: हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ शुरु
Tue, May 3, 2022
108 वैदिक आचार्य कर वाल्मीकीय रामायण पारायण तो 3 यज्ञशाला में पड़ेगी आहुतियां 51 वैदिक करेंगे विधिवत हवन पूजन
श्रीरामायण सूक्ति सुधाकर, सिंहाचलवास्तव्य, श्रीमदुभय वेदांत प्रवर्तक सहित वाल्मीकीय रामायण की विवेचना करेंगे गोपालकृष्णमाचार्य
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। जिसमें दक्षिण भारत से हजारों भक्त अपनी श्रद्धा निवेदित कर रहे है। पूरा हनुमान बाग परिसर दक्षिण परम्परा के पूजा पद्धति से सराबोर दिख रहा है। चारों तरह भक्तमय वातावरण बना हुआ है। इस महाउत्सव में तीन यज्ञशाला में 51 वैदिक आचार्य विधिवत हवन पूजन व आहुतियां डालेगें। तो 108 आचार्य वाल्मीकीय रामायण पारायण कर रहे है। वही देर शाम दक्षिण से आये श्री सातुलूरि गोपालकृष्णमाचार्य जी के श्रीमुख से वाल्मीकीय रामायण की दिव्य कथा होगी जिसमें आचार्य श्री श्रीरामायण सूक्ति सुधाकर, सिंहाचलवास्तव्य, श्रीमदुभय वेदांत प्रवर्तक समेत कई विषयों पर विवेचना करेंगे। यह आयोजन श्री वेंकाटाचार्य वैदिक संस्थान के तत्वावधान में हो रहा है। कार्यक्रम हनुमान बाग सेवा संस्थान के सानिध्य में सम्पादित हो रहा है। चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ का उत्सव 10 मई तक चलेगा। कार्यक्रम में मुख्य रुप से 24 कुंडो में भगवदाराधना , तीर्थ प्रसाद वाल्मीकि रामायण का पारायण प्रत्येक श्लोकों के हवन के साथ होगा। इस महाउत्सव को हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम की यजमान लक्ष्मी न्यायापति है। इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनील दास रोहित शास्त्री समेत पूरा हनुमान बाग परिवार लगा हुआ है।
: संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे मिथिलाशरण व किशोरीशरण: महंत करुणानिधान शरण
Sun, Apr 24, 2022
सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम व द्धितीय आचार्य को संत धर्माचार्यों ने किया नमन
पूर्वाचार्यों की परम्परा को प्राणपण से आगे बढ़ाकर गौरवान्वित है सियारामकिला
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो भगवद भजन में ही अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिये। उन संतों में एक थे परम पूज्य महंत मिथिलाशरण महाराज व पूज्य महंत किशोरीशरण महाराज। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित प्रतिष्ठित पीठ सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम आचार्य महंत मिथिलाशरण जी महाराज की 32वीं व द्धितीय आचार्य महंत किशोरीशरण जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि आज बड़े ही श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इन दिग्गज आचार्यों से मात्र सियाराम किला ही नही सम्पूर्ण रामनगरी आलोकित है।
रामनगरी में साधना एवं सिद्धि के पर्याय स्वामी जानकीशरण जी महाराज झुनकी बाबा के शिष्य मिथिलाशरण जी को गुरु परम्परा के प्रति समर्पित पहुंचे हुए साधक यशश्वी महंत के रुप में याद किया जाता है। सियाराम किला के रुप में एक धार्मिक संस्था को भव्यता देने वाले पूज्य मिथिलाशरण जी को जब लगा कि उनका शरीर थक रहा है, तो उन्होंने महंती छोड़ने में एक पल की भी देरी नही की और अंतिम श्वांस लेने के 6 वर्ष पूर्व ही उन्होंने महंती अपने शिष्य किशोरीशरण जी को प्रदान की। यह निर्णय सियाराम किला की गौरवपूर्ण परम्परा में चार चांद लगाने वाला रहा। गुरु भक्त के रुप में पूज्य किशोरीशरण जी आज भी स्मरणीय है, तो स्थान की मर्यादा के अनुरुप साधु सेवी के रुप में उनका कोई सानी नहीं है।
इन दोनो आचार्य के पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर में रामनगरी के विशिष्ट संतो ने आचार्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किये। यह सारा कार्यक्रम मंदिर के वर्तमान महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के पावन सानिध्य व मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज के देखरेख में सम्पादित हुआ। कार्यक्रम में आज प्रातःकाल पूज्य महाराज श्री की चरण पादुका पूजन व भव्य अभिषेक किया गया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ।आये हुए अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से किया गया।
