: मल्य विद्या के नये पौधों को सीच रहें मामा दास
Sat, Aug 10, 2024
हनुमानगढ़ी के पहलवानों का दबदबा वैश्विक पटल पर स्थापित है: मामा दासहनुमानगढ़ी के इस अखाड़ा पर नन्हे पहलवान के साथ साथ बड़े पहलवान भी सीख रहे हैं एक से बढ़कर एक दांवहनुमानगढ़ी के पहलवानों ने पूरे विश्व पर छोड़ी है अमिट छाप, इमली बगिया के अखाड़े पर जोर आजमाइश करते है दर्जनों पहलवानअयोध्या। रामनगरी भजनानंदी संतो की सराय के साथ साथ मल्य विद्या कुश्ती के पहलवानों के लिए भी जानी पहचानी जाती है। नगरी की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी मल्य विद्या का भी गढ़ है। जहां के पहलवानों ने पूरे देश ही नही बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहलवानी का दबदबा स्थापित किया है। हनुमानगढ़ी के बड़े अखाड़े पर जोर अजमाइश करने वाले पहलवान वैश्विक पटल पर अपने नाम का झंडा फहराया है,तो आज कल इमली बगिया में इन दिनों पहलवान जोर आजमाइश कर रहें है। उसी अखाड़े पर पहलवानी के दांव पेंच सीख रहें है। पहलवानों का कहना है कि मामा दास का कुश्ती प्रेम बड़ा ही अनूठा है। पहलवानों के लिए दूध, बादाम व धी अधिक से अधिक मात्रा में खाने को मिलता है जिससे कुश्ती लड़ने में सहायक हो रहा है। क्योंकि मामा दास जी खुद के पहलवान है इसलिए पहलवानों का दर्द भी समझते हैं। पहलवान गरीब होते है इसलिए सही से खुराक नही मिल पाता है लेकिन इमली बगिया में पहलवानों को अच्छा खुराक मिलता है। आज नये पहलवानों की पहली पसंद इमली बगिया बनती जा रही है।कुश्ती की प्रतिभा में निखार लाने के लिए मजबूत इरादा और बहादुरी की जरूरत होती है। आज अगर हम कुश्ती सीख रहे पट्ठों पर जमकर मेहनत करें और वो भी मन लगा कर पहलवानी सीख लें तो निश्चित तौर पर जिला ही नहीं प्रदेश व देश में अपना व मां बाप का नाम जरूर रोशन कर सकेंगे। ये कहना है राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हनुमानगढ़ी के गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी के शिष्य समाजसेवी मामा दास जी का। मामा दास अपने आसान इमली बगिया में एक अखाड़ा खोदवाकर पहलवानी की जोर आजमाइश खुद करते है और करवाते है। पहलवानों को अच्छी से अच्छी खुराक मिले इसको लेकर बेहद संजीदा रहते है। बकायदा पांच लोगों की एक टीम रखें है जो बादाम, धी व दूध हर पहलवानों से मिलता रहें इमली बगिया में पहलवानों के खाने पीने की कोई कमी न रहें इस बात का विशेष ध्यान देते है। पहलवानी के लिए तैयार हो रहे पट्ठों की हौसला भी बढाते है। बता दें कि अयोध्या हनुमान गढ़ी पर स्थित इस अखाड़े ने देश को बड़े बड़े पहलवान दिए हैं, जिनकी पहलवानी का डंका आज भी बजता है।
: श्री हनुमान किला मंदिर में स्थापित हुए बर्फानीश्वर महादेव
Sun, Jul 28, 2024
शांति स्थापित करने के लिए कायाकल्पी बर्फानी दादा के स्मरण में कराया गया है बर्फानीश्वर महादेव को: महंत परशुराम दास
वैदिक विद्वानों व संतों का अभिनन्दन किया समाजसेवी अमर सिंह ने सपत्नीक
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या के बाईपास स्थित श्री संकटमोचन हनुमान किला मंदिर में मंदिर के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में श्रावण मास की पवित्र महीने में जन कल्याण और विश्वकल्याण के लिए बर्फानीश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा मुख्य यजमान समाजसेवी अमर सिंह ने सपत्नीक की। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 5 दिन पूर्व वैदिक विद्वान आचार्य कुलदीप तिवारी द्वारा कराया गया।
महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि वर्तमान समय में पूरे विश्व मे अशांति व्याप्त है। शांति स्थापित करने के लिए कायाकल्पी बर्फानी दादा के स्मरण में कराया गया है। बर्फानी दादा हमेशा विश्वशांति और जीव कल्याण की बात करते थे। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा करके ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे भगवान भोलेनाथ स्वयं प्रभु श्री राम का दर्शन कर रहें हो, क्योंकि पांच सौ वर्षों के प्रतिरक्षा के बाद प्रभु श्री राम लाल अपने जन्म स्थान पर विराजमान और भगवान श्री राम के अन्नय भक्त हनुमान जी के स्थान संकट मोचन हनुमान किला में भगवान शिव भी विराजमान हो गए हैं।
समाजसेवी अमर सिंह ने बताया कि हनुमान जी ऐसे देवता जिनकी आराधना से सभी का कल्याण होता है सर्व भवंति सुखना सर्वे संतु निरामया के उद्देश्य से शिवजी की स्थापना महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में संकटमोचन हनुमान किला में उन्हीं की कृपा से किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुजारी महंत रामचरण दास खाक चौक,महंत विजय राम दास, महंत दामोदर दास, शिक्षक संघ के नेता चंद्रशेखर सिंह, उमेश सिंह, प्रमोद कुमार सोनी उर्फ मोदी, ज्ञानप्रकाश शर्मा सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर संतो महंत एवं भक्तों का बृहद भंडारा भी किया गया।
: श्री राम के जीवन चरित्र से समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सकते है: संध्या
Sun, Jul 28, 2024
हनुमान बाग मंदिर का छाया रामकथा का उल्लास, संत साधक लगा रहें गोता, जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों से पटा हनुमान बाग
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जलाना पूना से पधारी प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी कर रही है।कथा के चतुर्थ दिवस में संध्या जी ने सभी भक्तों को राम कथा का रसपान बड़े ही मार्मिक एवं विस्तार से प्रसंग एवं संजीव झांकियो द्वारा करवा रही। उन्होंने बताया कि भगवान की सहज अवस्था बाल लीला के रूप में पूरे विश्व को एक नया दिग्दर्शन देता है जब भक्ति के पराभूत परमात्मा होता है तब वह बालक बन करके आता है।उन्होंने कहा कि भगवान ज्ञानी राजा के बुलाने पर भोजन करने नहीं आते पर जब कोई भक्त परमात्मा को पुकारता है तो भगवान नाचते हुए भक्तों के पास चले आते हैं। ब्रह्मम परमात्मा और भगवान तीनों एक ही तत्व है।निर्गुण वादी जिन्हें ब्रह्म कहते है विद्वान पंडित इन्हें परमात्मा कहते हैं और भक्त उन्हें भगवान कहते है। यह तीनों बातें ऐसे ही है जैसे बादल जल और बर्फ। संध्या जी ने भगवान श्री राम के बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया और कथा सुनाते हुए कहा कि एक ही तत्व के रूप में तीन अलग-अलग स्थानों पर अनुभव में आता है कि भगवान भक्ति के आधीन हो नरोत्तम लीला के लिए शरीर धारण करते है। भगवान अपने लीला के माध्यम से प्रत्येक लीला को अनुकरणीय रूप में प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा बाल्यकाल से मनुष्य का जीवन वैसा होना चाहिए जैसे भगवान श्री राम हमें सिखाते है। भगवान श्रीराम ने अपने श्रेष्ठ जनों के प्रति वंदन का भाव रखते है। प्रातःकाल उठिए कै रघुनाथा मात पिता गुरु नावई माथा। वर्तमान समय में हमें अपने बच्चों को अपने आराध्य श्री राम की जीवन चरित्र को पढ़ाना चाहिए जिससे वह हमारी संस्कृति और धर्म को अनुकरण में ला सकें और समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सके। माता पिता भाई बंधु गुरु और देश काल परिस्थितियों से प्रेम कर सकें। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया व जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों ने किया। यह महोत्सव हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा।महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें।इस मौके पर मामा दास, लवकुश दास, महंत हरिभजन दास, पुजारी योगेंद्र दास, नितेश शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।