: विश्व शांति जगत कल्याण के लिए 15वां श्रीराम महायज्ञ रविवार से
Sat, Mar 29, 2025
विश्व शांति जगत कल्याण के लिए 15वां श्रीराम महायज्ञ रविवार सेश्री राम मंदिर निर्माण संकल्प के साथ प्रारंभ हुआ था श्री राम महायज्ञ : महंत परशुराम दासश्रीराम महायज्ञ के साथ सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा की होगी अमृत वर्षाअखंड दुर्गा सप्तशती पाठ, श्री राम नाम संकीर्तन और श्री रामचरितमानस का पाठ होगा आकर्षक का केंद्रअयोध्या। परम तपस्वी अमरकंटक के तपोनिष्ठा संत कायाकल्पी बर्फानी दादा महाराज के आदेश से भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर श्री राम मंदिर निर्माण में आने वाली बाधाओं और शीघ्र मंदिर निर्माण संकल्प के साथ 2010 में प्रारंभ श्रीराम महायज्ञ, अखंड दुर्गा सप्तशती पाठ, श्री राम नाम संकीर्तन एवं श्री रामचरितमानस अखण्ड पाठ का 15 वां महायज्ञ महोत्सव 30 मार्च से। अखिल भारतीय पंच तेरह भाई त्यागी खालसा ख़ाक चौक और सिद्धपीठ संकट मोचन हनुमान किला पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में और हनुमान जी महाराज की अध्यक्षता में सिद्धपीठ संकट मोचन हनुमान किला धर्म पाथ बाईपास अयोध्या धाम में 30 मार्च से प्रारंभ होगा जो 7 अप्रैल को बृहद भंडारे के साथ समाप्त होगा। 15 वें वर्ष में श्रीराम महायज्ञ के साथ सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा की भी अमृत वर्षा होगी।श्री राम महायज्ञ के संयोजक महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि 2019 के पहले मंदिर-निर्माण संतों का आंदोलन चल रहा था और मंदिर निर्माण के लिए श्री राम महायज्ञ का शुभारंभ हुआ जो मंदिर निर्माण के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है, कोरोना कल में भी परिसर के अंदर अनुष्ठान किया गया था। मंदिर निर्माण बाद पूरे विश्व में राम राज्य स्थित हो यह संकल्प बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि रामराज्य का मतलब विश्व में शांति, एक देश के नागरिक दूसरे देश के नागरिक के साथ प्रेम व्यवहार करें और सभी लोग शाश्वत सनातन धर्म का पालन करें इसी उद्देश्य से भगवान के जन्मोत्सव पर श्री राम महायज्ञ अखंड दुर्गा सप्तशती पाठ, श्री राम नाम संकीर्तन और श्री रामचरितमानस का पाठ किया जाता हैं। इस वर्ष यज्ञ के साथ श्रीमद्भागवत कथा भी होगी, जिसका शुभांरभ 30 मार्च को वैदिक विद्वानों द्वारा किया जाएगा, 6 अप्रैल को पूर्णाहुति होगी, 7 अप्रैल को वृहद भंडारे के साथ समापन होगा और प्रत्येक दिन शाम को संतों का सम्मान भी किया जाएगा। रामजी भाई पाल मुंबई, अमर सिंह अयोध्या, राजमणि सिंह अयोध्या, डॉ एमपी यादव के साथ सैकड़ो शिष्य परिवार श्री राम महायज्ञ में सहयोगी की भूमिका निभाएंगे।
: रोजा रखकर बच्चे भी कर रहे अल्लाह की इबादत
Thu, Mar 27, 2025
रोजा रखकर बच्चे भी कर रहे अल्लाह की इबादतकहा, रोजा रखने से सवाब मिलता है, गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता हैअयोध्या। रमजान हर किसी को नेकी की तरफ बुलाता है। इतना ही नहीं रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष । रमजान के रोजे शरई मजबूरी के बिना छोड़ने पर गुनाह होता है। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही जहां बड़ों में उत्सुकता देखी जाती है। वहीं बच्चे भी किसी से कम नहीं है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर कई बच्चों ने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। बच्चों के हौसलों की मुहल्लेवासियों समेत रिश्तेदारी में चर्चा रही और सभी ने बच्चों को तरह-तरह के उपहार देकर हौसला अफजाई की।रमजान माह का मकसद है कि रोजा रखकर जहां बुराईयों से बचा जा सके वहीं अल्लाह के करीब पहुंचा जा सके। रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज किये गये हैं। मसलन वह बीमार न हो और रोजा रखने की हालत में न हो।धर्म नगरी अयोध्या जो गंगा जमुनी तहजीब की नगरी भी है। हिंदू मुस्लिम एकता में जो हमेशा पुल का काम करते है। या हम यू कहें कि गंगा जमुनी तहजीब की जीवंत मिशाल मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया का दरवाजा दीन दुखियों के लिए हमेशा खुला रहता है। उनके पुत्र समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी व फिल्म प्रड्यूसर अभिराम दास वार्ड के युवा पार्षद समाजसेवी सुल्तान अंसारी खुद तो रोजा रखते हुए लोगों की मदद के लिए अपने पिता के बतायें मार्ग का अनुसरण करते हुए दो कदम आगे रहते हैं और अल्लाह की इबादत पूरे नेक दिल से करते हैं। इमरान व सुल्तान के बेटे और बेटियां भी रोजा रखे हुए हैं।