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: जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं: दिनेश

बमबम यादव

Thu, Feb 29, 2024

श्री लक्षगणपति महायज्ञ में श्रीदुर्गासप्तशती एवं श्रीगणपत्थर्वशीर्ष हो रहा भव्य पाठ

व्यासपीठ का पूजन करते यजमान

अयोध्या। मां सरयू के पावन गोद में हो रहें श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ में ब्राह्मणों द्वारा श्रीदुर्गासप्तशती एवं श्रीगणपत्थर्वशीर्ष पाठ हो रहा है। महायज्ञ हवन, सर्वकल्याण यज्ञशाला में श्रौत यज्ञ, महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् में प्रातः के समय सन्त सम्मेलन, तत्पश्चात श्रीराम कथा, महायज्ञ के लीला मण्डपम् में में श्रीराम लीला व श्रीकृष्ण लीला का अद्भुत मंचन भी हो रहा।यह अनुष्ठान महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के पावन सनिध्य एवं श्रीमज्जद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी राघवाचार्य महाराज के संयोजकत्व में हो रहा।
महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् में सन्त सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने नारी शिक्षा के विकास के विषय पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव माता चिदानन्मयी ने अपने सम्बोधन में नारी शिक्षा के विकास को लेकर नारियों को धर्म शास्त्र के अनुसार मासिक धर्म के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए एवं क्या सावधानी बरतनी चाहिए, को विस्तार पूर्वक ढंग से जागरुक करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आज के समय लोगों में हो रहे रोगों का मूल कारण स्त्रियों को रजस्वला धर्म का पालन न करना है, क्योंकि स्त्रियां मासिक धर्म के दौरान भी अपने रसोई में स्वयं भोजन पकाकर अपने परिवारजनों को खिला रही हैं, फलस्वरूप रोगों का होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय शिक्षा का अभाव नहीं है किन्तु शिक्षा, किस प्रकार से प्रदान की जाए, उस प्रकिया का अभाव है। श्री प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमिक के डॉयरेक्टर डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी ने कहा कि पतिव्रता नारी, साक्षात् भगवती दुर्गा का ही स्वरूप है एवं वही परम शक्ति है। उन्होंने महाभारत के एक प्रसंग के माध्यम से बताया कि पतिव्रता नारी की शक्ति का समार्थ्य यह है कि गान्धारी ने अपने पूत्र दुर्योधन को जब अपने नेत्रों से देखा तो दुर्योधन का शरीर वज्र का बन गया। अतः नारी शक्ति को अपने सामर्थ्य को पहचानना होगा एवं उसका प्रयोग करना होगा, तभी नारी शक्ति का विकास सम्भव है। विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक आदरणीय बड़े दिनेश जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं, क्योंकि नारी इस सृष्टि के सृजन का आधार एवं केन्द्रबिन्दु है। उन्होंने कहा कि वेद के अनुसार समाज की इकाई, परिवार है अतः अपने परिवार को तैयार करना नारी शक्ति के लिए बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके निर्वहन के लिए ही यजुर्वेद में नारी को श्रेष्ठ प्रबंधक की संज्ञा दी गई है। विन्ध्यांचल से आये उमेश महाराज, अयोध्या धाम के आचार्य वेद प्रकाश, स्टेशन मन्दिर के महन्त रामसेवकदास रामायणी, कैलीफोर्निया से आयी डॉ० पूर्वा, बावन मन्दिर के महन्त वैदेही बल्लभ शरण महाराज, ऋषिकेश से अयोध्यादास रामायणी, ब्रह्मचारी आनन्द प्रकाश, डॉ० स्वामी राघवाचार्य महाराज, सुप्रसिद्ध कथा व्यास कोलकाता से आचार्य शिवाकान्त महाराज एवं काशी से स्वामी ओमा ने भी सभा को अपने सम्बोधित किया। महायज्ञ स्थल पर राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, प्रवीन नेमानी, अरुए काजरिया, विकास मित्त, गौरव मित्तल, श्रीमती सुषमा अग्रवाल, श्रीमती आँचल मित्तल, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, सीताराम बडोनी, अवधेश जी, भानू जी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।

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