: जमीन बेचकर पत्नी को भेजा कनाडा, विदेश जाकर बदली नियत कर ली दूसरी शादी,
Wed, Feb 7, 2024
इंसाफ के लिए दर दर भटक रहा पति
भारतीय छात्रों का कनाडा जाकर पढ़ाई करने का क्रेज दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में विदेश में पक्के होने के लिए छात्र कई तरह के तरीके अपनाते है। इतना ही नहीं लड़कियां भी विदेश में पीआर लेने के लिए शादी का सहारा ले लेती है। ऐसा ही एक नया मामला सामने आया है जहां भारत में शादी करके कनाडा गई एक लड़की ने फिर से विदेश में जाकर दूसरी शादी कर ली। इतना ही नहीं उसने अपने भारत में ससुराल वालों को धोखा देते हुए उनके फोन नंबर भी ब्लाॅक कर दिए।
बता दें कि मामला पंजाब के बटाला के नजदीकी गांव पेराेशाह से सामने आया है। यहां के रहने वाले हरमिंदर सिंह की पत्नी पढ़ाई करने कनाडा चली गई. इसके बाद अपने पति को वहां नहीं बुलाया और कनाडा में दूसरी शादी कर ली।
वहीं अब पीड़ित परिवार ने एसएसपी ऑफिस में पुलिस के उच्चाधिकारियाें से परिवार के लोगों ने शिकायत की है। मामले की जानकारी देते हुए हरमिंदर सिंह ने बताया कि उसकी शादी करीब 12 साल पहले जिला बटाला के गांव की रहने वाली लड़की के साथ हुई थी। दाेनाें एक साथ पढ़ाई करते थे और परिवाराें की रजामंदी के साथ दाेनाें की शादी हुई।
शादी के करीब तीन महीने बाद उसकी पत्नी कनाडा चली गई थी। इस दौरान वह पत्नी के कॉलेज की फीस भी पति ही भरता रहा. इसके लिए उसने अपनी पैतृक जमीन भी बेच दी।
हरमिंदर सिंह ने बताया कि पहले तो उसकी पत्नी उसे कनाडा ले जाने के लिए कहती रही इतना ही नहीं दो-तीन बार उसने फाइल भी लगाई। उसे कनाडा का वीजा नहीं मिला पाया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के एक साल बाद उनकी पत्नी पंजाब आई थी। जब वह यहां से गई, तो वह गर्भवती थी। मगर, कनाडा जाने के बाद उसकी पत्नी ने अपने परिवार की सहमति से गर्भपात करा लिया। अब उसके कनाडा में रहने वाले दोस्तों ने जानकारी दी है कि कुछ समय पहले उसकी पत्नी ने कनाडा में दूसरी शादी कर ली है। इतना ही नहीं पति और उसके घरवालों का नंबर भी ब्लॉक कर दिया है। और तो और पत्नी को फोन करने पर वह गाली-गलौज करने लगती है और ससुराल वालों को जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। युवक की की मां सुरजीत कौर ने कहा कि 12 साल से कनाडा जाने की उम्मीद में बैठे उसके बेटे काे धोखा मिला है, जिससे मन काे बहुत ठेस पहुंची है।
: भगवान ऋषभदेव ने किया था ब्राह्मी लिपि का सूत्रपात: ज्ञानमती माता
Wed, Jan 17, 2024
भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर जैन मंदिर रायगंज में छाया उल्लास
अयोध्या। जैनधर्म के अनुसार इस सृष्टि पर षट्काल परिवर्तन चलता रहता है। प्रथम, द्वितीय और तृतीय काल में भोगभूमि विद्यमान रहती है। इन कालों में स्त्री-पुरुष का युगलिया जन्म होता है और जीवन जीने के सभी साधन कल्पवृक्षों से प्राप्त होते हैं। लेकिन चतुर्थ काल का आरम्भ होते ही कल्पवृक्ष शक्तिहीन हो जाते हैं और प्रजा में जीवन जीने के लिए हा-हाकार मच जाता है। ऐसे समय में जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जन्म लेकर इस