: हनुमानजी को सहजानंद के भक्त और दास के रुप में दिखाने पर विरोध
Mon, Sep 4, 2023
हनुमानजी का अपमान सनातन संस्कृति के लोग नहीं करेंगे बर्दाश्त: महंत परशुराम दास
अयोध्या। श्री राम नगरी अयोध्या के संतों महंतों ने हनुमान जी महाराज को स्वामीनारायण संप्रदाय के सहजानंद स्वामी के भक्त और दास के रूप में दिखाने पर विरोध प्रकट किया है। कहा, अगर स्वामीनारायण संप्रदाय के लोग सनातन समाज के संतों महंतों से और अनुयायियों से माफी नहीं मांगते हैं तो अयोध्या के संत स्वामी नारायण संप्रदाय की जन्मस्थली गोंडा जिले के छपिया नामक स्थान पर पहुंचकर कड़ा विरोध करेंगे। संतों का विरोध प्रदर्शन श्री पंच तेरह भाई त्यागी खाक चौक, संकट मोचन हनुमान किला मंदिर के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास जी महाराज के नेतृत्व में हुआ।
श्री महाराज जी ने कहा कि सहजानंद स्वामी संत हैं और हमारे सनातन धर्म में आने को संत हुए हैं जिसमें संत तुलसीदास स्वामी वाल्मीकि जी महाराज जगतगुरु रामानंदाचार्य जी महाराज सहित सैकड़ो संत हैं जिन्होंने हनुमान जी को अपना आराध्य माना और श्री राम जी के दास के रूप में उनकी पूजा करते हैं ना कि हनुमान जी को अपना दास बनाया ऐसे में सनातन धर्म और संस्कृति का स्वामी नारायण संप्रदाय के लोगों ने एक चित्र के माध्यम से अपमान किया है जो निंदनीय है जिसको कभी क्षमा नहीं किया जा सकता और अगर वह माफी नहीं मांगते हैं और तत्काल इस चित्र को नहीं हटते हैं तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा और स्वामीनारायण की जन्मस्थली छपिया पहुंचकर हम संत जन इसका विरोध करेंगे। क्योंकि हम अपने प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान जी का अपमान अब सनातन संस्कृति के लोग नहीं बर्दाश्त करेंगे। अब कोई भी अगर सनातन संस्कृति पर वार करता है तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। इस अवसर पर महंत विजय रामदास, महंत धर्मदास, महंत मंगलदास, श्री राम कथा के मर्मज्ञ चंद्रांशु जी महाराज, संगीत के मर्मज्ञ मानस दास भोला बाबा,दरोगा दास सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।
: पूर्णिमा पर मां सरयू की हुई महाआरती, सजी फूल बगलें की झांकी
Sat, Sep 2, 2023
दिव्य मां सरयू आरती सेवा संस्थान के तत्वावधान में सावन पूर्णिमा पर हुआ भव्य आयोजन
अयोध्या। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित प्रसिद्ध पीठ श्री करतलिया बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास के संयोजन में दिव्य मां सरयू आरती सेवा तत्वावधान में नित्य मां सरयू की आरती व प्रसाद वितरण किया जाता है। इसी कड़ी में सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर रक्षाबंधन पर्व पर मां सरयू की 5100 बत्ती की महाआरती की गई साथ ही सरयू जी का फूल बगलें की दिव्य भव्य झांकी भी सजाई गई। इसके बाद वृहद प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर माता प्रसाद पाण्डेय, महंत आनंद दास, कृष्ण मुरारी पाण्डेय, कल्लू पाण्डेय, महंत कन्हैया दास, सजिन तिवारी आदि लोग मौजूद रहें।
: अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : महंत जगदीश दास
Sat, Sep 2, 2023
समारोह पूर्वक हनुमान बाग में झूलनोत्सव का हुआ समापन, कलाकारों व संतों महंतों का श्रीमहंत जी ने किया अभिनन्दन
अयोध्या। प्रतिष्ठित पीठ श्रीहनुमान बाग, वासुदेव घाट के पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में अनादिकाल से झूलन की परंपरा चली आ रही है। उस परंपरा का हम सब आज भी निर्वाहन कर रहे हैं। हम संत, महंत अपने-अपने मंदिरों में युगल सरकार को झूलन पर पधराकर झूला झुलाते हैं। साथ ही साथ अनेकानेक झूलन के पद्य गाकर भाव के अंतरंग में आनंदित भी होते हैं। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम प्रभु श्रीराम व मां जानकी के लिए मणिपर्वत पर झूले का आयोजन किया गया था। जिस दिन झूले का आयोजन रहा। तब से प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल तृतीया को मणिपर्वत झूला मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन हम संत-महंत अपने मंदिरों के देव विग्रहों को पालकी पर बिठाकर गाजे-बाजे, हाथी घोड़ा संग मणिपर्वत ले जाते हैं और झूला झुलाते है। हरियाली तीज के दिन मणिपर्वत पर झूला पड़ने के साथ ही ऐतिहासिक झूला मेले का शुभारंभ हो जाता है। इसी दिन अयोध्या के मठ- मंदिरों में भी झूला पड़ जाता है। जो श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन तक अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है। मंदिरों में सायंकाल झूलन झांकी सजती है, जिसका सिलसिला देररात्रि तक चलता है। अनेकानेक नामचीन कलाकार अपने गायन-वादन से झूलनोत्सव में चार-चांद लगाते हैं। संत, महंत अपने-अपने मंदिरों युगल सरकार को झूला झुलाते हैं। साथ ही कलाकारों को नेग- न्यौछावर भी भेंट करते हैं। झूलन महोत्सव का कार्यक्रम पूरे 15 दिनों तक अपने चरम पर रहता है। महंत जी ने कहा कि झूलन में विराजमान युगल सरकार का दर्शन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि झूलन का समापन रक्षाबंधन के दिन समारोह पूर्वक किया गया। जिसमें रामनगरी के संतों महंतो व कलाकारों का हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वावधान में अभिनन्दन किया गया।इस मौके पर पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।