Saturday 22nd of August 2026

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हनुमानगढ़ी के पूर्व गद्दीनशीन श्रीमहंत दीनबंधु दास के नाती शिष्य पुजारी राजन दास ने संतों का किया सम्मान

गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

जानकी घाट  स्थित चारुशिला मंदिर में संतों ने की बैठक, अध्यक्षता चारुशिला मंदिर पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी का पंचामृत से अभिषेक; दक्षिण भारतीय वाद्य और मशालों ने मोहा मन

स्वतंत्रता दिवस पर रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण व स्वामी नारायण का विशेष श्रृंगार,दर्शन को उमड़े

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: जानकीवर शरण महाराज अप्रतिम के धनी संत रहे: महंत सियाकिशोरी शरण 

बमबम यादव

Sat, Feb 10, 2024

सिद्धपीठ सद्गुरू सदन के पूर्वाचार्य को किया नमन

अयोध्या। सिद्धपीठ सद्गुरु सदन, गोलाघाट के पूर्वाचार्य पंडित राज श्री जानकीवर शरण महाराज को पुण्यतिथि पर संतों ने नमन किया। शनिवार मंदिर परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संत-महंतों द्वारा पूर्वाचार्य को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। साथ ही संतों ने उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। पुण्यतिथि पर मठ में कई धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। सगुरु सदन के महंत सियाकिशोरी शरण महाराज द्वारा आए हुए संत- महंत, विशिष्टजनों का स्वागत- सम्मान किया गया। सदुरु सदन पीठाधीश्वर महंत सियाकिशोरी शरण महाराज ने कहा कि इस आश्रम की गणना प्राचीनतम पीठों में होती है। जहां एक से एक बड़े-बड़े सिद्ध, तपस्वी, विद्वान संत हुए हैं। जिन्होंने मठ का कार्यभार संभाला। उन्हीं में से एक थे, पूर्वाचार्य पंडित राज श्री जानकीवर शरण महाराज। जिनकी पुण्यतिथि आश्रम में श्रद्धा के साथ मनाई गई। वह अप्रतिम के धनी संत रहे। संतत्व तो उनमें देखते ही झलकता था। जो भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। उनकी गणना भजनानंदी संतों में होती थी। भगवान सीताराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति रही। श्रीसीताराम के वह अनन्य उपासक थे। जो गौ और संत सेवी रहे। जिन्होंने मठ का सर्वांगीण विकास किया। जीवन भर मंदिर की उत्तरोत्तर समृद्धि में लगे रहे, जिसकी गणना अयोध्यानगरी के प्रमुख पीठों में होती है। आश्रम में गौ, संत, विद्यार्थी तथा अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया, त्यौहार भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। पुण्यतिथि पर सद्गुरु सदन के अधिकारी बालमुकुंद शरण, पुजारी अंबरीष शरण समेत अयोध्याधाम के अन्य विशिष्ट संत-महंत व मंदिर से जुड़े हुए शिष्य-परिकर, अनुयायी मौजूद रहे।

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