: रामजन्मोत्सव पर सजा सिद्ध पीठ श्यामा सदन मंदिर
Sat, Apr 13, 2024
जन कल्याणार्थ श्री राम महायज्ञ महोत्सव का 41 वां वर्ष, श्यामा सदन में उत्सव का उल्लास
पूर्वाचार्यों की त्याग,तपस्या से अवलोकित है मंदिर परिसर
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्यामा सदन मंदिर जो त्याग, तपस्या साधना का केंद्र भी है। मंदिर में सभी उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। लगातार 41वर्षों से मंदिर में श्रीराम महायज्ञ महोत्सव का दिव्य आयोजन जन कल्याणार्थ चैत्रराम नवमी पर होता आ रहा है। अपनी परम्पराओं का निर्वहन करते हुए श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज इस बार चैत्रराम नवमी पर 41वां जन कल्याणार्थ श्री राम महायज्ञ महोत्सव बड़े ही हावभाव से मना रहें है। जो जिसमें जन कल्याणार्थ आहुतियां डाली जा रही है। श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज ने बताया कि पूज्य परमहंस श्री रामकिंकर दास जी महाराज के कृपापात्र श्री लालसखे जी महाराज के कृपापात्र पूज्य गुरुदेव भगवान श्री संत गोपाल दास जी महाराज के आशीर्वाद से यह उत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन श्रीमद् वाल्मीकि नवाह परायण पाठ हो रहा है। मुख्य उत्सव 17 अप्रैल बुधवार को श्रीराम नवमी पर भगवान का जन्म महोत्सव मनाया जाएगा। यह उत्सव श्री श्यामा सदन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट रामघाट के तत्वावधान में हो रहा है।
: रामजन्मोत्सव पर बज रही बधाईयां, रामकथाओं से नगरी गुंजायमान
Sat, Apr 13, 2024
अयोध्या में राम नवमी मेला अपने चरम पर, बुधवार को भगवान को होगा प्राकट्य उत्सव
चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल,मणिराम दास छावनी, हिंदू धाम, रामकृष्ण मंदिर में बह रही रामकथा की रसधार
अयोध्या। रामनगरी में चारों तरह नवाह परायण पाठ, बधाईयां की मंगल ध्वनियां चहुंओर बज रही है। मठ मंदिरों में भगवान के प्राकट्य उत्सव को लेकर तैयारियां जोरो पर है। पूरे नगर को सजाया गया है। हर तरह खुशियां ही खुशियां फैली हुई है। चारों तरह रामकथा व भागवत कथा में संत साधक गोता लगा रहें है। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में रामजन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। जिसमें व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा डा रामानन्द दास जी कर रहे है।इस पूरे आयोजन का दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे है।
हिंदू धाम मंदिर में व्यासपीठ से वाल्मीकि रामायण कथा की मीमांसा ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी कर रहे है। वेदांती जी ने भरत चरित्र का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत के व्यक्तित्व का दर्शन हमें ‘राम वन गमन’ के पश्चात् ही होता है। उसके पहले उनका चरित्र-मूक समर्पण का अद्भुत दृष्टान्ट है जिसे देख कर कुछ भी निर्णय कर पाना साधारण दर्शक के लिए कठिन ही था। इसी सत्य को दृष्टिगत रखकर गोस्वामी जी ने ‘राम वन-गमन’ के मुख्य कारण के रूप में भरत प्रेम-प्राकट्य को स्वीकार किया। जैसे देवताओं ने समुद्र मंथन के द्वारा अमृत प्रकट किया था ठीक उसी प्रकार राम ने भी भरत-समुद्र का मंथम करने के लिए चौदह वर्षों के विरह का मन्दराचल प्रयुक्त किया। और उससे प्रकट हुआ-राम प्रेम का दिव्य अमृत।
