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: जीवन में सत्संग करना है तो संत के पास जाएं : गणेश दास

बमबम यादव

Wed, Sep 13, 2023

काठिया मंदिर में हो रही रामकथा की अमृत वर्षा, व्यासपीठ से श्री अवधबिहारी कुंज पीठाधीश्वर श्रीमहंत गणेश दास महाराज कह रहें रामकथा

अयोध्या। रामनगरी की प्रतिष्ठित पीठ काठिया मंदिर, वासुदेवघाट में चल रही अमृतमयी श्रीरामकथा का भक्तगणों को रसास्वादन कराते हुए ख्यातिलब्ध कथाव्यास व श्री अवधबिहारी कुंज पीठाधीश्वर श्रीमहंत गणेश दास महाराज ने कहा कि जीवन में सत्संग करना है तो संत के पास जाएं। परमात्मा बड़े ही दयालु हैं। भगवान की कृपा से ही सत्संग मिलता है। अगर भगवान की कृपा न हो, तो संत की भी कृपा नही हो सकती है। संत भगवान के आभूषण और स्वरूप हैं। संतों की वाणी अमृत के समान है। इनके पास परमात्मा स्वयं दौड़े चले आते हैं। संत के बिना भगवान की शोभा नही है। भगवान कहते हैं कि संत मेरे हृदय में निवास करते हैं और मैं उनके हृदय में सत्संग के बिना विवेक नहीं होता व राम जी की कृपा के बिना वह सत्संग नहीं मिलता है। सत्संगति आनंद एवं कल्याण की जड़ है। दुष्ट भी सत्संगति पाकर सुधर जाते हैं। जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सुंदर सोना बन जाता है। जा पर कृपा राम की होई । ता पर कृपा करहिं सब कोई ॥ कथाव्यास ने कहा कि ब्राह्मणों के चरणों में हमारा पूज्य भाव होना चाहिए। ब्राह्मणों की उत्पत्ति भगवान नारायण के श्रीमुख से उत्पत्ति भगवान नारायण के श्रीमुख से हुई है। ब्राह्मण की तृप्ति से भगवान भी तृप्त होते हैं। साधु का जीवन पवित्र है। वह अनेक सद्गुणों का भंडार होता है। जो संसार के छिद्रों को भरता है। संत समाज को चलता फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा गया है। जहां त्रिवेणी गंगा, | जहां त्रिवेणी गंगा यमुना और सरस्वती का संगम होता है। श्रीरामकथा में श्रीब्रह्मपीठाधीश्वर काठिया परिवाराचार्य अनंत विभूषित स्वामी रामरतन दास महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही। इससे पहले यजमान द्वारा व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी गई। अंत में उपस्थित श्रोतागणों को कथा का प्रसाद वितरित हुआ। इस अवसर पर कथा के आयोजक परिवार कैलाश चंद्र अग्रवाल, रामशरण अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, सांवरमल अग्रवाल समेत काफी संख्या में साधु-संत व भक्तगण अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन धन्य बना रहे थे।

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