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: परमात्मा और महात्मा दोनों का प्रेम निःस्वार्थ होता है: महंत राघव दास

बमबम यादव

Thu, Jul 4, 2024

जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की तैयारी जोरों पर

अयोध्या। जगन्नाथ पुरी के परम्परागत वार्षिकोत्सव रथयात्रा की कड़ी में रामनगरी में शुरू हुए उत्सव की तैयारियां तेज हो गयी है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पर्व पर सात जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा के लिए भगवान के रथों के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर उनकी रंग-पुताई कराई जा रही है।

 नगरी के जगन्नाथ मंदिर रामकोट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस मंदिर के महंत राघव दास रामायणी महाराज ने कहा कि परमात्मा और महात्मा दोनों का प्रेम निःस्वार्थ होता है। स्वामीजी ने कहा कि जीवन में सुख आए तो भगवान की शरण में चले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार की उल्टी रीति है जब दुख होगा तो अपने भाग्य को कोसेंगे और भगवान से भी सौदेबाजी करने लगेंगे कि हे प्रभु हमारा अमुक काम हो जाए तो ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि जब सुख में भगवद शरण में आ जाएंगे तो दुख आएगा ही नहीं और प्रारब्ध से आया भी तो ऐसे निकल जाएगा कि कुछ हुआ ही नहीं। महंत राघव दास जी ने कहा कि जो साधु के संघ में आया तो फिर वह लौटता नहीं है। गोपियां हो या मीराबाई सब भगवान की भक्ति में ऐसा लीन हुई कि फिर उन्हें संसार में आसक्ति नहीं रह गयी। 

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