: भगवान श्रीराम से स्वार्थ और परमार्थ दोनो की प्राप्ति होती है: राधेश्याम
Wed, Apr 17, 2024
मणि रामदास जी की छावनी में व्यासपीठ से रामकथा की मीमांसा कर रहें प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री
अयाेध्या। रामजन्म महाेत्सव के पावन अवसर पर मणिराम दास छावनी फूलों से सजी है। मंदिर में 51 वैदिक आचार्य नवाह परायण पाठ कर रहे है। मंदिर में व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी कर रहें है।आचार्य राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि श्रीराम के गुणों के द्वारा जगत का मंगल होता है। संसार में किसी धनाढ्य ब्यक्ति से सांसारिक स्वार्थ की,तथा किसी बीतराग संत से परमार्थ की प्राप्ति हो सकती है,किन्तु एक भगवान राम के गुण ही ऐसे हैं,जिन से स्वार्थ और परमार्थ दोनो की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी के 12 ग्रंथों में रामचरित मानस और विनय पत्रिका इन दो ग्रंथो को सर्वोपरि कहा जाता है।इन दोनों में सबसे बड़ा अन्तर यह है कि रामायण में भगवान के गुणों की प्रधानता है। विनय पत्रिका में गोस्वामीजी ने अपने दोषों का वर्णन किया है। किसी ने तुलसीदास से पूछा कि दोषों की माला ही रह गयी है,प्रभु को पहनाने के लिए?उन्होंने जबाब दिया कि,इस संदर्भ में आप भरतजी का वाक्य याद कर लीजिये,जो वे रामजी से कहते हैं “कृपा भलाई रावरी नाथ कीन्ह भल मोर।दूषन भे भूषन सरिस। यानी,महाराज अगर हम अपने गुणों को धारण करें तो वे गुण भी दूषण बन जाते हैं, और आप अगर हमारे दोषों को स्वीकार कर लें, तो आपके पास पहुँच कर ए दूषण भी भूषण हो जाते हैं।व्यासपीठ से कथा की मीमांसा करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि भरत और सुग्रीव किस दृष्टि में एक समान हैं? यह भगवान की कौन सी दृष्टि है?यह आश्चर्य जनक है। तुलसीदास जी चतुर थे,तुरन्त भगवान से बोले महाराज जब आपको खरे और खोटे की परख ही नहीं है,तो मेरी समझ में आ गया कि तुलसीदास जैसा खोटा सिक्का भी यहीं चल सकता है। शास्त्री जी ने कहा कि भगवान ने प्रश्न किया ,क्या तुम यह खोटेपन का ब्यापार बढ़ाना चाहते हो?गोस्वामी जी ने कहा,प्रभु मुझे आपके सुग्रीव के संबंध में ब्यक्त किये गये बिचार से विश्वास हो गया कि अगर छोटे सिक्के का ब्यापार करना हो तो उसे संसार में करने के स्थान पर आपके पास ही करना श्रेयस्कर होगा।क्योंकि संसार के लोग उसे बाजार में इधर उधर चलाते रहेंगे।
: बड़ा भक्त माल के भगवान श्रीराम को सोने का घनुष बाण धारण कराया
Wed, Apr 17, 2024
जयपुर के कारीगरों ने इन आभूषणों को किया तैयार, करीब 500 ग्राम का है घनुष बाण
बड़ा भक्तमाल तपस्या की दृष्टि से अयोध्या का परम वैभवशाली आश्रम है, यहां निरंतर भगवान और उनके भक्तों के साथ गो सेवा का प्रकल्प समृद्ध रहा है: रमेश भाई ओझा
अयोध्या। भगवान रामलला के जन्म महोत्सव के आनंद पूरी अयोध्या मग्न है। चारों तरफ उत्सव का माहौल है। रामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर बड़ा भक्त मंदिर में श्रीमहंत कौशल किशोर दास जी महाराज के सानिध्य व वर्तमान पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास जी महाराज के संयोजन में रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज व सांदीपनि आश्रम गुजरात के प्रख्यात कथावाचक रमेश भाई ओझा जी के हाथों आज भगवान रामलला को सोने से निर्मित भव्य घनुष बाण धारण कराया गया। