Friday 21st of August 2026

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गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

जानकी घाट  स्थित चारुशिला मंदिर में संतों ने की बैठक, अध्यक्षता चारुशिला मंदिर पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी का पंचामृत से अभिषेक; दक्षिण भारतीय वाद्य और मशालों ने मोहा मन

स्वतंत्रता दिवस पर रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण व स्वामी नारायण का विशेष श्रृंगार,दर्शन को उमड़े

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता व संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व व श्रृंगी ऋषि आश्रम

सुचना

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: श्री राम के जीवन चरित्र से समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सकते है: संध्या

बमबम यादव

Sun, Jul 28, 2024

हनुमान बाग मंदिर का छाया रामकथा का उल्लास, संत साधक लगा रहें गोता, जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों से पटा हनुमान बाग

अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जलाना पूना से पधारी प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी कर रही है।कथा के चतुर्थ दिवस में संध्या जी ने सभी भक्तों को राम कथा का रसपान बड़े ही मार्मिक एवं विस्तार से प्रसंग एवं संजीव झांकियो द्वारा करवा रही। उन्होंने बताया कि भगवान की सहज अवस्था बाल लीला के रूप में पूरे विश्व को एक नया दिग्दर्शन देता है जब भक्ति के पराभूत परमात्मा होता है तब वह बालक बन करके आता है।उन्होंने कहा कि भगवान ज्ञानी राजा के बुलाने पर भोजन करने नहीं आते पर जब कोई भक्त परमात्मा को पुकारता है तो भगवान नाचते हुए भक्तों के पास चले आते हैं। ब्रह्मम परमात्मा और भगवान तीनों एक ही तत्व है।निर्गुण वादी जिन्हें ब्रह्म कहते है विद्वान पंडित इन्हें परमात्मा कहते हैं और भक्त उन्हें भगवान कहते है। यह तीनों बातें ऐसे ही है जैसे बादल जल और बर्फ। संध्या जी ने भगवान श्री राम के बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया और कथा सुनाते हुए कहा कि एक ही तत्व के रूप में तीन अलग-अलग स्थानों पर अनुभव में आता है कि भगवान भक्ति के आधीन हो नरोत्तम लीला के लिए शरीर धारण करते है। भगवान अपने लीला के माध्यम से प्रत्येक लीला को अनुकरणीय रूप में प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा बाल्यकाल से मनुष्य का जीवन वैसा होना चाहिए जैसे भगवान श्री राम हमें सिखाते है। भगवान श्रीराम ने अपने श्रेष्ठ जनों के प्रति वंदन का भाव रखते है। प्रातःकाल उठिए कै रघुनाथा मात पिता गुरु नावई माथा। वर्तमान समय में हमें अपने बच्चों को अपने आराध्य श्री राम की जीवन चरित्र को पढ़ाना चाहिए जिससे वह हमारी संस्कृति और धर्म को अनुकरण में ला सकें और समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सके। माता पिता भाई बंधु गुरु और देश काल परिस्थितियों से प्रेम कर सकें। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया व जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों ने किया। यह महोत्सव हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा।महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें।इस मौके पर मामा दास, लवकुश दास, महंत हरिभजन दास, पुजारी योगेंद्र दास, नितेश शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।

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