: जब भाव उदित हो जाते हैं तब परमात्मा का प्राकट्य हो जाता है: रामदिनेशाचार्य
Mon, Dec 6, 2021
चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ जी के राजमहल बड़ी जगह में धूमधाम से मनाया गया रामजन्म
अयाेध्या। सीताराम विवाह महाेत्सव के उपलक्ष्य में चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ जी के राजमहल बड़ी जगह में श्रीरामकथा के चतुर्थ दिवस प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ कथाव्यास हरिधाम गोपाल पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने राम जन्म की कथा का रसास्वादन कराके सभी कोमंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम के जन्म के अनेक कारण हैं। जिसमें नारद जी का श्राप और मनु शतरूपा का भगवान को प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या यद्यपि परमात्मा के आने के मुख्य कारण तो भक्त हैं। भगवान भक्तों के लिए धरा धाम पर पधार ते हैं और ब्रह्म का सरलीकरण इस अयोध्या में ही हुआ है। स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि जो असीम ब्रह्म माता कौशल्या के गोद में आकर के छोटा हो गया। महाराज दशरथ जो बहुत ग्लानि में थे गुरुदेव के पास जाकर उनकी चिंता मिट गई और श्रृंगी ऋषि ने यज्ञ करा कर उस प्रसाद को रानियों में बटवा दिया। जिसके परिणामस्वरूप निर्गुण ब्रह्म सगुण साकार बनकर अयोध्या के इस पावन दिव्य धाम में प्रकट हुआ। मूलतः परमात्मा भक्तों के भाव के लिए प्रकट होता है जब भाव उदित हो जाते हैं तब परमात्मा का प्राकट्य हो जाता है।सीताराम विवाह महाेत्सव काे चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ जी के राजमहल बड़ी जगह के विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज ने सानिध्यता प्रदान कर रहे है। महोत्सव के व्यवस्थापक अपने नाम के अनुरूप विंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास महाराज लगे हुए है। रामकथा में मुख्य रुप से महंत माधव दास हनुमानगढ़ी, रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्यामासदन के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी श्रीधर दास महाराज, कामधेनु आश्रम के पीठाधीश्वर महंत आशुतोष दास, नरेश गर्ग, कुसुमलता गर्ग, आचार्य गौरव दास शास्त्री, शिवेन्द्र शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक व बड़ी जगह के शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: राम हर्षण कुंज के श्रीराम मंत्रार्थ मंडपम में राम विवाह की निभाई जा रस्में
Mon, Dec 6, 2021
रस्मोरिवाज के साथ निभाई जा रही परम्पराएं, रामलीला के माध्यम से निवेदित कर रहे अपनी आस्था
विवाह उत्सव में गुलजार है अयोध्या, मठ-मंदिरों में बज रहे मंगल
अयोध्या। राम विवाह महोत्सव पर अयोध्या के सैकड़ों मंदिरों में आयोजनों का दौर शुरू हो गया है। इस आयोजन को लेकर अयोध्या मंदिरों को रंग बिरंगे लाइटों व फूल मालाओं से सजाया गया है। तो वहीं इस आयोजन में शामिल होने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु व पर्यटक अयोध्या पहुंच चुके हैं।राम मंदिर के भव्य निर्माण के साथ अयोध्या में राम विवाह महोत्सव का आयोजन बेहद खास स्वरूप दिया गया है। अयोध्या के कनक भवन, जानकी महल, राम हर्षण कुंज, विअहुती भवन, रंग महल, दशरथ महल बड़ा स्थान,करुणानिधान भवन, रंग महल, रसमोद कुंज सहित दर्जनों मंदिरों में राम विवाह महोत्सव को लेकर रामकथा व रामलीला मंचन के साथ धार्मिक आयोजन शुरू हो चुका है। वहीं राम हर्षण कुंज के श्रीराम मंत्रार्थ मंडपम में राम विवाह महोत्सव पर श्री किशोरी जी का जन्म मनाया गया जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संतों का मंदिर के महंत अयोध्या दास महाराज व संत राघवदास जी ने स्वागत सम्मान किया।मंदिर के संत समाजसेवी राघवदास ने बताया कि रामलीला के माध्यम से हम अपनी आस्था अपने आराध्य के प्रति समर्पित करते है। हमारे यहां किशोरी जी प्रधान है। इसलिए पूरे रस्मोरिवाज के साथ मिथिला पद्धति से विवाह महोत्सव मनाया जाता है। राघव दास ने बताया कि रामलीला में सोमवार को नगर दर्शन मंगलवार को धनुष यज्ञ होगा। बुधवार को भगवान अपने अनुजों समेत रथ पर दुल्हा बनकर निकलेगें। हमारे यहां की राम बारात बहुत ही दिव्य व आकर्षक का केंद्र रहती है। तो वही 9 दिसंबर को रामकलेवा के साथ उत्सव का समापन होगा।
: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: रामदिनेशाचार्य
Sun, Dec 5, 2021
दशरथ राजमहल बड़ा स्थान में रामविवाह महोत्सव का छाया उल्लास
श्रीराम कथा श्रवण करने पहुंचे बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्धिवेदी, महंत कृपालु रामभूषण दास ने किया स्वागत
अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें दशरथ राज महल बड़ा स्थान में सीताराम विवाह महोत्सव में आयोजित श्रीराम कथा में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी के श्रीमुख से हो रही श्रीराम कथा की अमृत वर्षा। कथा के तृतीय दिवस आशीर्वाद लेने पहुंचे सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्धिवेदी का महंत कृपालु रामभूषण दास ने स्वागत किया। यह आयोजन दशरथ राज महल बड़ा स्थान के बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के पावन अध्यक्षता में हो रहा है। कार्यक्रम का सफल व्यवस्था व संचालन बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास महाराज कर रहे है। व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं।
स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है। इस मौके पर उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली के श्रीमहंत डा भरत दास महाराज, नरेश गर्ग व उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता गर्ग, गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।