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: श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम पीठाधीश्वर ने श्रीराम राज्याभिषेक कथा में नवाधा भक्ति पर डाला प्रकाश

बमबम यादव

Mon, Nov 13, 2023

दीपोत्सव महालक्ष्मी के महायज्ञ में पड़ी हजारों आहुतियां, कुमकुम पूजा बना आकर्षक का केन्द्र

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रतिष्ठित पीठ हनुमान बाग में दीपावली के पावन अवसर पर श्रीराम राज्याभिषेक महाकथा में पर प्रातःकाल देवी पद्मावती की कुमकुम अर्चना महालक्ष्मी मंत्र से होना शुरु हुआ। कर्नाटक के कृष्णा गिरि स्थित श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम के पीठाधीश्वर स्वामी वसंत विजय महाराज के श्रीमुख से श्रीराम राज्याभिषेक महाकथा में सातवें दिवस पर स्वामी बसंत विजय जी महाराज ने वनगमन के बाद भरत मिलाप की कथा भक्तों को सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान की चरण पादुका लेकर अयोध्या वापस लौटे भरत सिंहासन पर रखकर पादुका के आदेश से राजपाट का कार्य देखने लगे। स्वामीजी ने नवधा भक्ति पर प्रकाश डालते राम चरित मानस से सीखने की सलाह भक्तों को दी।
नंदी गांव में कुटी बनाकर भरत जी ने कुटिया में निवास कर भगवान राम की पादुका का पूजन करते हुए भजन कीर्तन में लीन हो गए। भगवान चित्रकूट से अरण्यकांड में प्रवेश के बाद इंद्र के पुत्र जयंत द्वारा सीता माता जी के चरण में चोंच का प्रहार किए जाने पर भगवान ने जयंत को दंड दिया। पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम के पीठाधीश्वर स्वामी वसंत विजय ने कहा कि सीता हरण की कथा के बाद रावण जटायु युद्ध के बाद सीता जी को लंका के अशोक वाटिका में रखने के बाद महिला सैनिकों की देखरेख में समय बिता रही थी, उसी समय भगवान राम द्वारा दी गई मुद्रिका लेकर हनुमान ने लंका में प्रवेश किया। मुद्रिका सीता जी को देकर उन्होंने अपना परिचय बताया। माता की आज्ञा से हनुमान जैसे ही फल खाने लगे कि सैनिकों द्वारा उन्हें पकड़कर रावण के दरबार में ले जाया गया। पूछ में आग लगने के बाद हनुमान जी ने लंका को विध्वंस कर वापस श्री राम के यहां वापस लौटकर सारी बात बताई।

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