: सियारामशरण सखी बाबा को संतो ने किया नमन
Sat, Apr 20, 2024
अयोध्या। अयोध्या सिद्ध और भजनानंदी संतो की गढ़ रही है। इसी नगरी में लगभग पांच दशक पहले मां सरयू तट के किनारे सरयू कुंज मंदिर वशिष्ठ कुंड दुराही कुआं के संस्थापक साकेत वासी सिद्ध संत सियारामशरण सखी बाबा की पुण्यतिथि बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। सियारामशरण महाराज सिद्ध संत थे सरयू के तट पर आश्रम बना कर संतो, वृद्धों, असहायों और गौ सेवा निरंतर किया करते थें। उनका कहना था कि मानव जीवन पाना बहुत ही दुर्लभ है और मनुष्य को जब यह जीवन प्राप्त हो जाय तो उसको निरंतर सेवा ही करनी चाहिए सेवा से ही भगवत की प्राप्ति हो सकती है।सरयू कुंज के वर्तमान महंत राममिलन शरण ने बताया कि श्री महाराज जी सेवा के प्रतिमूर्ति थे और पूरे दिन जाड़ा, गर्मी, बरसात निरंतर लोगों की सेवा करते रहते थे। आश्रम में जो भी व्यक्ति आया वह कभी निराश होकर नहीं गय है। कम संसाधनों में सेवा कैसे की जाती है यह उनके जीवन से सीखा जा सकता हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 5 दशक पहले श्री महाराज जी अयोध्या में आये और आश्रम की स्थापना कर सेवा करने लगी तब से आज तक आश्रम में निरंतर सेवा चलती रहती है। श्री महाराज जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। श्री महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए अयोध्या के नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, महंत जयरामदास, महंत गणेशानंद दास, महंत उद्धव शरण,महंत बाल योगी महंत रामदास सहित सैकड़ों संतों महंतों मंदिर परिसर से जुड़े शिष्य परिकर श्री महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित किए। महंत राम मिलन शरण ने सभी महंतों का स्वागत सत्कार किया है।
: आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में रंगभरी बधाई पर जमकर उड़े अबीर गुलाल
Sat, Apr 20, 2024
मिथिली से आई सखियों के गायन और नृत्य की रही धूम, तो अयोध्या के प्रसिद्ध गायकों ने जमकर अपनी कला का जादू बिखेरा
महोत्सव को किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने सानिध्यता और मंदिर के युवा संत अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने अपना संयोजन प्रदान किया
श्रीरामजन्मोत्सव के बाद भी पूरी अयोध्यानगरी उत्सवी रंग में डूबी रही। जहां मठ-मंदिरों में बधाई, सोहर आदि गीत गाकर कलाकारगण महोत्सव में चार-चांद लगा रहे थे। तो वही आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला का उत्सव देखने लायक है। जहां पर मिथिला की सखियां गीत संगीत नृत्य से पूरा महफिल में चार चांद लगा रही है। मौका था लक्ष्मण किला में रंगभरी बधाई का। आचार्य पीठ लक्ष्मण किला में किलाधीश श्री महंत मैथिली रमण शरण की अध्यक्षता में उत्सव की धूम रही। यहां रंगभरी बधाई को भगवान के जन्म के उल्लास की धूम रही। अयोध्या के प्रसिद्ध गायकों में विनोद शरण, एमबी दास, राम नंदन शरण, रामआसरे दास आदि ने जमकर अपनी कला का जादू बिखेरा। इस अवसर पर मिथिली से आई सखियों के गायन और नृत्य की धूम रही। हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण सहित दो दर्जन से ज्यादा प्रमुख महंतों की मौजूदगी रही। इस दौरान संतों ने पुष्प वर्षा और गुलाल लगाकर रामजन्म का उल्लास मनाया।कलाकारों ने उत्सव की महफिल सजा दिया। इससे साधु-संत, भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए। मंदिर में श्रीरामजन्मोत्सव का उल्लास छाया रहा। मध्यान्ह प्रभु श्रीराम के जन्म बाद मंदिर में भजन, बधाई एवं सोहर गीत का सिलसिला देररात्रि तक चला। भगवान श्रीराम के प्राकट्य की खुशी में प्रसाद वितरण हुआ। पूरा मंदिर प्रांगण रंग-बिरंगी रोशनी में नहाया रहा, जिससे अनुपम छटा निखर कर सामने आ रही थी। चारों ओर हर्षोल्लास का वातावरण छाया रहा। भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में साधु-संत से लेकर भक्तगण झूमने को आतुर दिखे। उनकी खुशी का कोई ठिकाना नही था। सभी अपनी सुध-बुध खोकर उत्सवी रंग में डूबकर नाच रहे थे। चहुंओर भक्तिमय वातावरण फैला रहा। महोत्सव को किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने सानिध्यता और मंदिर के युवा संत अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने अपना संयोजन प्रदान किया। आचार्य पीठ में भगवान श्रीराम का प्राकट्योत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। महोत्सव पर भजन, बधाई आदि का कार्यक्रम हुआ। उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया। किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने कहा कि इस बार श्रीरामनवमी पर्व का बड़ा ही महत्व रहा। क्योंकि हमारे आराध्य श्रीरामलला सरकार पांच सौ वर्षों के लंबे संघर्ष बाद भव्य मंदिर में विराजमान हुए। श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा बाद यह श्रीरामजन्मोत्सव का पहला पर्व था, जिसको हम सबने बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक मनाया। इस अवसर पर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए गए।
: राम देश की एकता के प्रतीक हैं: डा रामानंद दास
Wed, Apr 17, 2024
चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान में भगवान रामलला का प्रकटोत्सव, कथा का हुआ विश्राम
विंदुगाद्याचार्य जी ने कहा,भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है
अयोध्या। चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान में चल रही राम कथा के विश्राम दिवस में विंदुगाद्याचार्य महान्त श्रीदेवेन्द्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं। व्यासपीठ से डा रामानंद दास जी ने कहा कि वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं. वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं- ‘पर हित सरिस धरम नहीं भाई राम देश की एकता के प्रतीक हैं। रामानंद दास जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है। जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं. अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं. व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा ? अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे।मानवीय जीवन के सद्गुणों के अंकुरित होने के लिए जिस जल की अपेक्षा है, वह है सत्संग का जल।इस अवसर पर कथा श्रवण के लिए पधारे सभी संतो महंतों अतिथियों का श्री महाराज जी के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास ने स्वागत किया।