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: अयोध्या का कण-कण राम की शक्ति-भक्ति से ओत-प्राेत: असंग देव

बमबम यादव

Sat, Nov 5, 2022

श्रीरामवल्लभाकुंज में साप्ताहिक सुखद सत्संग कथा का हुआ भव्य शुभारंभ

अयाेध्या। अयाेध्याधाम जिसकाे तीर्थ के रूप में पहचाना जाता है। यहां पवित्र पावनी दिव्य सरयू सलिला प्रवाहित हैं। अयोध्या का कण-कण राम की शक्ति-भक्ति से ओत-प्राेत है। ऐसी दिव्य धरा पर मुझे प्रथम बार सुखद सत्संग कथा कहने का साैभाग्य प्राप्त हुआ है। उक्त सारगर्भित उद्गार राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने व्यक्त किए। वे शनिवार को प्रतिष्ठित पीठ श्रीरामवल्लभाकुंज जानकीघाट प्रांगण में भक्तगणाें काे व्यास गादी से साप्ताहिक सुखद सत्संग कथा का प्रथम दिवस रसास्वादन करा रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तीर्थ नगरी में श्रीराम की पवित्र जन्मभूमि पर  कथा हाेती है। ताे कथा सुनने वाले का जीवन धन्य हाे जाता है। स्थान का बड़ा ही महत्व होता है। यदि पवित्र तीर्थ स्थली में कथा सुनने का अवसर मिल जाए। ताे यह विशेष महत्व की बात है। धर्म नीति और राजनीति जब कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। ताे भक्ति का फूल खिलता है। इससे सभी के जीवन में सुख-समृद्धि व शांति आती है। संत असंग देव ने कहा कि मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक बहुत से चीजाें का रस लेता है। रस लेते-लेते उसकी पूरी जिंदगी नीरस हाे जाती है। रामरस ताे काेई साैभाग्यशाली ही ग्रहण करता है। रामरस के प्रति रूचि पुण्य आत्माओं काे ही हाेती है। कथा, भागवत और सत्संग हाेता है। ताे हमें नींद आने लगती है। हम रामरस से चूक जाते हैं। जब काेई राम चर्चा, ज्ञान व भक्ति चर्चा हाेती है। उससे हम सब ऊबने लगते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी श्राेता हैं। जाे राम व भक्ति के रसिक हैं। वे सत्संग सुनने बैठते हैं । ताे सब कुछ भूल जाते हैं और उनका मन रामरस में डूब जाता है। जाे रामरस में डूब जाता है। वह माया के रस में डूबने से बच जाता है। 

इससे पहले मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास व श्रीरामवल्लभाकुंज महंत रामशंकर दास वेदांती महाराज ने दीप प्रज्वलन कर सुखद सत्संग कथा का शुभारंभ किया। उसके बाद लगभग तीन दर्जन वेदपाठी छात्रों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब ने पधारे हुए मुख्य  अतिथि-विशिष्टजनाें एवं संताें का माल्यार्पण कर अंगवस्त्र ओढ़ा स्वागत-सम्मान किया। इस अवसर पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, महापाैर ऋषिकेश उपाध्याय, मंगलभवन पीठाधीश्वर रामभूषण दास कृपालु, वैदेही भवन महंत रामजी शरण, कबीर मठ जियनपुर के महंत उमाशंकर दास, महंत देवेंद्र दास, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अवधेश पांडेय बादल, परमानंद मिश्रा, रामस्वरूप पाठक आदि माैजूद रहे। उत्तर प्रदेश, राजस्थान,  मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार,  समेत अन्य प्रांताें से आए काफी संख्या में भक्तगण अमृतमयी सुखद सत्संग कथा का रसपान कर रहे थे।

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