अरहन अंसारी, अलिशफा अंसारी,अलीजबा अंसारी व कश्फिया अंसारी अपने परिवार के सदस्यों को रोजा रखते हुए देखकर मन में भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत का ख्याल आया। सभी ने मां- बाप की इजाजत से अपना रोजा रखा। भीषण गर्मी और शिद्दत के दिनों में रखे गये इस रोजे की अहमियत ही कुछ और है। अल्लाह तआला को जहां गर्मी का रोजा अधिक पसंद हैं वहीं जवानी की इबादत बेहद प्यारी है। सभी बच्चों ने रोजा रखकर पूरा दिन अल्लाह की इबादत की। बच्चों के इस हौसले को देखकर मुहल्ले के साथ- साथ रिश्तेदारों ने उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। सभी बच्चों ने बताया कि उनकी मां व अन्य घर वाले भी रोजा रखते हैं। उनको देखकर ही उसके मन में भी रोजा रखने की नियत आयी। बताया कि रोजा रखने से सवाब मिलता है और गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है।
: पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम: रामानन्दाचार्य
Wed, Mar 26, 2025
पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम: रामानन्दाचार्यमर्यादा का उल्लंघन न करना ही रामत्व का प्रतीकः उषा दीदीब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी विशाल संत-समागम का हुआ भव्य आयोजनसनातन धर्म के संवाहक प्रभु श्रीराम विषय पर हुई गोष्ठीअयोध्या। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अलग-अलग मत-मतांतरों के विभिन्न समूहों की ओर से अलग अलग धार्मिक आयोजन के अतिरिक्त बौद्धिक कार्यक्रमों का सिलसिला भी चलता रहा है। इसी श्रृंखला में मंगलवार को ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी संत-समागम का आयोजन तुलसी उद्यान में किया गया। इस मौके पर जगगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के अलावा अन्य संतों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर सनातन धर्म के संवाहक प्रभु श्रीराम विषय पर गोष्ठी भी हुई। इस कार्यक्रम का अनावरण माउंट आबू स्थित ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख उषा दीदी ने संतों के साथ किया। उन्होंने संतों के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करते हुए उनका यथोचित सम्मान किया। उन्होंने गोष्ठी के विषय पर केन्द्रित अपने उद्बोधन में कहा कि राम का ईश्वर होना उतना महत्वपूर्ण नहीं था जितना कि किसी भी परिस्थिति में मर्यादा पर अडिग रहना था। वहीं जगगुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य ने कहा कि पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम ही है जिन्होंने हर परिस्थिति में समभाव बनाए रखा। युवराज बनने का न हर्ष था और न ही वनवास जाने का संताप ही रहा। उन्होंने जातिवादी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रामराज्य की परिकल्पना ही यही है कि समाज में ऊंच-नीच व छोटे-बड़े का भेदभाव तिरोहित हो जाए। उन्होंने कहा कि श्रीराम वस्तुतः सनातन परंपरा के महानतम दूत हैं, उन्होंने अपने जीवन में जिस शील, करुणा, विनय, धैर्य-शौर्य का परिचय दिया है, वह सनातनता से अनुप्राणित है। जगद्गुरु ने कहा कि यदि सनातन मूल्यों और आदशों की जड़ों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो हमें श्रीराम के जीवन में झांक कर ऐसे मूल्यों और आदर्शों को अनुभूत कर लेना चाहिए।बावनजी मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभशरण ने 'सनातन परंपरा के संवाहक श्रीराम'. का विषय तय करने के लिए आयोजकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कहा, सनातन को समझने के लिए श्रीराम से उत्तम उदाहरण दूसरा नहीं है और श्रीराम को समझने के लिए हमें गोस्वामी तुलसीदास से लेकर अयोध्या के उन आचार्यों का अनुगमन करना होगा, जिन्होंने अन्य किसी लोभ में पड़े विना श्रीराम और उनके सत्य के लिए जीवन समर्पित किया। कामधेनु आश्रम के महंत महामंडलेश्वर आशुतोषदास ने कहा, सनातन परंपरा आचार्य निष्ठा की पर्याय है और आचार्य निष्ठा के सर्वाधिक प्रभावी प्रेरक श्रीराम हैं। संत करपात्री ने कहा कि श्रीराम में सहज अनुशासन निहित है और यदि जीवन के शाश्वत सार रूपी सनातन को जीवंत करना है, तो श्रीराम जैसा आत्मानुशासन अंगीकार करना होगा। ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय से आईं राजयोगिनी ऊषा बहन ने कहा कि जिन मूल्यों और अनुशासन पर चल कर श्रीराम और सीता ने अपने जीवन का निर्वाह किया, वह सनातन परंपरा का श्रेष्ठतम उदाहरण है। कार्यक्रम की रूपरेखा बीके मुकेश भाई व संचालन दिल्ली की बीके लता ने किया। इस दौरान हैदराबाद के सुप्रसिद्ध टॉलीवुड डायरेक्टर शिवा मुप्पलनैनी ने सभी संतों का सुनहरी दुशाला पहनाकर सम्मानित किया।