: साधुता की प्रतिमूर्ति थे स्वामी बलरामशरण : महंत रामशरणदास
Sun, Apr 17, 2022
अयोध्या। श्रीराम जन्म भूमि परिसर के निकट स्थित अति प्राचीन सिद्धपीठ श्री रंगमहल मंदिर के पूर्वांचार्य महंत स्वामी बलराम शरणजी महाराज की पुण्यतिथि शनिवार को धूमधाम से मंदिर के प्रांगण में मनाई गई। इस दौरान साधु संतों भक्तों व शिष्यों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पुण्यतिथि समारोह में वर्तमान महंत स्वामी रामशरणदास जी महाराज ने कहा कि साकेत वासी महंत बलरामशरण जी साधुता विद्वता के प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने सदैव धर्म के उत्थान हेतु कार्य किए। उनके द्वारा यहां पर बहुत से उत्कृष्ट व सराहनीय कार्य किए गए। उनके द्वारा इस मंदिर का काफी विकास कराया गया। वे निर्मल छबि के प्रकांड धार्मिक विद्वान व सद्गुरु थे। पुण्यतिथि समारोह में रामनगरी के संतों का सम्मान किया गया। आये हुए अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीकें से मंदिर के पुजारी साकेत जी व राहुल जी ने किया।
इस मौके पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें अयोध्या के प्रमुख साधु संतों भक्तों शिष्यों नेताद्वय आदि ने प्रसाद ग्रहण किए। पुण्यतिथि के कार्यक्रम में दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, जगद्गुरु स्वामी रामनदिनेशाचार्य महाराज, महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज महंत कमल नयन दास जी महाराज महंत हरिसिद्धि शरण जी महाराज, महंत कृपालु रामभूषण दास, अयोध्या भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता महंत बृजमोहन दास महंत राम लखन चरण गहोई, महंत माधव दास, महंत रामप्रिय दास, महंत मन मोहनदास, पुजारी रमेश दास पुजारी राजू दास सहित अयोध्या के सैकड़ों सन्त महंत शिष्य व भक्तगण आदि शामिल रहे।
: सन्तों और गुरुदेव की कृपा से तीर्थ करने का सौभाग्य मिलता है: इन्द्रदेवजी सरस्वती जी
Sat, Apr 9, 2022
प्रातः श्री राम कृपा महायज्ञ होगा, 12 बजे रामलला का भव्य अवतरण महोत्सव धूम-धाम से मनाया जाएगा
अयोध्या। श्री रामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर कनक महल में संत इन्द्रवदेवजी सरस्वती जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है।कथा के आज अष्टम दिवस में कथा का प्रारंभ गुरु की महिमा बताते हुए किया। जब तक गुरु द्वारा बताए गए चरित्र शिष्यों के आचरण में नहीं आएगा तब तक गुरु के सिद्धांतों की रक्षा नहीं हो सकती। सीताराम जी के चरित्र का आचरण करना ही होगा। उन्होंने कहा कि विवाह में सदा 3 - 4 दिन तक संन्यासी, धर्मात्मा, ज्ञानी को बुलाओ और 7 दिन की कथा सुनो। यह ज्ञान देनेवाले एकमात्र सन्त जी ही हैं। सन्त जी आगे बताते हैं कि सैकड़ों लोग तो तीर्थ में केवल घूमने-खाने-पीने-टहलने के लिए आते हैं। तीर्थ में आने के लिए पुण्य लगता है, कभी-कभी सन्तों और गुरुदेव की कृपा से तीर्थ करने का सौभाग्य मिलता है। गुरु को दूध की मलाई की तरह ऊपर ही रखें तो जीवन में सदा आनंद रहेगा। गुरु को घर में प्रार्थना पूर्वक विश्राम और भोजन आदि सबके लिए कहना चाहिए। श्री राम भगवान 26 वर्ष की आयु में भी माता कौशल्या जी के साथ शयन करते थे, धन्य है वह संस्कृति, ऐसा बालक अपने कुल का सदा नाम ऊंचा करेगा। स्वामीजी ने बताया कि वेद प्रमाणित बात है जब तक आँचल में दूध है तब तक बच्चा गर्भ में ही है ऐसा समझकर पालना चाहिए। राम तो रामायण से भी पहले से हैं अतः उनका चरित्र भी उतना ही पहले का है।
