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: परमपूज्य शंकराचार्य जी महाराज का श्रीरामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन में अहम योगदान रहा: आचार्य रामचंद्रन

बमबम यादव

Mon, Aug 11, 2025
परमपूज्य शंकराचार्य जी महाराज का श्रीरामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन में अहम योगदान रहा: आचार्य रामचंद्रन 91 वां जयंती महोत्सव पर पूरा मठ प्रांगण आहलादित व आप्लावित रहा दो दिवसीय जयंती उत्सव को कांची कामकोटि पीठ के वर्तमान पीठाधिपति जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने अपना सानिध्य प्रदान किया अयोध्या। प्रतिष्ठित पीठ कांचीमठ प्रमोदवन, अयोध्या धाम में मठ के पूर्वाचार्य कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई गई। यह महाराज श्री का 91 वां जयंती महोत्सव रहा, जिससे पूरा मठ प्रांगण आहलादित व आप्लावित नजर आया। दो दिवसीय जयंती उत्सव को कांची कामकोटि पीठ के वर्तमान पीठाधिपति जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने अपना सानिध्य प्रदान कर रहे थे। महोत्सव के प्रथम दिन सुबह मठ में विराजमान सभी देवी-देवताओं का दिव्य श्रृंगार कर विधि-विधान पूर्वक पूजन-अर्चन, आरती किया गया। उसके बाद मंदिर के समस्त पूर्वाचार्य का पूजन-अर्चन, आरती हुआ। तदुपरांत 108 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा सुंदरकांड का पाठ एवं वेद परायण किया गया। पाठ के समापन उपरांत मठ में स्थापित स्वामी जयेंद्र सरस्वती महाराज के विग्रह का वैदिक मंत्रोच्चार संग पूजन-अर्चन हुआ। तत्पश्चात वैदिक ब्राह्मणों का विशाल भंडारा प्रस्तावित रहा। भंडारे में काफी संख्या वैदिक ब्राह्मणों ने प्रसाद किया। जन्मोत्सव के क्रम सायंकाल पांच बजे भजन संध्या का आयोजन हुआ। भजन संध्या कार्यक्रम में नामी-गिरामी कलाकारों ने अपने गायन-वादन से जयंती महोत्सव में चार-चांद लगा दिया। उन्होंने उत्सव की शमां बांध दी, जिससे श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों ने देररात्रि तक भजन संध्या की महफिल सजाई। उसके बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। जन्मोत्सव के क्रम में दूसरे दिन सोमवार को सुबह 8 बजे से मठ प्रांगण में कांची शंकर नेत्रालय कानपुर द्वारा नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया है। कांचीमठ अयोध्याधाम के प्रभारी आचार्य रामचंद्रन ने बताया कि मठ में कांची कामकोटि पीठ के पूर्वाचार्य जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती महाराज की 91 वीं जयंती मनाई जा रही है। दो दिवसीय जन्म महा महोत्सव के प्रथम दिन 108 वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सुंदरकांड पाठ तथा वेद का परायण किया गया। उसके बाद महाराजश्री के विग्रह का अर्चन हुआ। फिर ब्राह्मणों का भंडारा किया गया। उन्होंने कहा कि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती महाराज अप्रतिम एवं विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे। वह हमारे बीच नही हैं। लेकिन उनकी यश, कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। श्रीरामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन में उनका अहम योगदान रहा। राममंदिर के प्रति उनके द्वारा किए गए योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता है। आंदोलन के वह अग्रणी योद्धाओं में से एक थे। श्रीराममंदिर के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। श्रीराम जन्म भूमि पर दिव्य-भव्य मंदिर निर्माण से उनका सपना पूरा और साकार हुआ। इस अवसर पर विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, आचार्य अशोक वैदिक, कांचीमठ प्रमोदवन के व्यवस्थापक राजेन्द्र वैदिक उर्फ पुरूषोत्तम वैदिक, सुषमा प्रभा श्रीवास्तव उनके सहयोगी सुशीला समेत सैंकड़ो लोग मौजूद रहे।

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