: दिगंबर जैन मंदिर में 1800 प्रतिमाओं का हुआ प्राण प्रतिष्ठा
Sat, Mar 8, 2025
दिगंबर जैन मंदिर में 1800 प्रतिमाओं का हुआ प्राण प्रतिष्ठाजैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी आर्यिकाशिरोमणि गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माता जी के पावन सानिध्य में महोत्सव का हुआ समापन1800 प्रतिमाओं को मंत्रोच्चार एवं पूर्ण विधि विधान से भगवान का स्वरूप प्राप्त हुआ:पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीअयोध्या। भगवान ऋषभदेव मंदिर रायगंज में भगवंतों की 727 जिनप्रतिमाओं सहित भगवान ऋषभदेव से लेकर महावीर तक की अन्य 1008 यानी कुल लगभग 1800 प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा अर्थात प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी के तत्वाधान में मनाया गया। जिसे जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी आर्यिकाशिरोमणि गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माता ने अपना सानिध्य प्रदान किया। संपूर्ण कार्यक्रम को प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता का मार्गदर्शन एवं तीर्थ के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी का कुशल निर्देशन प्राप्त हुआ। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्यश्री भद्रबाहुसागर, देश के चिरपरिचित क्षुल्लक ध्यानसागर एवं श्रवणबेलगोला के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। महोत्सव में देश के लगभग सभी प्रांतों से दस हजार भक्तजन शामिल हुए। इस अनुष्ठान को प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन, पं. ऋश्वभसेन जैन उपाध्ये, पं. सतेन्द्र जैन, पं. अकलंक जैन आदि विद्वत जनों ने संपन्न कराया। इस प्रकार अयोध्या में एक साथ लगभग 1800 प्रतिमाओं का गर्भकल्याणक, जन्मकल्याणक, दीक्षाकल्याणक, केवलज्ञानकल्याणक और मोक्षकल्याण मनाया गया। पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि 1800 प्रतिमाओं को मंत्रोच्चार एवं पूर्ण विधि विधान से भगवान का स्वरूप प्राप्त हुआ। अयोध्या के इतिहास का यह एक उत्कर्ष काल है। जब एक साथ जैन तीर्थकर एवं सिद्ध भगवंतों की 1800 प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित की गई। उन्होंने बताया कि तीनोंलोकों का ममुद्रा के साथ समस्त आठों कर्मों का नाश करते हुए भगवान अपनी आत्मा को शरीर से पृथक करते हुए सदैव के लिए अजर-अमर बनकर भगवत्ता का स्वरूप प्राप्त किया और मोक्षकल्याणक मनाया गया। इस मौके पर कार्याध्यक्ष अनिल कुमार जैन, उपाध्यक्ष आदीश कुमार जैन सर्राफ, महामंत्री अमरचंद जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन, जितेन्द्र जैन, योगेश जैन, निधेश जैन, परमेन्द्र जैन, पंकज जैन, नमन जैन, अंकुर जैन, कमलेश जैन आदि उपस्थित रहे।
: श्री सियावर भवन के महंत बने युवा आकाश शरण
Wed, Mar 5, 2025
श्री सियावर भवन के महंत बने युवा आकाश शरणअयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की दी मान्यताअयाेध्या। रामनगरी के श्री ऋणमोचनघाट स्थित मंदिर सियावर भवन का नया महंत युवा आकाश शरण काे बनाया गया। यह मंदिर आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला की परम्परा का है। मंगलवार को एक महंताई समाराेह के दरम्यान अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता की। साथ ही साथ महज्जरनामा पर हस्ताक्षर भी किया। आकाश शरण के सेवा भाव व ईश्वर के प्रति उनकी आस्था व अपने गुरु मैथिलीरमण शरण की सेवा में थे,इस सबको देखते हुए अयोध्या के संतों ने आचार्य पीठ श्रीमहंत मैथली रमण शरण महाराज की अध्यक्षता में मैथिली रमणशरण के साकेतवास के बाद संत समाज ने आकाश शरण को महंती के योग्य समझा और मंगलवार को कंठी, चादर, तिलक आदि से महंत के रूप में उनका अभिषेक किया। संतों ने रामानन्दीय वैरागी परमारा के अनुसार आकाश शरण