के मस्तक पर महाशांतिधारा सम्पन्न की गई एवं भगवान धर्मनाथ के चरण स्थल टोंक पर दूध एवं जल से अभिषेक किया गया। भगवान धर्मनाथ के इस क्षेत्र पर अद्भुत शांति एवं सुरम्य वातावरण है जहाँ पर भगवान के कल्याणक के पावन तीर्थ पर अद्भुत शांति प्रतीत होती है। इस अवसर पर आसाम से आए श्री अनिल कुमार जी जैन-गोहाटी (आसाम) एवं खारूपेटिया से आए भक्तगण उपस्थित रहें क्षेत्र के अध्यक्ष पीठाधीश सवस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी के निर्देशन में अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी के अन्तर्गत प्रतिदिन भगवान धर्मनाथ जन्मभूमि रतनपुरी रौनाही प्रतिदिन भक्तगण पंचामृत अभिषेक एवं पूजन कर रहे हैं एवं इसका आनन्द के साथ पुण्योपार्जन कर रहे हैं।