धरती पर प्रजा को जीवन जीने की कला सिखाते हैं। यही इस युग का आदिकाल कहलाता है और कर्मभूमि प्रारम्भ होती है। उक्त बातें बड़ी मूर्ति-जैन तीर्थ अयोध्या में विराजमान सर्वोच्च जैन साध्वी गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी ने बताते हुए कहा कि भगवान ऋषभदेव ने प्रजा को असि (शस्त्रविद्या), मसि (लेखन विद्या), कृषि (खेती), विद्या (शिक्षा), वाणिज्य (व्यापार) और शिल्प (कला) रूपी छः क्रियाएँ सिखाकर सभी को जीवनदान दिया था। यहीं षक्रियाएँ आज तक इस धरती पर प्रजा अपने जीवन यापन के लिए अपना रही है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार भगवान ऋषभदेव ने अपने भरत, बाहुबली आदि 101 पुत्रों को विभिन्न 72 कलाएँ सिखाई और इसी क्रम में अपनी सुपुत्री ब्राह्मी को अ, आ, इ, ई आदि अक्षर लिपि तथा दूसरी पुत्री सुन्दरी को 1, 2, 3, 4 आदि अंक लिपि सिखाई। यही आज तक पूरे विश्व में ऋषभदेव की पुत्री ब्राह्मी के नाम पर "ब्राह्मलिपि' के रूप में और अंकलिपि "गणित" के रूप में विश्व विख्यात चली आ रही है। इस प्रकार इस अयोध्या के गर्भ में जैनधर्म के ऐसे अनेकों युगादि इतिहास भरे पड़े हैं जिनके कारण यह अयोध्या तीर्थ भूमि जैन समाज द्वारा युगों से सतत् पूजी जा रही है। इन इतिहासों के क्रम में इक्ष्वाकुवंशीय भगवान श्री रामचन्द्र ने भी इस धरती पर जन्म लेकर इस अयोध्या को महान गौरवशाली बनाया है।
: रघुवंश अभिराम अमृत महोत्सव का हुआ शुभारंभ
Wed, Jan 17, 2024
सवा लाख पार्थिक पूजन के साथ मनाया जाएगा महा महोत्सव
22 जनवरी को देसी गाय के गोबर से बने 11 हजार दीपों से होगा दीपोत्सव: महंत दिलीप दास
अयोध्या। रामनगरी में श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष में रघुवंश अभिराम अमृत महोत्सव एवं श्री राम जन्मभूमि उद्धारक नवरत्न पुरस्कार महोत्सव का भव्य शुभारंभ मंगलवार 17 जनवरी से होगा। महोत्सव बाबा अभिराम दास वेद विद्यालय मां सरयू के तट राजघाट में अखिल भारतीय श्रीपंचनिर्वाणी अनि अखाड़ा हनुमानगढ़ी के अध्यक्ष महंत धर्मदास महाराज के अध्यक्षता एवं रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के संयोजक स्वामी दिलीप दास त्यागी महाराज कर रहे है।जिसमें सवा लाख पार्थिव पूजन के साथ श्री राम कथा का आयोजन होगा और 22 जनवरी को देसी गाय के गोबर से बने 11 हजार दीपों से दीपोत्सव कार्यक्रम होगा।
कार्यक्रम में सवा लाख पार्थिक पूजन के साथ महा महोत्सव मनाया जाएगा। कार्यक्रम के संयोजक स्वामी दिलीप दास महाराज ने बताया कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद प्रभु श्री राम लाल नव्य भवन में विराजमान हो रहे हैं उन्हीं के उपलक्ष में सवा लाख पार्थिव पूजन एवं श्री रामकथा का भव्य आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि फैसला आने के पहले 2018 में मंदिर निर्माण के लिए सवा करोड़ पार्थिव पूजन किया गया था। अब जब रामलला अपने जन्म स्थान पर विराजमान हो रहे हैं यह आयोजन पुनः किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 17 से 22 जनवरी तक प्रतिदिन 11 हजार पार्थिव पूजन होगा। और 22 को 11 हजार दीप जला करके दीपोत्सव मनायेंगे।