को कन्ठी, चादर व तिलक लगाकर गद्दी पर आसीन कर विधिवत महन्थ नियुक्त कर यह महज्जर नामा लिख दिया। जिसमें संताें व सद् गृहस्थाें ने महंत आकाश शरण काे श्री सियावर भवन का महंत एवं सर्वराहकार घाोषित किया। नवनियुक्त महंत आकाश शरण ने कहा कि वह अपने समस्त दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन करेंगे। साथ ही मंदिर की सम्पूर्ण सम्पत्तियाें काे अक्षुण्ण बनाए रखने का आजीवन सतत प्रयत्न करते रहेंगे। अंत में आए हुए संताें का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत-सत्कार महंत छोटू शरण, पार्षद प्रतिनिधि प्रियेश दास व रामदेव पहलवान ने किया। देखरेख आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने किया।महंताई समाराेह में आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के श्रीमहंत मैथली रमण शरण, हनुमत सदन के महंत अवधेश किशोर शरण, हनुमानगढ़ी से महंत बलराम दास, महंत सत्येन्द्र दास, महंत प्रिया पीतम शरण, महंत रामभद्र शरण, रसमोद कुंज के महंत, आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण सहित बड़ी संख्या में संत महंत मौजूद रहें।
: जानकी जीवन सरकार का दो दिवसीय 17वां प्राकट्योत्सव का छाया उल्लास
Wed, Mar 5, 2025
जानकी जीवन सरकार का दो दिवसीय 17वां प्राकट्योत्सव का छाया उल्लासदर्शन भवन से महंत डॉ. ममता शास्त्री के दिशानिर्देशन में गाजे-बाजे, हाथी-घोड़ा, रथ संग निकली विशाल शोभायात्रासरयू मैया का अभिषेक-पूजन, आरती कर चढ़ाई गई चुनरीअयोध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी भगवान का मंदिर दर्शन भवन जानकीघाट से गाजे-बाजे, हाथी-घोड़ा, रथ संग विशाल शोभायात्रा निकाली गई। अवसर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान जानकी जीवन जू के 17वें प्राकट्योत्सव का है। शोभायात्रा को दर्शन भवन की वर्तमान पीठाधीश्वर महंत डॉ. ममता शास्त्री ने अपनी सानिध्यता प्रदान किया। यह शोभायात्रा दर्शन भवन से शुरू होकर तपस्वी छावनी चौराहा, दिगंबर अखाड़ा, हनुमानगढ़ी चौराहा, श्रृंगारहाट, शास्त्रीनगर, तुलसी उद्यान, लता चौक होते हुए पावन सरयू तट पहुंची। जहां सरयू मैया का अभिषेक-पूजन, आरती कर चुनरी चढ़ाई गई। उसके बाद पुनः शोभायात्रा सरयू तट से दर्शन भवन मंदिर को वापस लौटी। वहां मंदिर में विराजमान नर्वदेश्वर भगवान शंकर का विशेष श्रृंगार कर भस्म आरती उतारी गई। उसके बाद सायंकाल दर्शन भवन बिहारी सरकार की भव्य एवं मनोरम फूलबंगला झांकी सजी। झांकी का दर्शन कर भक्तगण धन्य हुए। इस अवसर पर दर्शन भवन की पीठाधिपति महंत डॉ. ममता शास्त्री ने बताया कि आश्रम में जानकी जीवन सरकार का दो दिवसीय प्राकट्योत्सव मनाया जा रहा है। यह भगवान का 17वां प्राकट्य महोत्सव है। महोत्सव के क्रम में प्रथम दिन सुबह तुलसी एवं पुष्प द्वारा ठाकुर जानकी जीवन का सभी भक्तों ने सामूहिक रूप से सहस्रार्चन कर उत्सव का शुभारंभ किया। तत्पश्यात 108 बत्ती से भगवान की भव्य आरती उतारी। उसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार से पुण्य सलिला मां सरयू तट तक भव्य, विशाल एवं मनोरम शोभा यात्रा निकाली गई। फिर मोक्षदायिनी एवं पुण्यदायिनी मां सरयू की दिव्य एवं भव्य चुनरी महोत्सव का कार्यक्रम हुआ। तदुपरांत सरयू मैया की दिव्य एवं भव्य आरती उतारी। पुनः शोभा यात्रा सस्यू तट से मंदिर को वापस लौटी। सायंकाल नर्वदेश्वर भगवान शंकर का विशेष श्रृंगारदिव्य भस्म आरती उतारी। दर्शन भवन बिहारी सरकार के फूल बंगला की मनोहारी झांकी सजी। मंदिर के मुख्य द्वार पर भण्डारा प्रसाद का वितरण हुआ। उसके बाद शास्त्रीय संगीत एवं सांस्कृतिक संध्या की महफिल सजी। देररात्रि ठाकुर जानकी जीवन के संग फूलों की होली खेली। उन्होंने बताया मंगलवार को सुबह नर्वदेश्वर भगवान शंकर का रूद्राभिषेक है। फिर विश्वनाथ गौ सेवा दर्शन मंदिर में गौ माता का विशेष पूजनार्चन एवं दिव्य आरती होगी।