: भगवान मैथिलीरमण राम का 13वां प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया
Fri, Feb 24, 2023
कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह वेद मंदिर पहुंच साकेतवासी महंत रामकुमार दास की मूर्ति पर माल्यार्पण कर संतो का किया अभिनन्दन
प्राकट्य महाेत्सव में कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी सम्मिलित हुए, भगवान श्रीमैथिलीरमण राम का पूजन-अर्चन कर उनके प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा निवेदित की
अयाेध्या। प्रसिद्ध पीठ श्रीरामाश्रम, रामकाेट में विराजमान भगवान मैथिलीरमण राम का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह भगवान का 13वां प्राकट्य महाेत्सव था। महाेत्सव काे पीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत जयराम दास वेदांती महाराज ने सानिध्यता प्रदान किया। प्राकट्य महाेत्सव में कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी सम्मिलित हुए। जिन्हाेंने भगवान श्रीमैथिलीरमण राम का पूजन-अर्चन कर उनके प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा निवेदित किया। उत्सव से मंदिर प्रांगण आहलादित व उल्लासित नजर आया। पूरा माहाैल भक्तिमय वातावरण रंगा रहा, जिसमें भक्तगण सराबाेर हाेकर गाेता लगा रहे थे। भक्तों ने ठाकुरजी के प्राकट्योत्सव में शामिल होकर अपना जीवन धन्य बनाया। सर्वप्रथम शुक्रवार प्रात:काल मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान श्रीमैथिलीरमण राम का वैदिक मंत्राेच्चार संग पंचामृत और सुगंधित औषधियों से अभिषेक-पूजन हुआ। उसके बाद ठाकुरजी काे नवीन वस्त्र धारण कराकर दिव्य श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात विविध व्यंजनों का भाेग लगाकर महाआरती उतारी। फिर संत-महंत और भक्तगणों काे भगवान के पाटाेत्सव का प्रसाद ग्रहण कराया गया। इस माैके पर काफी संख्या में संत-महंत, भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया। इससे पहले आचार्य शेषनारायण के नेतृत्व में वैदिक विद्वानों ने स्वस्ति वाचन कर कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीरामाश्रम पीठाधीश्वर महंत जयराम दास वेदांती महाराज ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी भगवान श्रीमैथिलीरमण राम का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव हर्षाेल्लास पूर्वक मनाया गया। यह भगवान का 13वां पाटाेत्सव रहा। राजाेपचार विधि से ठाकुरजी का पूजन हुआ। सुबह वैदिक विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्राेच्चार संग पंचामृत और सुगंधित औषधियों से भगवान का अभिषेक-पूजन किया गया। तत्पश्चात नवीन वस्त्र धारण कराकर भव्य श्रृंगार किया। उसके बाद भाेग लगा ठाकुरजी की दिव्य आरती उतारी। महाेत्सव में मंदिर से जुड़े हुए संत-महंत व भक्तगण सम्मिलित हुए। जिन्हाेंने अपना जीवन कृतार्थ किया। प्राकट्योत्सव पर महंत बलराम दास हनुमानगढ़ी, चित्रकुटी मंदिर महंत उत्तम दास महात्यागी, स्वामी गयाशरण, पहलवान घनश्याम दास, स्वामीनाथ सिंह, अमरजीत सिंह काका, साेनू सिंह, अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी, प्रियेश दास, लालू सिंह, श्रीनाथ मिश्र, अखिलेश पांडेय समेत अन्य माैजूद रहे।
: विश्व के भाग्य की कपाट अयोध्या नगरी खोलेगी : रामानुजाचार्य
Fri, Feb 24, 2023
कहा, अयोध्या समाधान-मूलक है, व्यवस्था-मूलक है और धर्म की रक्षा करती है
सीताराम विवाह महोत्सव की कथा में रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा,विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है
अयोध्या। भारत से विश्व के भाग्य की कपाट कोई नगरी खोलेगी तो वह अयोध्या है। इसी से राष्ट्रोदय होगा, विश्व को नई दृष्टि मिलेगी, क्योंकि अयोध्या समाधान-मूलक है, व्यवस्था-मूलक है और धर्म की रक्षा करती है।भारत को राम जैसा आदर्श अयोध्या ने दिया है।अयोध्या भू वैकुण्ठ है।अयोध्या में आते ही व्यक्ति के भीतर का सारा युद्ध समाप्त हो जाता है जो युद्ध रहित है वही अयोध्या है।अयोध्या को देवताओं की पुरी कहा गया है और अयोध्या वासियो को साक्षात् जगन्नाथ का रूप। उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कही। रामानुजाचार्य जी इन दिनों रामनगरी के जानकी महल ट्रस्ट में श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा पंचम दिवस व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें। रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि भगवान श्रीसीताराम जी के विवाह ने ही दुनिया को विवाह संस्कार का आदर्श सिखलाया। उन्होंने कहा कि