आयुर्वेदाचार्य संत इन्द्रदेवजी सरस्वती जी महाराज ने बताया कि आटा और रोटी हो तो उसे खानेवाला का स्वास्थ्य कभी खराब नहीं होता। विवाह का बंधन ऐसा है कि हमें पीछे के जीवन का नहीं पूछना चाहिए। जो व्यक्ति मां बाप को प्रतिदिन प्रणाम करता है, उसे अकाल मृत्यु नहीं आती, उसे सर्पदंश नहीं होता। राम की सेवा निस्वार्थ भाव से करो, तो आपके बुढ़ापे और अंतिम जीवन का इंतज़ाम स्वय राम जी कर देंगे। लक्ष्मी सदा राम जी की पत्नी बनती हैं और महालक्ष्मी दया बनती हैं। जो एकदम गरीब था और अचानक करोड़पति हो जाए तो उसे दानीदाता बन जाना चाहिए अन्यथा बहुत जल्दी कंगाल भी हो जाएगा। बकरे का एक भी गुण अच्छा नहीं है, उसे खाने से केवल माँस बढ़ता है, तब भी लोग उसे खाते हैं। देश को चलानेवाला कोई भी हो लेकिन हमारा देह चलानेवाला राम ही होना चाहिए। मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार सभी आत्मा के साथी हैं, लेकिन शरीर में उनका स्थान कहाँ है यह किसी को नहीं पता। जिनके पति वानप्रस्थ में संन्यास लेकर जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, ऐसे पतियों की पत्नियों को उन्हें ऐसा करने में साथ देना चाहिए।
यह देश वीरांगनाओं का है, यहाँ रानी लक्ष्मीबाई ने 5 मंजिला किले से अंग्रेज़ों पर घोड़े पर सवार होकर आक्रमण किया था। और संत जी रानी लक्ष्मीबाई को स्मरण करते हुए गीत गाया "रेशमी सलवार कुर्ता जाली का, रूप सहा न जाए झाँसीवाली का" ! भरत शत्रुघ्न कश्मीर आवेद विद्या सीखने के लिए गए थे। किवाड़ों में दरार पड़ने लगे, आँगन की तुलसी सूख गई, गर्भवती महिलाएं भी ऐसी स्थिति में अपने भगवान श्री राम जी के साथ वनवास में उनके साथ जाना चाहती थीं। घोड़ों के आँसू नहीं रुक रहे थे। आगे बताया कि मित्र, पत्नी और धन की पहचान आपत्ति काल में होती है। केवट से कुछ सीखना चाहिए, नाविक को साधुओं से भी पैसा नहीं लेनी चाहिए । संत जी ने आग्रह करते हुए कहा कि शिष्यों को चाहिए कि गुरु से भेंट होने पर संसार के प्रश्न न पूछते हुए आत्मा के कल्याण की चर्चाएं करनी चाहिए तभी समय सफल है समझो।
ज्ञात हो कि 10 अप्रैल को प्रातः 7 बजे श्री राम कृपा महायज्ञ का आयोजन किया गया है। कथा का समय बदलकर प्रातः 10 बजे किया गया है तथा ठीक 12 बजे रामलला का अवतरण महोत्सव बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाएगा।
: संतो का काम धर्म देश व राष्ट्र की रक्षा है: महंत परशुराम दास
Fri, Apr 8, 2022
रामनगरी में श्री राम जन्मोत्सव का उल्लास, श्रीहनुमान किला में हो रहा श्रीसीताराम महायज्ञ अनुष्ठान, दुर्गा सप्तशती का पाठ
हवन कुंड में आहुतियां डालतें महंत परशुराम दास व वैदिक आचार्य गण
अयोध्या। राम नगरी अयोध्या में रामनवमी अपने चरम पर है। मठ मंदिरों में भगवान का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ अयोध्या में भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का उत्सव प्रारंभ हो गया। विगत दो वर्ष कोरोना महामारी के कारण सारे उत्सव बिना श्रद्धालुओं के मनाया गया। इस बार कोरोना का खतरा अधिक न होने के कारण पूरी अयोध्या श्रद्धालुओं से पटी नजर आ रही है। चारों तरह हर मठ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिख रही है। हर कोई अपने आराध्य का जन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मना रहा है।रामनगरी के संकट मोचन श्री हनुमान किला मंदिर में महंत परशुराम दास के संयोजन में विश्व कल्याणार्थ श्री सीताराम महायज्ञ व दुर्गा सप्तशती का पाठ का दिव्य आयोजन किया गया है। जिसमें प्रतिदिन वैदिक आचार्य व संतो द्धारा हवन कुंड में आहुतियां डाली जा रही है। रामनगरी के श्री हनुमान किला मंदिर में श्रीराम महायज्ञ का भव्य आयोजन के साथ देश की रक्षा को लेकर दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया जा रहा है। हनुमान किला के महंत परशुराम दास के कहा कि संतो का काम धर्म देश व राष्ट्र की रक्षा है। भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है।