महंत किशोरीशरण जी महाराज के शिष्य एवं उत्ताराधिकारी वर्तमान महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के अनुसार पूर्वाचार्यों ने सियाराम किला को परिपूर्ण धार्मिक केंद्र के तौर पर स्थापित करने में कोई कसर नही छोडी पर उनका प्रताप था वे मठ मंदिर के बजाय प्रभु भक्ति एवं चरित्र निर्माण के पक्षधर थे, आज हम पूर्वाचार्यों की इस परम्परा को प्राणपण से आगे बढ़ाकर गौरवान्वित है।इस अवसर पर महंत कमलनयन दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीमहंत मैथिली रमण शरण, श्रीमहंत सियाकिशोरी शरण, अधिकारी राजकुमार दास, महंत बलराम दास हनुमानगढ़ी, महंत रामकुमार दास, महंत मनमोहन दास, महंत रामनरेश दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत राम दास, जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य, महंत अवधेश दास,आलोक मिश्रा, अनुज दास, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष उत्तम बंसल, अभिषेक अग्रवाल, अनुभव अग्रवाल, पवन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
: रोजा इफ्तार में मांगी अमन-चैन की दुआ
Sat, Apr 23, 2022
इफ्तार और सेहरी के वक्त मांगी गई दुआ होती है कबूल : नन्हे मिंया
अयोध्या। रमजान का मुबारक महीना तमाम महीनों में अफजल होता है। यूं तो हम पूरे साल कई महीनों में रोजा रखते हैं जैसे शबे बरात और शबे मेराज का रोजा लेकिन जो फजीलतें और रहमतें रमजान के रोजे रखने में मिलती है वह किसी और महीने में नहीं।
उक्त बातें रामनगरी के गंगा जमुनी तहजीब के सबसे बड़े झंडाबरदार समाजसेवी मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया ने कही। उन्होंने कहा कि वैसे तो रमजान का पूरा महीना और हर एक लम्हा फजीलत वाला होता है लेकिन सेहरी और इफ्तार का वक्त एक ऐसा वक्त है जब रमजान के महीने में इन दोनों वक्त मांगी गई दुआ अल्लाह ताला के द्वारा कबूल की जाती है। इसलिए हर मुसलमान को इन दो वक्तों में अल्लाह से ज्यादा से ज्यादा दुआ मांगनी चाहिए और बाकी वक्तों में अल्लाह की दिल से खूब इबादत करनी चाहिए।
कार्यक्रम के संयोजक समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी ने कहा कि हदीसों में आया है कि अल्लाह तीन लोगों की दुआएं कभी रद नहीं करता और उन्हें हमेशा कबूल फरमा लेता है। वह तीन आदमी हैं, रोजेदार, आदिल बादशाह और मजलूम द्वारा मांगी गई दुआ। इमरान कहते हैं कि रोजेदार की दुआ हमेशा इफ्तार के वक्त कबूल कर ली जाती है।यहां तक कि इस मुबारक महीने की इतनी फजीलत है कि रमजान के पूरे महीने में हर रोज हर शख्स की एक न एक दुआ कबूल होती है। वे कहते हैं इफ्तार के समय दुरूद ए पाक पढ़ने के बाद आप जो दुआ और हाजत आप मांगना चाहते हैं। उसे भी जरूर शामिल करें।किसी भी दुआ की शुरुआत अल्लाह की तारीफ फिर, प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम पर दुरूद भेजने के बाद तमाम उम्मते मोहम्मदिया के हक में दुआ करनी चाहिए।इसके बाद अपनी निजी हाजतों की दुआ मांगनी चाहिए ऐसा करने से अल्लाह हमारी दुआ जल्दी कबूल करता है। रोजा इफ्तार कार्यक्रम के संयोजक समाजसेवी सुल्तान अंसारी ने कहा कि रमजान के मुबारक महीने चल रहा है। अल्लाह सभी की दुआ कबूल करे। सभी खुश रहें। इस रोजा इफ्तार में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। इफ्तार के बाद मुल्क में अमन चैन की दुआएं मांगी गई।
समाजसेवी मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया व उनके दोनो पुत्र मोहम्मद इमरान अंसारी व सुल्तान अंसारी ने रोजा अफ्तार का बड़ा ही दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इफ्तार के बाद कारी मोहम्मद असलम हाफिज जी इमाम ने मस्जिद बिलाल सुतहाटिया में रोजेदारों को नमाज मगरिब अदा कराई गई। इस दौरान अख्तर अली मुखिया, महताब खान, बिलाल अहमद, मंजूर अहमद, सैफ, कैफ, आजम खान सहित बड़ी संख्या में रोजेदार मौजूद रहें।