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: गौ वंश के अपमान से अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसी विभीषिका को लोग तैयार रहें: राजेंद्रदेवाचार्य

बमबम यादव

Sat, Oct 8, 2022

श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट चारूशिला मंदिर में चल रहे 108 कुंडीय श्रीराममंत्र महायज्ञ का उल्लास चरम पर

अद्वितीय महायज्ञ में वैदिक आचार्यों द्धारा 501 यजमान हवन कुंड में डाल रहें राममंत्र की आहुतियां

अयोध्या। श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट चारूशिला मंदिर, जानकीघाट में चल रहे 108 कुंडीय दस दिवसीय श्रीराममंत्र महायज्ञ व श्रीराम कथा महोत्सव में व्यासपीठ से वृंदावन धाम के श्रीमद् जगद्गुरू द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर डॉ. राजेंद्रदेवाचार्य के मुखारविंद से हो रही है। कथा के तृतीय दिवस मलूकपीठाधीश्वर ने कहा कि गौ वंश के अपमान के कारण अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसी विभीषिका को लोग तैयार रहें। प्रकृति दंड देती है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का सम्पूर्ण जीवन ही उपदेश होता है। वे वाणी से नहीं अपने आचरण से संदेश, उपदेश देते हैं। महाराज ने शनिवार को सनकादि ऋषियों का जीवन चरित्र बताया।

डॉ. राजेंद्रदेवाचार्य ने कहा कि भगवान की कथा सुनने से पक्षी भी मौन हो जाते हैं। जिस तरह भवरें को गुंजन लोगों को भाता है, उसी तरह कथा लोगों के लिए भाती है। हर किसी को इसका श्रवण करना चाहिए। उन्हाेंने तुलसी की महत्वता बताते हुए कहा कि भगवान को तुलसी अच्छी लगती थी। तुलसी का तप सबसे अधिक है। तुलसी ठाकुर जी की पसंद भी है। इसका कारण यह है कि तुलसी की गंध भी किशोरी जी की गंध से मिलती है। 

महाराज ने कहा कि गत रात्रि से हो रही वृष्टि से चिंतित न हो, आप कथा श्रवण करें, क्योंकि कथा व सत्संग ही मानव की अंतरंग तपन को विनष्ट करती है तथा यह वृष्टि बहिरंणतप का हरण करती है। महान भक्त चरित्रों में सनकादिक जी के माध्यम मानव जन्म का लक्ष्य क्या है। पर निवृत्ति मार्ग पर विषद विवेचन में कहा कि वैराग्य होना चाहिए। उपदेश वाणी द्वारा न कहा जाए, उसे निज की चर्या से चरितार्थ होकर लोगों को समझ में आए। जिनका ये महामहोत्सव मनाया जा रहा उन्होंने कहा कि भक्तमाली जी की जीवन चर्या व्यवहारिक रूप में देखने को मिलती थी, जो अनुगतों को उपदेश की सम्वाहक होती थी, संत और भक्त की महिमा अतुलनीय बताते हैं कि भक्त एवं संत ही भगवान के अस्तित्व का बोध कराते हैं। गौमाता में भगवान के स्वरूप का हम दर्शन करें। निरंतर हो रही प्राकृतिक आपदा, विपलव, अनावृष्टि, अतिवृष्टि तथा अन्यान्य मानव विरोधी घटनाएं केवल गौवंश के अपमान के कारण ही घटित हो रही हैं। कथा में कार्यक्रम के संयोजक श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ चारूशिला मंदिर के श्रीमज्जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज, डा रामानन्द दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत रामजीशरण सहित हजारों की संख्या में संत साधक मौजूद रहें। तो वही इस अद्वितीय महायज्ञ में वैदिक आचार्यों द्धारा 501 यजमानों हवन कुंड में राममंत्र की आहुतियां डाल रहें है। कार्यक्रम में देर शाम वृंदावन की प्रसिद्ध चैतन्य महाप्रभु लीला का मंचन हुआ।

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