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: रामनगरी में बह रही रामकथा की रसधार, आराध्य के जन्म महोत्सव का छाया उल्लास

बमबम यादव

Thu, Apr 11, 2024

हिंदू धाम में ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी, रामकृष्ण मंदिर में शीतल जी व हनुमान बाग मंदिर में मानस चातिका सुरभि जी कह रही रामकथा

भगवान श्रीराम का चरित्र दर्पण के समान है जिसमें अपने आपको देखकर सुधार करो :वेदांती

प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में राम जन्मोत्सव का उल्लास अपने चरम पर,चारों तरह बज रही भगवान के जन्म की बधाईयां

अयोध्या। भगवान राम के जन्म महोत्सव में शामिल होने के लिए अयोध्या में रामभक्तों का आना जारी है। चारों तरह बधाईयाँ बाज रही है। मंदिर मंदिर उत्सव से सराबोर है। हर कोई अपने आराध्य का जन्म महोत्सव मना रहा है। रामनगरी अयोध्या के हिंदू धाम मंदिर में राम कथा का भव्य आयोजन चल रहा है। 

श्रीराम जन्म के अवसर पर रामकथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के मंगलमयी चरित्र का वर्णन करते हुए कहा ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कहा कि भगवान अनंत हैं, उनका चरित्र अनंत है, उनकी लीला अनंत है। फिर भी भगवान के उन अनंत चरित्रों में जितना चरित्र चिंतन हम कर लें, उससे हमारे चरित्र का निर्माण होता है। भगवान के चरित्र का चिंतन करने का उद्देश्य यही है कि हमारा चरित्र सुधर जाए। भगवान का चरित्र वो दर्पण है, जिस दर्पण में हम अपना सुधार कर लें। दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता। दर्पण के सामने खड़े होकर हम गड़बड़ को सुधार करते हैं, उसी प्रकार भगवान श्रीराम का चरित्र ऐसा निर्मल दर्पण है, जिस दर्पण में हम अपने चरित्र को देखें कि हमारी क्या गलतियां हैं, रामजी ने क्या किया वो हम करें, या उन्होंने क्या नहीं किया वो हम ना करें, यह देखकर रामचरित्र के दर्पण में हम अपने जीवन का सुधार कर लें, यही कथा सुनने का फल है। अपने आपको हम पवित्र कर लेंगे। महोत्सव का संयोजन महंत राघवेश दास वेदांती जी कर रहें।

रामकोट स्थित रामकृष्ण मंदिर में श्री रामकथा का उल्लास चरम पर है। व्यासपीठ से कथा कहती महंत शीतल जी ने कहा कि संसार के लोग व्यवहार को देखते हैं, लेकिन भगवान भाव को देखते हैं। आपका भाव बहुत अच्छा हो, लेकिन व्यवहार में आप चूक गए तो संसार में आप सफल नहीं हो सकते और अगर भगवान के साथ व्यवहार में चूक गए तो कोई बात नहीं, यदि भाव आपका ठीक रहा तो काम चल जाएगा।

प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में राम जन्मोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। पूरे राजशी ठाठ बाट से भगवान का जन्म मनाया जा रहा है।मंदिर के श्रीमहंत जगदीश दास जी महाराज के पावन सानिध्य में भगवान का भव्य जन्म महोत्सव मनाया जा रहा है। पूरे मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। चारों तरह खुशियों का अंबार लगा हुआ है। हर कोई नाच गा रहा है। मंदिर में सुबह 108 वैदिक आचार्य सुमधुर आवाज में संगीतमय नवाह्न पारायण पाठ कर रहे है तो शाम को प्रख्यात कथावाचिका मानस चातिका वैदेही सुरभि जी रामकथा की अमृत वर्षा कर रही।सुरभि जी ने कहा कि राम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। श्री रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान के लीला चरित्र गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें स्वामी नारायणाचार्य जी ने कहा कि किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है  लेकिन यह भगवान की कथा है सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है। इसे बार-बार कहने एवं सुनने की इच्छा हमेशा बनी रहती है। महोत्सव में कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री कर रहें।

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