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: श्रीसंतगोपाल मंडपम में श्रीरंगराघव भगवान की हुई प्राण प्रतिष्ठा

बमबम यादव

Mon, Jul 8, 2024

दाक्षिणात्य विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार संग 81 कलशों से पंचामृत, फलों का रस और सर्व औषधियों से भगवान का किया गया अभिषेक

अयोध्या। रामनगरी के नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम में विधि-विधान पूर्वक श्रीरंगराघव भगवान की प्राणप्रतिष्ठा हुई। सर्वप्रथम दाक्षिणात्य विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार संग 81 कलशों में भरे हुए पंचामृत, फलों का रस और सर्व औषधियों से भगवान का अभिषेक किया गया। उसके बाद श्रीरंगराघव का दिव्य श्रृंगार हुआ। तदुपरांत विविध पकवानों का भोग लगाकर भव्य आरती उतारी गई। प्राणप्रतिष्ठा के बाद रविवार को गोदोहन, उत्थापन, नित्य हवन-पूजन, कलशयात्रा आदि कार्यक्रम हुआ। श्रीसंतगोपाल मंडपम के पीठाधिपति श्रीमज्जगद्‌गुरू रामानुजाचार्य स्वामी कूरेशाचार्य ने बताया कि स्वामी संतगोपालाचार्य महाराज अयोध्या के एक महान संत रहे। जिनका सन् 2011 में परम पद हुआ। उन्हीं की स्मृति में श्रीसंतगोपाल मंडपम का निर्माण किया गया। उसी संतगोपाल मंडपम् में विधि-विधान पूर्वक श्रीरंगराघव भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की गई। श्रीरंगनाथ भगवान सूर्यवंशी और अयोध्या के कुलदेवता हैं। प्रभु श्रीराम जब लंका से आए। तो उनके साथ विभीषण भी थे। विभीषण लंका नही जाना चाहते थे। श्रीराम ने उनसे कहा मैंने तुम्हें लंकेश बनाया है तुम्हें जाना ही पड़ेगा। विभीषण ने प्रभु से कहा ठीक है। तो कोई अपना चिन्ह ही दे दीजिये। जिसे देखकर आपका स्मरण करते रहेंगे। तब श्रीराम ने श्रीरंगनाथ भगवान को दे दिया। वह वर्तमान में श्रीरंगम त्रिचनापल्ली में विद्यमान हैं। जो श्रीरंगनाथ भगवान अयोध्या से श्रीरंगम दक्षिण भारत चले गए थे। उन श्रीरंगनाथ भगवान को पुन अयोध्या लाया गया। जो नौ फिट लंबे व सात फिट ऊंचे हैं। उनका वजन सौ किलो का है, जिसमें प्रभु श्रीसीताराम रंगनाथ भगवान की गोद में विराजमान हैं। ऊपर छत्र लिए भरतलाल, दाहिने लक्ष्मण व बायीं ओर शत्रुघ्न चंवर लिए हुए हैं। शेष शैय्या पर भगवान शेष जी लेटे हैं। चरणों में दाहिने हनुमान और बायीं ओर गरूड़ विराजमान हैं। ठीक नीचे रामानुज स्वामी विद्यमान हैं। श्रीरंगनाथ भगवान के विग्रह का प्राणप्रतिष्ठा दाक्षिणात्य विद्वानों द्वारा किया गया। प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव को कांची प्रतिवादि भयंकर मठ के स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज व उनके युवराज बालक स्वामी ने सानिध्यता प्रदान किया। इस मौके पर जगदुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर, जगद्‌गुरू स्वामी राघवाचार्य, मुख्य यजमान आईपी सिंह, कामरेड सूर्यकांत पाण्डेय समेत अन्य उपस्थित रहे।

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