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: जिसकी साधना में निरंतरता होगी, उसी की उपासना भी सफल होगी: पुण्डरीक गोस्वामी 

बमबम यादव

Mon, Jan 29, 2024

उदासीन ऋषि आश्रम में भगवान के "भये प्रकट कृपला" महोत्सव का छाया उल्लास, आश्रम में बह रही श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा

व्यासपीठ का पूजन करते उदासीन ऋषि आश्रम पीठाधीश्वर श्रीमहंत डा भरत दास

कहा,तीर्थ में कथा श्रवण बड़े ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है, अयोध्या बड़ी ही पवित्र भूमि है

कथा श्रवण करते अयोध्या के मशहूर उघोगपति समाजसेवी आईपी सिंह व आईपीएस एस एन सिंह

अयोध्या। भगवान की कोई आकृति नहीं होती है। भक्त जिस भाव से प्रभु में अपनी आस्था रखता है भगवान उसी स्वरूप में भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं। यह बात सोमवार को रामनगरी के उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन धाम के भगवान राधारमण सरकार के परमभक्त ख्यातिलब्ध कथाव्यास श्री मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी ने कही। श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस में आचार्य जी ने कहा कि व्यक्ति को कर्म में निरंतरता बनाकर रखना चाहिए निरंतरता होने से ही सफलता प्राप्त होती है। अभ्यास के द्वारा मुढ़ से मुढ़ व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है जिसकी साधना में निरंतरता होती है उसी की उपासना भी सफल होती है। उन्होंने कहा कि कभी भी स्वयं की तुलना दूसरों से न करें अपने भाग्य की तुलना दूसरों से कर व्यक्ति व्यर्थ ही तनाव लेता है। परमात्मा भाग्य का चित्र अवश्य बनाता है मगर उसमें कर्म रूपी रंग तो व्यक्ति स्वयं भरता है। आचार्य श्री ने कहा कि हर परिस्थिति में व्यक्ति को प्रसन्न रहना चाहिए कर्म में निरंतरता बनाकर के रखना चाहिए और यह सूत्र अपने जीवन में उतार ले ईश्वर कृपा से जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। पुण्डरीक गोस्वामी जी ने कथा में पधारे सभी भक्तों को भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए ब्रज की यादों से जोड़ा। उपस्थित सभी भक्तवृन्द ब्रज की पावन कथा से जुड़कर आनंदित हुए। साथ ही भगवान की माखन चोरी की लीलाओं का वृतांत सुनाया की किस प्रकार छोटे से कन्हैया गोपियों के घर जा जाकर ग्वाल बालों की टोली लेकर माखन की चोरी करते थे। और अपनी शरारत से सबका मन मोह लेते थे।उन्होंने कहा कि सभी ब्रजवासी कन्हैया को बहुत प्यार करते थे। अनेक बाल लीलाओं के साथ अनेक राक्षसों का उद्धार किया। आचार्य श्री ने गोवर्धन पूजा की महिमा बताते हुए बताया कि श्री गिरिराज जी हैं कलियुग के एकमात्र देवता। जिसके ध्यान मात्र से होता है सभी बाधाओं का निवारण।महोत्सव की अध्यक्षता उदासीन आश्रम पीठाधीश्वर श्रीमहंत डा भरत दास जी महाराज कर रहें है। व्यासपीठ का पूजन अमेरिका से आये डा राम गर्ग, मिनी गर्ग ने किया। इस मौके पर जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य, रिटायर्ड आईपीएस विजयपाल सिंह, आईपीएस एस एन सिंह,जिले के प्रसिद्ध ठेकेदार समाजसेवी आईपी सिंह, एसपी सिंह, आश्रम के संत माधवानन्द, धर्मदास, कन्नौज के नेता प्रदीप यादव सहित बड़ी संख्या में संत साधक व आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी के शिष्य परिकर मौजूद रहें।

कथा में मौजूद जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य व उदासीन आश्रम के माधवाचार्य जी
कथा में आनंद लेते अमेरिका से आये भक्त डा राम गर्ग

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