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: आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला में मनाई गई जानकी नवमी

बमबम यादव

Wed, May 7, 2025
आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला में मनाई गई जानकी नवमी सीता नवमीं करने से समस्त मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं: सूर्यप्रकाश शरण, अधिकारी आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला अयोध्या। रसिक सम्प्रदाय की आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला में मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ श्रीजानकी नवमी मनाया गया। जन्मोत्सव को लक्ष्मणकिला धीश महंत स्वामी मैथिलीरमण शरण महाराज ने अपनी सानिध्यता प्रदान की। लक्ष्मणकिला धीश के कृपापात्र शिष्य अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में श्री रसिकेन्द्र विहारणी-विहारी जू का अभिषेक, श्रृंगार, पूजन पश्चात महाआरती हुआ। रात्रि 8 बजे से नित्य बधाई छठ्ठी तक होगा। महोत्सव से पूरा मंदिर प्रांगण ओत-प्रोत रहा। गर्भगृह से लेकर संपूर्ण मंदिर परिसर को सजाया गया था। मठ की आभा देखते हुए बन रही थी। मध्यांह 12 बजे घंटे, घड़‌यालों और शंख की करतलध्वनि बीच मां जानकी का प्राकट्य हुआ। संपूर्ण वातावरण किशोरी जी के जय-जयकार से गूंज उठा। भक्तगण भक्तिभाव में सराबोर रहे, जिनका उल्लास देखते हुए बन रहा था। अयोध्या धाम के नामचीन कलाकारों ने मंदिर के पूर्वाचायों द्वारा रचित जन्म बधाई के पद गाकर उत्सव में चार-चांद लगा दिया। इससे भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों जन्म महा महोत्सव की महफिल सजा दी। इसका सिलसिला देरशाम तक चलता रहा। लक्ष्मणकिला धीश ने कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया। अंत में जानकी नवमी का प्रसाद वितरित किया गया। सभी ने बड़े ही चाव संग जानकी जन्मोत्सव का प्रसाद ग्रहण किया। नवमी पर जानकी मैया का दर्शन कर भक्तजनों ने अपना जीवन धन्य बनाया। अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण ने कहा कि जानकी नवमी का भविष्य पुराण में वर्णन आया है, जिसमें व्रत करने का महत्व बताया गया है। जो लोग जानकी नवमीं का व्रत करते हैं। उन्हें समस्त पृथ्वी के दान तथा सोलह प्रकार के महादान यज्ञों का फल मिलता है। समस्त तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है। सभी जीवों पर परोपकार, दया करने का जो फल है। वही फल सीता नवमीं व्रत करने से ही प्राप्त हो जाता है। इसमे कोई संदेह नहीं है। सीता नवमीं करने से समस्त मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। फिर भी इस व्रत को करने का उद्देश्य जानकी और रघुनंदन दोनों को प्रसन्न करना है। जन्म महा महोत्सव पर पूरा मंदिर खचाखच श्रद्धालु भक्तों से भरा रहा। जहां मां जानकी की जय-जयकार हो रही थी।

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