: रामराज्य स्थापना के संकल्प को लेकर हिंदू धाम में हो रही श्री राम कथा
Sun, Apr 14, 2024
व्यासपीठ से ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास वेदांती महाराज कर रहे रामकथा
रामकथा में भजन गाते श्री राम कथा के संयोजक वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत राघवेश दास वेदांती महाराज
रामराज्य स्थापना को लेकर मैहर, अमरकंटक के बाद 5 जून से हरिद्वार में होगी कथा
अयोध्या। राम नगरी परिक्रमा मार्ग स्थित हिंदूधाम में श्री राम मंदिर निर्माण के पहले 16 वर्षों तक निर्माण में आने वाली बढ़ाओ को दूर करने के लिए ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास वेदांती महाराज ने भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर श्री राम कथा कही और फैसला आने के बाद भारत में रामराज्य की स्थापना के संकल्प को लेकर श्री राम कथा कह रहे है। अयोध्या के बाद मैहर, अमरकंटक और उसके बाद 5 जून से हरिद्वार में कथा होगी। छठवें दिवस की कथा में ब्रह्मर्षि वेदांती जी महाराज ने बताया कि हनुमान जी महाराज ने श्री राम जी की मुदिका माता जानकी को दी और बताया कि मैं प्रभु श्री राम का दूत हूं। प्रभु ने मुझे भेजा है। मुद्रिका की विशेषता बताते हुए श्री महाराज जी ने बताया वह मुद्रिका बोलती थी लेकिन फिर भी माता जानकी का संदेह दूर नहीं हुआ तब उन्होंने कहा कि मैं कैसे विश्वास कर लू, की श्री राम ने तुम्हें लंका में भेजा है पता लगाने के लिए, तब हनुमान जी महाराज ने उस कथा का वर्णन किया जिसको प्रभु श्री राम और मां सीता के अलावा कोई और नहीं जानता था। वह कथा थी इंद्र के बेटे जयंत की जो कौवा का रूप धर कर माता सीता के पैर में चोंच से घाव किया था।
श्री महाराज जी ने बताया कि हनुमान जी महाराज ने श्री राम जी के बताए हुए कई वृतांतों का वर्णन किया जिसको माता सीता के अलावा कोई नहीं जानता था फिर सीता माता का संदेह दूर हुआ। हनुमान जी महाराज ने फल खाने की इच्छा जताई तब माता ने कहा कि पुत्र वाटिका की रक्षा में बहुत बलवान हैं और तुम इतने छोटे से हो कैसे उनका सामना करोगे तब हनुमान जी महाराज ने अपने विकराल रूप को दिखाया उसके उपरांत जब माता जानकी को भरोसा हो गया तब उन्होंने फल खाने की अनुमति दी। श्री महाराज जी ने बताया कि हनुमान जी महाराज जिस पेड़ से फल खाते थे उसको तोड़ देते थे क्योंकि वह प्रभु को पहले भोग लगाते थे फिर वह फल प्रसाद हो जाता था और अगर उसे फल को रक्षास खा लेते तो उनको भी प्रसाद का फल मिल जाता यही कारण है कि वह वृक्षों को तोड़ दिया करते थे। विशाल बंदर को देखकर रखवाले लंकेश के दरबार में पहुंचे वहां से अक्षय कुमार आया हनुमान जी महाराज ने उसका वध कर दिया, श्री महाराज जी ने अक्षय कुमार के वध कि कथा विस्तार और कथा के विश्राम बेला पर आरती उतारी गई,प्रसाद वितरण किया गया। आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत श्री महाराज जी के शिष्य श्री राम कथा के संयोजक वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत राघवेश दास वेदांती महाराज ने किया। कथा में मुख्य रूप से आचार्य सत्येन्द्र दास वेदांती, वरुण दास सहान्तांशु रामजी उपाध्याय, पंडित हिमांशु शास्त्री, राजेश तिवारी, अयोध्या दास सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।
: हनुमान बाग में बह रही श्रीरामकथा की रसधार
Sun, Apr 14, 2024
हनुमान बाग में चल रहे भंडारे में हजारों राम भक्त ग्रहण कर रहें प्रसाद, हनुमान बाग मंदिर में राम जन्मोत्सव की मची है धूम
भंडारे में प्रसाद वितरण करते हनुमान बाग के शिष्य
व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा कर रही मानस चातिका वैदेही सुरभि जी
