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: सनातन परंपराओं को अपने निज व्यवहार में डालना परम आवश्यक है: रामानुजाचार्य

बमबम यादव

Mon, Aug 21, 2023

श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित नव दिवसीय श्री राम कथा का छाया उल्लास

अयोध्या। श्रावण झूलन उत्सव के अवसर में श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित नव दिवसीय श्री राम कथा मे जगद्गुरु स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज के सानिध्य में मां सरयू जी का चुनरी मनोरथ का अनुष्ठान किया गया। रामानुजाचार्य जी ने मां सरयू का दूध से अभिषेक किया। श्री राम कथा के तृतीय दिवस में जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा का प्रारंभ भगवान राम की बाल लीलाओं से किया बचपन से ही चारों भाइयों का प्रेम अद्भुत है बड़े भैया राम के बिना अन्य भ्राता ना तो कोई खिलौना लेते हैं ना खेलते हैं ना दुग्धपान करते हैं। परमात्मा अपने को चारों रूप में विभक्त करके महाराज दशरथ के यहां जन्म लेते हैं। प्रभु राम चारों भाइयों जैसा प्रेम अगर हम सब के अंदर व्याप्त हो जाए तो इस भयंकर कलयुग में भी हम सभी स्वस्थ प्रसन्न जीवन यापन कर सकते हैं। युवा पड़ी को संदेश देते हुए महाराज जी ने कहा भगवान श्री राम के जीवन चरित्र में से एक अंश भी हम लोग अपने अंदर आत्मसात करे तो निश्चित ही कलयुग का प्रभाव हमारे ऊपर व्याप्त नहीं होगा। आज हम सभी युवाओं को सनातन धर्म और मानव जाति के कल्याण हेतु सनातन परंपराओं को अपने निज व्यवहार में डालना परम आवश्यक है। महर्षि विश्वामित्र अयोध्या पधारते हैं महाराज दशरथ सभा में विराजमान होकर अपने चारों पुत्रों के लिए श्रेष्ठ बधुओं की खोज के लिए चर्चा कर रहे थे उसी समय विश्व के मित्र महर्षि विश्वामित्र राज भवन में उपस्थित होते है विश्वामित्र जी ने भगवान राम लखन को वन में ले जाने के लिए महाराज दशरथ से याचना की। महाराज दशरथ विश्वामित्र जी को तर्क देते हैं अतिशय प्रिय मै अपने पुत्र राम को आपको नहीं दे सकता ऋषिवर आप यदि आज्ञा करें तो मैं स्वयं अंतिम सांस तक आपके यज्ञ की रक्षा करूंगा। कुल गुरु वशिष्ठ जी के समझाने पर महाराज दशरथ राम लखन को विश्वामित्र जी के साथ वन में भेज देते हैं। भगवान राम वन में जाकर दिन रात जागकर के महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते हैं । विश्वामित्र जी के साथ राम लखन मिथिला पुरी की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में हजारों जन्मों से पत्थर रूप में पड़ी गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का भगवान उद्धार करते हैं मिथिलापुरी के सौंदर्य को देखकर भगवान राम का मन आनंदित हो जाता है। गुरु जी के चरणों में प्रणाम करके मिथिलापुरी भ्रमण की आज्ञा लेते हैं गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम प्रचंड धनुष को दो खंडों में विभक्त कर देते हैं।प्रभु श्री राम का और मां सीता का दिव्य कल्याण उत्सव हुआ मां सीता का हाथ प्रभु श्रीराम के हाथों में देते हुए महाराज जनक कहते हैं हे रघुनंदन जिस तरह आपके जन्म की शुद्धि है उसी तरह मेरी पुत्री सीता भी अयोनिजा है।आपके सुख दुख में सदैव मेरी पुत्री आगे रहेगी। मां सीता और प्रभु श्री राम जी युगल जोड़ी का दर्शन करके देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे भक्तजन आनंदित हो गए।

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