Thursday 15th of October 2026

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महंत लक्ष्मणदास जी की सादगी और संवेदनशीलता को संतों ने किया याद : डांडिया मंदिर के पूर्वाचार्य की पुण्यतिथि पर जुटे संत-महंत, उत्तराधिकारी महामंडलेश्वर महंत गिरीशदास के सेवा-साधना कार्यो

महंत लक्ष्मणदास जी की सादगी और संवेदनशीलता को संतों ने किया याद

डांडिया मंदिर के पूर्वाचार्य की पुण्यतिथि पर जुटे संत-महंत, उत्तराधिकारी महामंडलेश्वर महंत गिरीशदास के सेवा-साधना कार्यों की सराहना

अयोध्या। डांडिया मंदिर के पूर्वाचार्य साकेतवासी महंत लक्ष्मणदास की पुण्यतिथि पर संतों, महंतों और श्रद्धालुओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संतों ने उनके व्यक्तित्व, सरलता, सादगी और सेवा-साधना को याद किया। सुबह से ही मंदिर में पवित्र ग्रंथों का पाठ, भगवान का पूजन और अभिषेक किया गया। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा और वृहद भंडारे का आयोजन हुआ।

जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि महंत लक्ष्मणदास की सरलता और सादगी सभी को प्रभावित करती थी। वह बेहद संवेदनशील और हृदयस्पर्शी व्यक्तित्व के धनी थे। उनसे मिलने वाला व्यक्ति सहज ही उनके व्यवहार से प्रभावित हो जाता था। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों का जीवन समाज और संत परंपरा के लिए प्रेरणास्रोत होता है।

उन्होंने महंत लक्ष्मणदास की परंपरा को आगे बढ़ा रहे उनके उत्तराधिकारी महामंडलेश्वर महंत गिरीशदास की भी सराहना की। कहा कि सेवा और साधना के साथ वह मंदिर की परंपराओं को आगे बढ़ाने में सफल हो रहे हैं।

निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास ने कहा कि महंत लक्ष्मणदास का जीवन त्याग, तपस्या और संत सेवा का उदाहरण रहा। उन्होंने मंदिर की आध्यात्मिक परंपरा को मजबूत करने के साथ श्रद्धालुओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं संकट मोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि संतों का जीवन समाज को दिशा देने का कार्य करता है। महंत लक्ष्मणदास ने धर्म, सेवा और साधना के माध्यम से अयोध्या की संत परंपरा को समृद्ध किया। उनकी स्मृति संत समाज के लिए सदैव प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने महंत गिरीशदास द्वारा परंपरा के निर्वहन की भी सराहना की।

महंत डा. महेश दास ने कहा कि महंत लक्ष्मणदास का व्यक्तित्व सहजता, करुणा और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण था। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पुण्यतिथि जैसे आयोजन संतों की तपस्या और उनके योगदान को स्मरण करने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर महंत गिरीशदास ने जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य सहित उपस्थित संत-महंतों, विशिष्ट जनों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि पूर्वाचार्य महंत लक्ष्मणदास द्वारा स्थापित सेवा और साधना की परंपरा को आगे बढ़ाना उनका संकल्प है।

कार्यक्रम में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास, महासचिव महंत सत्यदेव दास, महंत डा. महेश दास, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास, श्रृंगी ऋषि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास, खाक चौक के श्रीमहंत बृजमोहन दास, महंत रामशरण दास, महंत डा. रामानंद दास, महंत अभिषेक दास, भाजपा नेता अभिषेक मिश्र, आलोक सिंह, मुकेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में संत-महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे। अंत में वृहद भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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