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव की पूर्व बेला से ही अयोध्याधाम में उत्सव का रंग चटख हो गया है। रामनवमी का मुख्य पर्व 17 अप्रैल को है। इसको लेकर अयोध्यानगरी में चहुंओर श्रीरामकथा, भागवत कथा, बधइया, नवाह पाठ, रामोत्सव उत्सव, समैया, यज्ञ- महायज्ञ आदि धार्मिक कार्यक्रम-अनुष्ठान चल रहा है। इसी प्रकार प्रतिष्ठित पीठ श्री हनुमान बाग वासुदेवघाट में हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वाधान में चल रही अमृतमयी श्रीरामकथा का भक्तगणों को रसास्वादन कराते हुए कथाव्यास सुरभि जी ने नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि राम नाम कलि अभिमत दाता, हित परलोक लोक पितु माता। अर्थात नाम ही एकमात्र सभी साधनों का साधन है। नाम के द्वारा ही सांसारिक वस्तु और परलोक सुख जैसे स्वर्ग, मोक्ष, मुक्ति आदि प्राप्त किया जा सकता है। जब हनुमान जी महाराज को लंका पार जाना था। तब श्रीरामचंद्र ने लंका पार जाने एवं विजय प्राप्त करने के लिए बजरंगबली को श्रीराम जय राम जय जय राम का मंत्र दिया। उस वक्त हनुमान जी ने आश्चर्य चकित होकर प्रभु श्रीराम पूछा कि भगवान यह तो आप ही का नाम है। तो श्रीराम ने कहा- हे हनुमान संसार का परम अमोघ मंत्र एकमात्र यह श्रीराम जय राम जय जय राम ही है। मैं भी इसी को जपता हूं। इसलिए लोग मुझे भगवान कहते हैं। इससे पहले यजमान द्वारा व्यासपीठ की महाआरती उतारी गई। भगवान की मंगलमयी श्रीरामकथा को हनुमान बाग के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज अपनी सानिध्यता प्रदान कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आश्रम में सुबह रामचरित मानस का नवाह पारायण पाठ चल रहा है, जिसका समापन रामनवमी के दिन होगा। मठ में श्रीरामजन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जायेगा। इस अवसर पर मंदिर में विशाल भड़ारा चलाया जा रहा है। इस अवसर साधु-संत समेत काफी संख्या में भक्तगणों ने अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन धन्य बनाया। कथा की अध्यक्षता स्वामी नारायणाचार्य जी कर रहें। कार्यक्रम की व्यवस्था में सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री लगे है।
व्यासपीठ से कथा कहती सुरभि जी
: रामायण श्रीराम नाम से पूरित है : डा रामानंद दास
Sun, Apr 14, 2024
भगवान के जन्मोत्सव पर तो उनके लीलाओं का गुणगान अवश्य ही सुननी चाहिए जिससे जीवन धन्य हो जाए: देवेंद्रप्रसादाचार्य
व्यासपीठ की आरती करते महंत रामभूषण दास कृपालु जी
बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में रामजन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा जिसका दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे
अयोध्या। रामनगरी का ऐतिहासिक मेला चैत्र रामनवमी अपने शबाब पर है। नगरी के मठ मंदिर अपने आराध्य के जन्म महोत्सव का आनंद लेने के लिए तैयार है। मंदिरों में चारों तरह मंगल ध्वनि मे भगवान राम के चरित्र का गुणगान व नवाह्न पारायण पाठ का हो गया। श्रीराम लला के जन्मोत्सव पर चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के राजमहल में बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज के सानिध्य नौ दिवसीय श्रीराम कथा चल रहा है। व्यासपीठ से श्री राम कथा की अमृत वर्षा डा रामानन्द दास जी कर रहें है।
श्रीराम कथा अनादि है, रामायण श्रीराम नाम से पूरित है एतदर्थ इनका नाम रामायण है, जो रामायण है वही श्रीरामचरित मानस है। यह बातें चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा में आयोजित श्रीराम कथा में कथा मर्मज्ञ डा रामानन्द दास ने कही। कथा व्यास ने कहा कि जो श्रद्धा पूर्वक भगवान की कथा सुनता है वह भगवान के लोक का अधिकारी होता है। धर्म का ज्ञान रामायण सुनने से मिलता है। श्रीरामचरित मानस की रचना से पहले गोस्वामी तलसीदास जी ने वंदना प्रकरण में वर्ण शब्द से कथा का शुभारंभ किया।
स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य महाराज ने व्यासपीठ की आरती उतारी और कहां कि प्रभु श्री राम की लीला श्रवण से ही मनुष्य ही नहीं चराचर ब्रह्म में विराजमान सभी लोग मुक्त हो जाते हैं और कथा उनके चित्त को निर्मल कर देती है इसलिए भगवान के जन्मोत्सव पर तो उनके लीलाओं का गुणगान अवश्य ही सभी को कथा में सुननी चाहिए जिससे उसका जीवन धन्य हो जाए।
कथा के संयोजक महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने कहा कि शास्त्र की मर्यादा का पालन करते ना हुए प्रथम पूज्य गणेश सरस्वती की पूजा करते के हुए श्रीराम के चरणों का प्रेम मांगते है। आप में किसी की स्तति करिए पर अपने इष्ट के चरणों का ही अनुराग मांगिए। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में रामजन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है।इस पूरे आयोजन का दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे है। इस मौके पर बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।