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर स्वामी महंत अवधेश कुमार दास ने बताया कि जयपुर के कारीगरों ने घनुष बाग को तैयार किया है। उन्होंने कहा कि हमारा इस संसार में कुछ भी नहीं है। सब कुछ उस परमात्मा का दिया हुआ ही है। ये सब तो उन्हीं का दिया हुआ ही उसे समर्पित कर रहे हैं। यह जो हमारा संकल्प और प्रयास है। उसके पीछे भी भगवान सीताराम की ही शक्ति है। बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास ने बताया कि भगवान के सोने का घनुष बाण को मंदिर से जुड़े भक्तों के सहयोग से तैयार कराया गया है। उन्होंने कहा कि शरीर की नश्वरता का आत्म बोध होने के बाद से यह संकल्प था जो कि भक्तों के सहयोग से पूरा होने जा रहा है। प्रख्यात कथावाचक रमेश भाई ओझा ने कहा कि बड़ा भक्तमाल तपस्या की दृष्टि से अयोध्या का परम वैभवशाली आश्रम है। यहां निरंतर भगवान और उनके भक्तों के साथ गो सेवा का प्रकल्प समृद्ध रहा है। रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि बड़ा भक्त माल मंदिर त्याग तपस्या साधना का केन्द्र हमेशा रहा है। पूज्य महाराज श्री की कृपा ऐसी ही बनी रहें। आये हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर के पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास व उनके शिष्य कृष्णा ने किया।
: रामनवमी पर श्रद्धालु रात 11 बजे तक कर सकेंगे रामलला के दर्शन
Tue, Apr 16, 2024
भोर में 3ः30 बजे से देर रात तक शृंगार एवं दर्शन साथ-साथ चलते रहेंगे
19 अप्रैल तक वीआईपी दर्शन एवं आरती पास पर रोक’
12 बजकर 16 मिनट पर करीब 5 मिनट तक श्रीराम का होगा सूर्य अभिषेक
अयोध्या।श्रीरामलला मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रामनवमी पर रात्रि 11 बजे तक दर्शन हो सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि श्रीराम नवमी महोत्सव के दौरान मंगला आरती के पश्चात ब्रह्म मुहूर्त में अति प्रातः 3ः30 बजे से अभिषेक, शृंगार एवं दर्शन साथ-साथ चलते रहेंगे। श्रंगार आरती प्रातः 5ः00 बजे होगी, श्री रामलला का दर्शन एवं सभी पूजा-विधि यथावत साथ-साथ चलती रहेंगी। भगवान को भोग लगाने के लिए समय-समय पर अल्प-काल को पर्दा रहेगा। रात्रि 11ः00 बजे तक दर्शन का क्रम पूर्ववत चलता रहेगा, तत्पश्चात परिस्थिति अनुसार भोग एवं शयन आरती होगी।
तीर्थ क्षेत्र की ओर से बताया गया कि रामनवमी पर शयन आरती के पश्चात मन्दिर निकास मार्ग पर प्रसाद मिलेगा। दर्शनार्थी अपना मोबाइल, जूता, चप्पल, बड़े बैग एवं प्रतिबंधित सामग्री आदि मंदिर से दूर सुरक्षित रखकर आएं। बताया कि दिनांक 16, 17, 18 एवं 19 अप्रैल को सुगम दर्शन पास, वीआईपी दर्शन पास, मंगला आरती पास, श्रंगार आरती पास एवं शयन आरती पास नहीं बनेंगे। सुग्रीव किला के नीचे, बिड़ला धर्मशाला के सामने, श्री रामजन्मभूमि प्रवेश द्वार पर ’श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ द्वारा यात्री सेवा केन्द्र बनाया गया है जिसमें जन-सुविधाएं उपलब्ध हैं। श्री राम जन्मभूमि मन्दिर में संपन्न होने वाले सभी कार्यक्रमों का सजीव प्रसारण अयोध्या नगर निगम क्षेत्र में लगभग 80 से 100 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर दिखाया जाएगा। यह कार्य प्रसार भारती द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किया गया है। इसका सीधा प्रसारण उपलब्ध रहेगा। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि रामनवमी पर भगवान रामलला के ललाट पर सूर्य किरण 12ः16 मिनट के करीब 5 मिनट तक पड़ेगी, इसके लिए महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्था की जा रही है। वैज्ञानिक इस अलौकिक पलों को पूरी भव्यता से प्रदर्शित करने के लिए जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर का बचा हुआ कार्य भी दिसंबर 2024 तक पूरा हो जाएगा।