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: भगवान की कथा से बढ़कर मंगल करने वाली कोई दूसरी चीज़ नहीं: रत्नेशप्रपन्नाचार्य

बमबम यादव

Wed, Dec 13, 2023

बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में सीताराम विवाहोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम का दिव्य संचालन मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास ने किया

अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या में प्रतिदिन उत्साह और आनंद का माहौल रहता है। लेकिन विशेष पर्व पर यह उल्लास व उत्साह कई गुना बढ़ जाता है और भी क्यो न। प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव के बाद उनके विवाहोत्सव का पर्व भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता। रामकोट स्थित चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान में सीताराम विवाह महोत्सव का आज भव्य शुभारंभ हो गया। महोत्सव में व्यासपीठ से जगद्गुरु रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी के श्री मुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के प्रथम दिवस जगद्गुरु रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि भगवान की कथा से बढ़कर मंगल करने वाली कोई दूसरी चीज़ नहीं है।कथा व्यक्ति के लिये ही नहीं समाज और राष्ट्र के लिये ही नहीं संसार के जीवमात्र के जीवन में मंगल करने वाली है।श्रीअयोध्या धाम तो मंगलायतन है ही पर श्रीरामजन्म भूमि पर भव्य व दिव्य मंदिर मे प्राण-प्रतिष्ठा की मंगल सूचना प्राप्त हो गयी है और वो मंगलमय ढंग पूर्ण हो जाये इस मंगलकामना के लिये मंगलमयी कथा का सुन्दर आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि मंगल सूचना हम सभी को प्राप्त हो गयी है बस प्रतीक्षा है कि हम सब अपनी आँखों से इस बनते हुये इतिहास के साक्षी बनें।यह श्रीसीताराम जी के मांगलिक विवाहोत्सव पर आयोजित मंगलभवन व अमंगल का नाश करने वाली श्रीराम की कथा मंगल पुनीत कार्य में कारक सिद्ध होगी। जगद्गुरू जी ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व में श्रीराम से बढकर श्रेष्ठ राजा,श्रेष्ठ नायक ,आदर्श व्यक्तित्व का होना तो मुश्किल है ही अपितु दुनिया के किसी काव्य की कल्पना में भी ऐसा आदर्श चरित्र नहीं दिखायी देता ।राम तो भारत की श्वास है ।संसार के समस्त धर्मों में मानवीयता के उदात्त गुण बताये गये हैं वो सभी श्री राम में पाये जाते हैं।भागवत के मुख्य स्वामी श्री श्रीधराचार्य जी ने जब भागवत की कथा पर टीका लिखना आरंभ किया तो उन्होंने सबसे पहले राम की वन्दना की ताकि कृष्ण को व्याख्यायित कर सकें।राम की कृपा से बंदर तो समुद्र पार हो ही गये थे ।हमसब भी संसार समुद्र से पार जाना चाहें तो भी श्रीराम का अवलम्ब है।
कथा के शुभारंभ में कथा की अध्यक्षता करते हुए बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि अयोध्या भूमि बड़ी पवित्र भूमि है। कथा में जब भी आये तो प्रेमी बन कर आये ज्ञानी बनकर नही आना है। प्रेम से कथा सुनने से सभी प्रकार से कल्याण होता है। भगवान की कथा मंगलकारी होता है।  कथा में दिव्य संतों का आगमन हो रहा है। ये मंगलकारी है। कथा में बड़ा भक्त माल के बड़े महंत कौशल किशोर दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास, तुलसी दास जी की छावनी के पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास, महंत राम करन दास जी ने अपने अपने विचार रखें। महोत्सव का दिव्य संचालन बिंदुगाद्याचार्य स्वामी श्री देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।

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