: जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है श्रीराम कथा: महंत मिथलेश नन्दनी
Tue, Aug 1, 2023
गोप्रतार घाट स्थित प्रसिद्ध अनादि पंचमुखी महादेव मन्दिर में बह रही त्रिदिवसीय रामकथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। श्रावण पुरुषोत्तम माह के पावन अवसर पर गोप्रतार घाट स्थित प्रसिद्ध अनादि पंचमुखी महादेव मन्दिर के प्रांगण में त्रिदिवसीय रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से रामकथा की मीमांसा करते हुए प्रख्यात कथावाचक साहित्यकार हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने द्धितीय दिवस में कहा कि श्रीराम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। उन्होंने कहा कि रामकथा का आनंद तभी है, जब वक्ता और श्रोता दोनों सुर, लय, ताल मिलाकर कथा का रसपान करें। प्रेम प्रकट हो जाए तो परमात्मा खुद प्रकट हो जाएंगे। प्रेम के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। आचार्य मिथलेश नन्दनी शरण जी ने कहा रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान की लीला, चरित्र व गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है।भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है।
महोत्सव को आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किलाधीश महंत मैथली रमण शरण महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हो रहा। कथा के आयोजक एकता आशीष अग्रवाल, श्वेता अनुराग अग्रवाल एवम उनकी माता ऊषा अग्रवाल ने सभी संतो का पूजन कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया।
: अनादि पंचमुखी महादेव मंदिर पर रामकथा का हुआ भव्य शुभारंभ
Mon, Jul 31, 2023
व्यासपीठ से प्रख्यात साहित्यकार महंत मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज के श्री मुख से हो रही रामकथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। श्रावण पुरुषोत्तम माह के पावन अवसर पर गोप्रतार घाट स्थित प्रसिद्ध अनादि पंचमुखी महादेव मन्दिर के प्रांगण में रविवार से महंत मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज ने तीन दिवसीय राम कथा का प्रारंभ किया। यह कथा आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किलाधीश महंत मैथली रमण शरण महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा। कथा के आयोजक एकता आशीष अग्रवाल, श्वेता अनुराग अग्रवाल एवम उनकी माता ऊषा अग्रवाल ने सभी संतो का पूजन कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया।
: भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है: रामानुजाचार्य
Sun, Jul 30, 2023
अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा
व्यासपीठ से कथा कहते पूज्य रामानुजाचार्य जी
अयोध्या। अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन प्रातः काल 121 कलशों के सरयू जल दूध, दही, सर्वश्री जल पंचामृत फल जूस के द्वारा अशर्फी भवन के आराध्य भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का विशेष अभिषेक किया गया। पुष्पों के द्वारा भव्य श्रंगार अष्टोत्तर शत तुलसी पुष्प अर्चन एवं श्री सुदर्शन लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति मध्यान्ह में संपन्न हुआ। 51ब्राह्मणों द्वारा स्वर श्रीमद् भागवत पाठ का विश्राम हुआ। महाराज श्री ने सभी भू देवों को वस्त्र दक्षिणा भेंट की। व्यास पीठ पर विराजित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज भागवत कथा का विस्तार करते हुए कहते हैं मां भगवती जगतजननी लक्ष्मी स्वरूपा रुकमणी जी के द्वारिका आ जाने पर द्वारिका नगरी की शोभा और बढ़ जाती है। प्रभु श्री कृष्ण द्वारिका में अनेकों लीलाएं करते हैं। भगवान के बचपन का मित्र सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के बार बार कहने पर प्रभु श्री कृष्ण द्वारिकाधीश से मिलने के लिए जाते हैं। सुदामा के आगमन की सूचना पाकर अकारण निधि करुणा वरुणालय द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण नंगे पैरों भागकर द्वार पर आकर बचपन के मित्र सुदामा को अपने हृदय से लगा लेते हैं। रुकमणी आदि सभी पटरानियों को अचंभा होता है कि राजाधिराज द्वारिकाधीश प्रभु इस दिन हीन व्यक्ति को हृदय से लगाए हैं। श्री कृष्ण सुदामा को दिव्य आसन पर बिठाते हैं चरण वंदन करते हैं सुदामा के द्वारा लाए हुए चावल को प्रभु प्रसाद रूप में पाते हैं अपनी जैसी संपत्ति ब्राह्मण सुदामा को प्रभु देते हैं। सुदामा चरित्र से प्रेरणा मिलती है प्रभु चरणों में जब भी जीव जाए सुदामा जी की तरह बिना फल प्राप्ति की इच्छा के जाए दीनबंधु दयासिंधु भगवान शरणागत जीव को अपना लेते है भागवत कथा के रसास्वादन को करके जो जीव भक्ति ज्ञान वैराग्य में होकर परमात्मा के मार्ग को अपना लेते हैं। उन्हें इन 84 लाख योनियों में नहीं भटकना पड़ता। परमपिता परमात्मा अपने चरणो में उन्हें स्थान देते हैं भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है हमें भागवत कथा को सुनकर भक्ति मार्ग को अपनाते हुए परोपकार की भावना से जीवन यापन करना चाहि सभी भक्तजन कथा को सुनकर आनंदित हो रहे।