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: सेवा और भक्ति के प्रति गुरुदेव का समर्पण अपूर्व था: महंत मयंक राम दास

बमबम यादव

Sat, Oct 26, 2024
सेवा और भक्ति के प्रति गुरुदेव का समर्पण अपूर्व था: महंत मयंक राम दास
  • संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार महंत मयंक रामदास को कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता दी
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या की प्रमुख पीठ विजयराम भक्तमाल आश्रम के संस्थापक महंत विजयरामदास तो उन आराध्य के चरणों में विलीन हो गए, जिनके वह अनन्य उपासक थे और अपने पीछे छोड़ गए सेवा एवं भक्ति की समृद्ध परंपरा। यह परंपरा उनके जीते जी लाखों शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को प्रेरित करती ही रही और उनके साकेतवास के बाद भी प्रेरित करती रहेगी। शुक्रवार को एक महंताई समाराेह के दरम्यान अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार महंत मयंक रामदास  को कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता दी। साथ ही साथ महज्जरनामा पर हस्ताक्षर भी किया। विजयराम भक्तमाल आश्रम के संस्थापक महंत विजयरामदास महाराज का कुछ दिनाें पहले साकेतवास हाे गया था। जिस पर मयंक रामदास चेला स्व. महंत विजयरामदास की ताजपाेशी की गई। विजयरामदास जी ने अपने जीवनकाल में ही पंजीकृत वसीयत द्वारा सुयाेग्य शिष्य मयंक राम दास काे अपना उत्तराधिकारी नामित कर दिया था। शुक्रवार को विजयरामदास जी का तेरहवीं भंडारा भी रहा। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में महंताई समाराेह का आयोजन हुआ, जिसमें संताें व सद् गृहस्थाें ने मयंक राम दास काे विजयराम भक्तमाल आश्रम का महंत एवं सर्वराहकार घाोषित किया। महंत मयंकरामदास कहते हैं कि वैसे तो इस दास का संपूर्ण जीवन पूज्य गुरुदेव की कृपा का प्रसाद है, किंतु सेवा और भक्ति के प्रति उनका समर्पण अपूर्व था। उनकी यह प्रतिबद्धता सामने वाले को बरबस प्रेरित-प्रोत्साहित करती थी। उनका स्वास्थ्य कैसा भी हो, व्यस्तता कितनी भी अधिक हो, वह नितनेम के पक्के थे। इस वर्ष वह 72 साल के हो गए थे और बीमार भी रहने लगे थे, किंतु जब भी अयोध्या में रहते, तो सरयू स्नान का क्रम नहीं छोड़ते थे।
महंत मयंक रामदास ने कहा कि अपने समस्त दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन करते आ रहें है और आगे भी रहते रहेंगे। साथ ही मंदिर की सम्पूर्ण सम्पत्तियाें काे अक्षुण्ण बनाए रखने का आजीवन सतत प्रयत्न करते रहेंगे। अंत में मयंक रामदास जी व बड़ा भक्त माल के महंत अवधेश दास ने आए हुए संताें का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत-सत्कार किया। समाराेह में मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास,जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लभाचार्य जी महाराज,अधिकारी राजकुमार दास, जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, नागा रामलखन दास, महंत डा भरत दास, महंत जगदीश दास, महंत करुणानिधान शरण, श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के शिष्य संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास  सरपंच रामकुमार दास, महंत बलराम दास, महंत परशुराम दास, महंत विनोद दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, महंत आनंद दास, डाड़िया महंत गिरीश दास, महंत अर्जुन दास,  शरद जी, राजगोपाल मंदिर के सर्वेश्वर दास,महंत उद्धव शरण सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।

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