तो वही मणिराम दास छावनी में चैत्र रामनवमी के उपलक्ष में चल रहे 151 विद्वानों द्वारा सस्वर रामायण जी का पारायण पाठ हो रहा है। तो देर शाम प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। राधेश्याम शास्त्री जी महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा शरणागत रक्षक हैं प्रभु। मानस में निहित भगवान श्री राम का चरित ,भक्ति भावना ,धर्म निरूपण ,दर्शन ,जीवन दर्शन तथा नीति आदि के हर पृष्ठ पर ऐसे सुंदर पुष्प विद्यमान हैं जिनसे निरंतर लोकमंगल की मनोहारी सुगंध निकलती रहती है।उन्होंने कहा कि जय और विजय जब रावण और कुम्भकर्ण के रूप में जन्म लेते हैं, तब उसके मूल में अहंकार की प्रधानता है। पर जब प्रतापभानु रावण बनता है, तब उसके मूल में लोभ की मुख्यता है। इसके सांकेतिक तात्पर्य यह है कि गोस्वामीजी मानो व्यक्ति को सावधान कर देना चाहते हैं कि वह यह सोचकर निश्चिन्त न हो जाय कि रावण एक बुरा व्यक्ति था, बल्कि यह जान ले कि रावणत्व किन परिस्थितियों में जन्म लेता है और यदि उसी प्रकार की मनःस्थिति और परिस्थिति हमारे जीवन में आती है, तो हम भी रावण बन सकते हैं। इसी प्रकार रुद्रगणों की गाथा के माध्यम से यह बतलाया गया है कि परदोष-दर्शन से भी रावणत्व का जन्म होता है तथा वृन्दा की गाथा यह प्रदर्शित करती है कि जब व्यक्ति धर्म से प्राप्त शक्ति को अधर्म के संरक्षण में लगाता है, तो उससे भी रावणत्व पैदा होता है।
रामकृष्ण मंदिर में प्रख्यात कथावाचिका मंदिर की महंत शीतल दीदी रामायणी जी अपने श्रीमुख से राम कथा की अमृत वर्षा कर रही है। कथाव्यास शीतल जी ने कहा कि जीवन जीना सीखना है तो श्री रामायण से सीखो और मरना सीखना है तो भागवत गीता से सीखो।त्रिवेणी संगम में गंगा, जमुना, सरस्वती का मिलन होता है। मिलन में गंगा जमुना तो दिखाई देती हैं लेकिन सरस्वती को कोई नहीं देख पाता, सरस्वती को देखने के लिए कई बार प्रयास करने पड़ते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती। इस महोत्सव का संयोजन महामंडलेश्वर गणेशानंद जी महाराज कर रहे है।
: भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का आगम पद्धति से हुआ पूजन अर्चन व महाअभिषेक
Sat, Apr 13, 2024
500 वर्षों बाद प्रभु श्री राम लला अपने निज मंदिर में विराजमान हो गए हैं यह बड़ा ही सौभाग्य है: रामानुजाचार्य
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्री अशर्फी भवन में चैत्र रामनवमी के अवसर में विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हैं। श्री रामचरितमानस पारायण पुरुष सूक्त श्री सूक्त पाठ भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का आगम पद्धति से पूजन अर्चन नित्य किया जा रहा है। आज अशर्फी भवन के आराध्य भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के वार्षिक उत्सव के उपलक्ष में भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का महा अभिषेक हुआ। जिसमें 111 कलश द्वारा सरयू जल गौ दूध दही घी मधु केसर सर्व औषधि जल एवं फलों के जूस से वैदिक सूक्क्त पाठ से किया गया। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य महाराज श्री ने भगवान के अर्चा विग्रह का महत्व बताते हुए कहा हम सभी जीव प्रभु के अंश हैं एवं प्रभु ही हमारे अंशी हैं जीवन में बिना प्रभु भक्ति कुछ भी संभव नहीं है। अतः हमें निरंतर प्रभु के स्मरण चिंतन भजन में लगे रहना चाहिए। महाराज श्री ने कहा आज 500 वर्षों बाद प्रभु श्री राम लला अपने निज मंदिर में विराजमान हो गए हैं यह बड़ा ही सौभाग्य है। इस रामनवमी में हम प्रभु श्री राम का दर्शन उनके निज मंदिर में करेंगे। सभी मनुष्यों को मानवता की शिक्षा देने के लिए प्रभु मनुष्य रूप में सप्त पूरियो में प्रतिष्ठित श्री अवधपुरी में पधारते हैं। भगवान श्री राम के जीवन चरित्रों में से एक चरित्र भी हम अपने अंदर उतार लें तो निश्चित ही हमारे मानव जीवन में कली का प्रभाव व्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रभु के सभी जीवन चरित्र प्रेरणास्पद हैं श्री अवधपुरी में एक क्षण निवास कर लेने से करोड़ों जन्मों के हमारे पाप नष्ट होते हैं और पुण्य उदित हो जाते हैं। भगवान का पुष्पों से दिव्य श्रृंगार किया गया मध्यान में वृहद भंडारे का आयोजन हुआ। सभी भक्तजन भगवान का अभिषेक दर्शन एवं प्रसादी पाकर आनन्दित हों गए।