: पूर्व सांसद विश्वनाथ दास शास्त्री जी को संतों ने किया नमन
Sun, Aug 18, 2024
9वीं पुण्यतिथि बड़ी ही शिद्दत के साथ मनाई गईअयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पूर्व सांसद विश्वनाथ दास शास्त्री की दो दिवसीय 9वीं पुण्यतिथि महोत्सव श्री रामानंद आश्रम दर्शन भवन जानकी घाट अयोध्या में गुरुवार को श्री महाराज जी के शिष्य महंत ममता शास्त्री के सानिध्य और संयोजन में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अयोध्या के संतो महंतों ने श्री महाराज जी के प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व पर शब्द रूपी भावांजलि भी अर्पित की। शास्त्री जी की पुण्यतिथि महोत्सव बुधवार को नर्मदेश्वर महादेव के अभिषेक से प्रारंभ हुआ और दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल भंडारे के साथ समाप्त हुई। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को फूल बंगले की झांकी से सजाया गया।
महंत डा ममता शास्त्री जी ने बताया कि श्री महाराज जी राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े थे और मंदिर आंदोलन की गतिविधियां और तैयारियां इसी आश्रम में की जाती थी। यह आश्रम जगतगुरु रामानंद भगवान से जुड़ा हुआ है अपनी यात्रा के दौरान वह अयोध्या के इसी स्थान में रुके हुए थे। उन्होंने बताया कि श्री महाराज जी को उनके व्यक्तित्व और सेवा भाव के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पुण्यतिथि महोत्सव में जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण महाराज ने भी श्री महाराज जी को पुष्पांजलि अर्पित की और कहा कि वह संत थे और हमेशा सभी को सेवा के लिए प्रेरित करते रहते थे। इस अवसर पर अयोध्या के सैकड़ों संतों महंतों ने श्री महाराज जी को पुष्पांजलि अर्पित की और आए हुए अतिथियों का स्वागत एडवोकेट अशोक मिश्र और विजय उर्फ चुलबुल जी ने की।
: हनुमानगढ़ी से निकली तिरंगा यात्रा, नागा साधुओं ने लगायें भारत माता के गगनभेदी नारे
Thu, Aug 15, 2024
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास के संयोजन में निकली ऐतिहासिक तिरंगा यात्रानागाओं के साथ रामनगरी के साधु संत व्यापारी व आमजन भी शामिल हुए यात्रा मेंअयोध्या। आजादी का जश्न मानने निकले हनुमानगढ़ी के सौकड़ो नागा साधुओं के साथ रामनगरी के विशिष्ट संत, व्यापारी व आमजन हाथों तिरंगा झंडा लेकर भारत माता के जय की गगनभेदी नारों के साथ दिलों में देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत होकर हनुमानगढ़ी के निकास द्बार से तिरंगा यात्रा में निकले। इस ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा का नेतृत्व संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज कर रहें थे। यात्रा का संयोजन हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज ने किया था। यह यात्रा ओम प्रकाश बैरियर के रास्ते दंत धावन कुंड तिराहा होते हुए सेन्ट्रल बैक तिराहे के रास्ते पुनः हनुमानगढ़ी अयोध्या आयी।
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने कहा कि आज हम यहाँ हमारे महान देश भारत की स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। सबसे पहले, मैं उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूँ, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें आजादी दिलाई। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और उल्लास का दिन है। यह वह दिन है जब हमारे देश ने अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्रता प्राप्त की। यह दिन हमें उन संघर्षों और बलिदानों की याद दिलाता है जो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और अन्य अनेकों स्वतंत्रता सेनानियों ने किए।
हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी महाराज ने कहा कि आजादी... तीन शब्दों से मिलकर बना है। इसी आजादी को पाने के लिए भारत ने 200 साल तक अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। भारत की स्वतंत्रता की यात्रा अपार बलिदान, साहस और एकता से भरी हुई है। 1857 के विद्रोह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमारी स्वतंत्रता के लिए कई चुनौतियों का सामना किया।वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने हमें न केवल एक स्वतंत्र राष्ट्र का उपहार दिया, बल्कि हमें एकता, विविधता, और सहिष्णुता की विरासत भी सौंपी। आज, हमें यह सोचना चाहिए कि हम किस प्रकार अपने देश को और भी अधिक सशक्त बना सकते हैं। हमें अपने पूर्वजों के सपनों को साकार करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम शिक्षा, स्वच्छता, और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देंगे। हम सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश के हर नागरिक को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हो। हम सभी को मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जहां गरीबी, अशिक्षा, और भेदभाव का कोई स्थान न हो।
रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि आइए, हम सब मिलकर यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने देश की प्रगति में अपना योगदान देंगे और इसे दुनिया में एक महान राष्ट्र बनाएंगे। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अववेश दास महाराज ने कहा कि मैं आप सभी को एक बार फिर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आइए, हम गर्व से कहें - "जय हिंद! जय भारत!" इस यात्रा में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास जी महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण जी महाराज, बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अववेश दास जी महाराज, हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी महाराज, निर्वाणी अनी के सचिव सत्यदेव दास जी महाराज, महंत हरिभजन दास जी श्रृंगार कुंज, महंत छविराम दास लम्बे हनुमान, महंत मनीष दास जी पत्थर मंदिर, महंत राजेश जी पहलवान, पुजारी रमेश दास जी, मुकेश दास जी, जयमंगल दास जी, मनीराम दास जी, देवेश दास जी, रिंकु दास जी, परमानंद दास जी, अभिषेक दास जी, विराट दास जी, रामानन्द दास जी, प्रेमूर्ति कृष्णकांत दास जी, महंत संजय दास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में नागा साधु संत मौजूद रहें।
: विनेश की सहानुभूति से बड़ी है शिवानी के दर्द की दास्तां
Thu, Aug 15, 2024
50 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन शिवानी नहीं जा सकी थीं ओलिंपिकइसी वजन वर्ग में ओलिंपिक गई विनेश अधिक वजन के कारण अयोग्य घोषित हुईइंदौर। ओलिंपिक में वजन 100 ग्राम अधिक होने से अयोग्य करार दी गई पहलवान विनेश फोगाट के दर्द के बीच हमें मध्य प्रदेश की उस महिला पहलवान शिवानी के दर्द को भी याद करना चाहिए, जो ओलिंपिक न जा पाईं। जिस 50 किग्रा वजन वर्ग में विनेश ओलिंपिक पहुंची, उसी वर्ग में शिवानी जा सकती थी। किंतु नियति का खेल कहें या शिवानी का दुर्भाग्य, वह गुमनाम रह गईं।यह कहानी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र छिंदवाड़ा के गांव उमरेठ की बेटी शिवानी की है। अपने गांव की ही तरह यहां जन्मी शिवानी पंवार भी गुमनाम ही हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि यह लड़की राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन है। प्रदर्शन ऐसा कि बीते तीन साल से देश की कोई महिला पहलवान शिवानी से खिताब छीन न सकी है। एशियन चैंपियनशिप में इसी शिवानी ने तीन बार की विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता पहलवान को पटखनी दी थी और भारत के लिए पदक जीत लाई थी। ऐसे धमाकेदार प्रदर्शन के बावजूद यह लड़की ओलिंपिक न जा सकी, क्योंकि जिस 50 किग्रा वर्ग में इसने यह कमाल दिखाया, इसी वजन वर्ग में ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व इनके बजाय विनेश फोगाट को मिला। विनेश 100 ग्राम वजन अधिक होने से अयोग्य घोषित की गई हैं।शिवानी पंवार तीन साल से ओलिंपिक की तैयारी में जुटी थीं, लेकिन जमाम रुकावटों ने मौका मिलने न दिया। अन्याय के खिलाफ भारतीय कुश्ती संघ और ओलिंपिक संघ से लेकर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ तक संघर्ष किया, किंतु विपक्षी पहलवानों को पटखनी देने वाली बेटी व्यवस्था से मात खा गई। शिवानी इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्चेक में हुई एशियाई महिला कुश्ती चैंपियनशिप में भी 50 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कई दिग्गज पहलवानों को हराकर कांस्य पदक जीता था। शिवानी बताती हैं, मै किसी पहलवान के खिलाफ नहीं, लेकिन स्थियों का पालन होना चाहिए। इसी साल पटियाला में ओलिंपिक क्वालिफिकेशन के लिए आइओए ने ट्रायल्स कराए थे। अंतरराष्ट्रीय कुस्ती संघ का नियम है कि पहलवान किसी एक वजन वर्ग में खेल सकता है, लेकिन वहां विनेश के पक्ष में नियमों को दरकिनार कर दिया गया। विनेश को दो वजन वर्गों में खिलाया गया। वह 50 किग्रा वर्ग में भी खेली और 53 किग्रा वर्ग में भी। उनके लिए 50 किग्रा वर्ग के मुकाबले करीब चार घंटे रोक दिए गए। जब मैंने इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसे ही चला तो मैं कुश्ती नहीं लड़ेंगी, तब जाकर मुकाबले कराए गए। इसके बाद भी मेरे साथ न्याय नहीं हुआ। में मुकाबले में करीब पांच अंक के अंतर से आगे थी, लेकिन अचानक से मेरे खिलाफ अंक दिए गए और अंत में विनेश को विजेता घोषित कर दिया गया। मैंने इसके खिलाफ भारतीय कुश्ती संघ और भारतीय ओलिंपिक संघ को भी शिकायत दर्ज कराई थी। आइओए ने स्वीकारा कि दो वर्गों में लड़ने का नियम नहीं है, लेकिन अब हमने यह मामला कुश्ती संघ को सौंप दिया है। इसके बाद मैंने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ में भी शिकायत की थी, लेकिन उनका कहना था कि यह आपका आंतरिक मामला है और राष्ट्रीय कुश्ती संघ से चुर्चा करें। मगर कहां से कोई जवाब नहीं मिला।