विवाह केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है।श्रीराम के विवाह के जरिए हम विवाह की महत्ता और उसके गहन अर्थों से परिचित हो सकते हैं। स्वामीजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीराम-सीता आदर्श दंपति हैं। श्रीराम ने जहां मर्यादा का पालन करके आदर्श पति और पुरुषोत्तम पद प्राप्त किया वहीं माता सीता ने सारे संसार के समक्ष अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है। दो प्राणी अपने अलग- अलग अस्तित्वों को समाप्त कर एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों में परमात्मा ने कुछ विशेषताएँ और कुछ अपूर्णताएँ दे रखी हैं। विवाह सम्मिलन से एक- दूसरे की अपूर्णताओं को अपनी विशेषताओं से पूर्ण करते हैं, इससे समग्र व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसलिए विवाह को सामान्यतया मानव जीवन की एक आवश्यकता माना गया है। एक- दूसरे को अपनी योग्यताओं और भावनाओं का लाभ पहुँचाते हुए गाड़ी में लगे हुए दो पहियों की तरह प्रगति- पथ पर अग्रसर होते जाना विवाह का उद्देश्य है। वासना का दाम्पत्य- जीवन में अत्यन्त तुच्छ और गौण स्थान है, प्रधानतः दो आत्माओं के मिलने से उत्पन्न होने वाली उस महती शक्ति का निर्माण करना है, जो दोनों के लौकिक एवं आध्यात्मिक जीवन के विकास में सहायक सिद्ध हो सके। कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।
: जिसका मन काबू में नहीं उसकी भक्ति किसी काम की नही: साक्षी गोपाल
Fri, Feb 24, 2023
हनुमान बाग मंदिर में सौकड़ों वैदिक आचार्यों का भंडारा शनिवार को
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों व्यासपीठ से श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा की अमृत वर्षा साक्षी गोपाल दास कर रहें हैं। यह महोत्सव हनुमान बाग के भजनानंदी संत महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा के पंचम दिवस साक्षी गोपाल दास ने कहा कि आप उन लोगों को मिलते हैं जो दीन हीन हो कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं उनको आप मिलते हैं जो अपने पद का, अपने धन का, अपने सौंदर्य के मद में डूब जाता है उसको आप नहीं मिलते हो जब तक हमारे ह्रदय इन उपाधियों से छुटकारा नहीं पा लेता तब तक हमारा ह्रदय शुद्ध नहीं होगा और जब तक ह्रदय शुद्ध नहीं होगा तब तक हमे भगवान मिलने वाले नहीं है। श्रील रूप गोस्वामी जी कहते हैं कि जब व्यक्ति अपने हृदय को शुद्ध कर लेगा विनम्रता से तो कही जाकर शुद्ध ह्रदय में भक्ति पैदा होगी
जिस प्रकार सत्संग सुनने के लिए हम अपनी चप्पल जूते बाहर उतार कर आते हैं उसी प्रकार अपने जीवन में भक्ति पाने के लिए हमें अपने सारे पद प्रतिष्ठ सभी उपाधियों को जीवन से उतार देना चाहिए। जब तक हम भगवान की प्रसन्नता के लिए कार्य नहीं करेंगे तब तक हमे भगवान मिलने वाले नहीं। रूप गोस्वामी जी कहते हैं कि भगवान को प्राप्त करने का एकमात्र मूल्य है अपने हृदय को भगवान को पाने की उत्कंठा मैं लगाना हमें अपने हृदय में भगवान को पाने की उत्कंठा होनी चाहिए। जब तक उत्कंठा नहीं होगी तब तक भगवान मिलने वाले नहीं है। ज्ञान के बलबूते पर हम भगवान को नहीं पा नही सकते। जो दशरथ जी थे वह ज्ञान स्वरूप थे और कौशल्या माताजी भक्ति स्वरूप थीं। भगवान जब भी कभी किसी को मिलेंगे तो वह केवल भक्ति के माध्यम से ही मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान को भक्ति बहुत प्रिय है भक्ति और भगवान में कोई अंतर नहीं है। जिस जीव आत्मा के जीवन में भक्ति आ गई फिर भगवान बिना बुलाए अपने आप आ जाएंगे। जिसने अपने मन को अपने वश में कर लिया उसका जीव का मन उस जीवात्मा का सबसे बड़ा मित्र है और जिसका मन काबू में नहीं है उस जीव का मन उस जीव आत्मा का सबसे बड़ा शत्रु है। हमने किसी भी तरह से समझा-बुझाकर अपने मन को भगवान की भक्ति में लगाना है अगर हम आपना मन नहीं लगा सके तो हमारा जीवन व्यर्थ है। मेरे अलावा तुमरहे मन को समझने वाला और कोई नहीं है। इसलिए तुम अपने मन मुझ में लगाओ अगर तूने अपना मन मुझ में लगा दिया तो मैं तुम्हारे मन को अपने मस्तक पर धारण कर लूंगा और जब मैं नाचुगा तब तुम्हरा मन भी नाचे गा।कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री कर रहें है। इस मौके पर राजरानी, चरणदास, ममता अग्रवाल,विनोद अग्रवाल, गीता शर्मा ,राजीव मोहन ने दीप प्रज्वलित कर और प्रभु जी को माल्यार्पण करके आशीर्वाद प्राप्त किया।