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: दीपोत्सव के साथ हनुमान जयंती का छाया उल्लास

बमबम यादव

Sat, Nov 11, 2023

प्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग का मुख्य उत्सव हनुमान जयंती पर जश्न का माहौल

पूरे हनुमान बाग में मंगल ध्वनि गूज रही, हर कोई भक्ति की रस में दिख रहा सराबोर, अन्नकूट महोत्सव के साथ उत्सव का होगा समापन

अयोध्या।दीपोत्सव की पावन बेला में रामनगरी में हनुमान जयंती का उल्लास छलकने लगा। प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी समेत प्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग का मुख्य उत्सव हनुमान जयंती का अनुष्ठान शुरु हो गया है। पूरे हनुमान बाग को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। अपने आराध्य के प्राकट्य उत्सव का आनंद लेने के लिए हनुमान बाग सेवा संस्थान कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता है। महंत जगदीश दास के सानिध्य में उत्सव में चार चांद लग जाता है। चारों तरह मंगल ध्वनि गूज रही है। हर कोई भक्ति की रस में सराबोर दिख रहा है। ये आनंद अन्नकूट महोत्सव तक चलेगा। व्यवस्था में कोई कोर कसर न रह जायें इसको लेकर हनुमान बाग के शिष्य परिकर दिन रात लगे हुए है। सुनील दास व रोहित शास्त्री कार्यक्रम की बागडोर अपने हाथ में ले रखें है। साधना शुचिता और वैराग्य के अमृतपुंज भगवान महाबीर की आध्यात्मिक स्थली श्रीअयोध्याजी के मर्यादित आश्रमों में सिद्धपीठ श्रीहनुमानबाग गरीबों मजलूमों की सेवा कर अपने परिकल्पना को परिलक्षित कर रहा है।
हनुमान बाग रामनगरी के प्रतिष्ठित मंदिरों में शुमार है। वर्तमान परम्परावाहक म. श्रीजगदीशदासजी महाराज उक्त विरासत को समेटे हुए गौसेवा सन्तसेवा एवं आश्रम संचालन से सम्पूर्ण विश्व में सनातन ध्वजा लहरा रहे हैं। भजनानन्दी सन्तो में महान्त श्री जयरामदासजी महाराज भगवान श्रीरामनाम का स्मरण करते हुए श्रीहनुमत् आराधना में अपने जीवन को समर्पित करते हुए महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज को उत्तराधिकारी बनाते हुए इस साधना परम्परा को आगे बढ़ाया। ईश्वरीय शक्ति ही इनकी परमनिधि एवं श्रीराम एवं श्रीहनुमान का भजन ही इनकी आराधना एवं रामनाम परमनिधि को संजोते हुए समाज के हित के लिए बिखेरते रहे। भजनानन्दी सन्त श्री महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज के परमकृपापात्र महान्त जगदीशदासजी महाराज इस परम्परा में एक अद्भुत प्रतिभा के परिचायक सिद्ध हुए। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होता सुगन्ध बिखरने वाला पुष्प सहज ही सनातन सभ्यता और प्रकृति की आध्यात्मिकता को स्वयंमेव समर्पित हो जाता है। परमार्थ परायण जीवन के निमित्त महाराज श्री ने भव्य कथामण्डप पूजागृह आवास गौशाला का निर्माण श्रीहनुमानबाग सेवा संस्थान के तत्त्वावधान में कराया। श्रीमहाराज जी के विनम्र स्वभाव एवं लोक कल्याणभद्र भावना को दृष्टिगत रखते हुए भारत ही नहीं वरन् विदेशों के हनुमत भक्त भी महाराज श्री के अनुयायी बनकर दरिद्रनारायण और अयोध्याधाम की सेवा करने लगे। महाराज श्री ने अयोध्या में संस्कृत के पठन-पाठन की महती आवश्यकता समझकर भोजन प्रसाद सहित छात्रावास एवं शिक्षण संस्थान का निर्माण कराया।

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