: भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है श्री राम जन्मभूमि मंदिर: रामदिनेशाचार्य
Thu, Jul 4, 2024
हरिधामगोपाल पीठ में श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर मनाया गया श्री रामजन्मोत्सव, चारों तरह छाया उल्लास
अयोध्या। रामनगरी के हरिधामगोपाल पीठ में भव्य श्रीरामकथा का आयोजन हो रहा है। जिसमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी के शिष्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के मुखारविंद श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस में आज राम जन्म महोत्सव मनाया गया। रामानंदाचार्य जी ने कहा कि लोक कल्याण के लिए होता है भगवान श्रीराम का जन्म। जहां सभी वेद वेदांत के परे परमात्मा कौशल्या पुत्र बनकर आते हैं निश्चित रूप से यह सनातन परंपरा के गौरव है। कथाव्यास ने कहा कि जब धारा पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्त अपने सारे संबंधों की रस्सी बनाकर भगवान के चरणाविंद से बांध देता है बांध कर खींच लेता है तो भगवान अपने आप को रोक नहीं पाते और अवतार ग्रहण कर लेते हैं। जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा। वह ब्रह्म जो बड़े-बड़े ज्ञानी महानी ध्यानी के ज्ञान गम में से परे होता है लेकिन जब कोई भक्ति मयी कौशल्या और बैराग्य रूपी दशरथ उस परमात्मा को प्राप्त करना चाहते हैं तब वह अवतार धारण करके पुत्र बनकर आ जाता है। कथा का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री जी कर रहें है। व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया। व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री रहे।
: परमात्मा और महात्मा दोनों का प्रेम निःस्वार्थ होता है: महंत राघव दास
Thu, Jul 4, 2024
जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की तैयारी जोरों पर
अयोध्या। जगन्नाथ पुरी के परम्परागत वार्षिकोत्सव रथयात्रा की कड़ी में रामनगरी में शुरू हुए उत्सव की तैयारियां तेज हो गयी है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पर्व पर सात जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा के लिए भगवान के रथों के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर उनकी रंग-पुताई कराई जा रही है।
नगरी के जगन्नाथ मंदिर रामकोट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस मंदिर के महंत राघव दास रामायणी महाराज ने कहा कि परमात्मा और महात्मा दोनों का प्रेम निःस्वार्थ होता है। स्वामीजी ने कहा कि जीवन में सुख आए तो भगवान की शरण में चले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार की उल्टी रीति है जब दुख होगा तो अपने भाग्य को कोसेंगे और भगवान से भी सौदेबाजी करने लगेंगे कि हे प्रभु हमारा अमुक काम हो जाए तो ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि जब सुख में भगवद शरण में आ जाएंगे तो दुख आएगा ही नहीं और प्रारब्ध से आया भी तो ऐसे निकल जाएगा कि कुछ हुआ ही नहीं। महंत राघव दास जी ने कहा कि जो साधु के संघ में आया तो फिर वह लौटता नहीं है। गोपियां हो या मीराबाई सब भगवान की भक्ति में ऐसा लीन हुई कि फिर उन्हें संसार में आसक्ति नहीं रह गयी।
: भगवान श्री श्रीरंगराघव के प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव का छाया उल्लास
Thu, Jul 4, 2024
नित्य शालिग्राम भगवान का सवा लाख अर्चन के साथ 111 ब्राह्मण आचार्यों कर रहें श्रीमद्भागवत का मूल पारायण पाठ
श्रीमद्भागवत कथा ही उत्तम साधन है:वासुदेवाचार्य
अयोध्या। अयोध्याधाम स्थित श्रीसंतगोपाल मंडपम् में भगवान श्रीरंगराघव के प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव उपलक्ष्य पर नित्य शालिग्राम भगवान का सवा लाख अर्चन व 111 ब्राह्मण आचार्यों द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पारायण हो रहा है। प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव को कांचीमठ प्रतिवाद भयंकर मूलगादी के स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज अपना सानिध्य प्रदान कर रहे हैं। महोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हुए राष्ट्रीय कथाव्यास कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगदुरू रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने कहा कि राजेंद्र परीक्षित जैसे उत्तम श्रोता के लिए स्वयं सुखदेव महाराज सभा में उपस्थित होकर उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। यह वही कथा है, जिसका श्रवण कर राजेंद्र परीक्षित का उद्धार हुआ था। कथा का विस्तार करते हुए महाराजश्री ने भक्त ध्रुव की कथा का श्रवण कराया। ध्रुव के जैसी अनन्य भक्ति साधक के अंदर व्याप्त हो जाए। तो करुणा सिंधु दया सिंधु भगवान अपने भक्त को दर्शन देने एवं दुष्टों के संघार हेतु धर्म की रक्षा के लिए प्रभु इस संसार में आते हैं। 5 वर्ष का अबोध बालक ध्रुव मां सुरुचि से अपमानित होकर वन में गया। देव ऋषि नारद से नवधा भक्ति का ज्ञान प्राप्त कर मंत्र दीक्षा ली और तपस्या करने लगे। ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भक्त ध्रुव को दर्शन देने पृथ्वी पर आते हैं। भगवान का दर्शन पाने के बाद जिस माता ने पिता की गोद में बैठने पर ध्रुव को फटकार लगाई। उठाकर कर महल से बाहर किया था। लौटकर आने पर उसी मां ने भक्त ध्रुव की आरती करके तिलक लगाकर राज्य सिंहासन पर बिठाया। भगवान श्रीहरि का सामीप्य पाकर साधक संसार के सभी सुख को प्राप्त कर लेता है। इस घोर कलयुग में मुक्ति पाने के लिए श्रीमद्भागवत कथा ही उत्तम साधन है। इससे पहले नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् के जगदुरु रामानुजाचार्य स्वामी कूरेशाचार्य महाराज व कार्यक्रम के मुख्य यजमान उघोगपति आईपी सिंह ने व्यासपीठ की महाआरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरण किया गया। साधु-संत एवं भक्तजनों ने श्रीमद्भागवत कथा का रसास्वादन कर अपना जीवन सार्थक किया।