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: धर्म को अलग करने के बजाए प्रत्येक कर्म को धर्म में करना सीखें: रामानुजाचार्य

बमबम यादव

Sun, Aug 27, 2023

रामलला सदन देवस्थानम में बह रही श्रीमद् भागवत कथा की रसधार,मंदिर में भगवान का पवित्रोत्सव व झूलनोत्सव का छाया उल्लास

अयोध्या। राम जन्म भूमि के निकट रामलला सदन देवस्थानम में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि धर्म को अलग करने के बजाए प्रत्येक कर्म को धर्म में करना सीखें।
आज हमारी प्रार्थना भी मात्र क्रिया बनकर रह गई है जबकि प्रत्येक क्रिया ही प्रार्थना बन जाए ऐसा कार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा व्यवहार आचरण विचार सब इतना लयबद्ध और ज्ञान मय हो कि यह सब अनुष्ठान जैसा लगने लगे। व्यासजी ने कहा कि धर्म के लिए अलग से कर्म करने की आवश्यकता नहीं अपितु जो कर्म हम कर रहे हैं उसको ऐसे पवित्र भाव से करें कि वही धर्म बन जाए। उन्होंने कहा कि समस्त समस्याओं का समाधान करने के लिए मौन ही सबसे बड़ा अस्त्र है इस अस्त्र से संसार के समस्त विवादों का समाधान हो सकता है।जो मनुष्य बाहरी बातों पर ध्यान देता है उसके घर में कलेश होता है तात्कालिक आवेश में लिया गया निर्णय हमेशा पश्चाताप का कारण बनता है जो सरलता असत्य और अन्याय का विरोध न कर सके वह समाज और स्वयं दोनों के लिए घातक है। कथा को समझाते हुए स्वामीजी ने कहा कि झूठ और अन्याय को सह लेना ही अगर सरलता होती तो भगवान श्री राम बाली के अन्याय और रावण के अत्याचार को सहते इन सब को दंडित करने के बाद भी भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम, सरल एवं संकोची कहा गया है। मंदिर में इन दिनों का भगवान का पवित्रोत्सव व झूलनोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है।

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