: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जमीन हड़पने की नीति के विरोध में हनुमानगढ़ी के संत मैदान में
Sat, Sep 23, 2023
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट काे हनुमानगढ़ी के अंगद टीला की जमीन लेने देंगे, करेगा बड़ा आंदोलन, ईंट से ईंट बजा देंगे
अंगद टीला की जमीन हनुमानगढ़ी हरिद्वारी पट्टी की, जहां पर मंदिर में हनुमानजी और अंगद की मूर्ति है विराजमान: महंत मुरली दास
अयोध्या। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के नागा संताें ने शुक्रवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ माेर्चा खाेल दिया है। सभी नागा संताें ने एक स्वर में कहा है कि वह किसी भी कीमत पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट काे हनुमानगढ़ी के अंगद टीला की जमीन लेने देंगे। इसके लिए चाहे उन्हें बड़ा आंदोलन ही क्यों ना करना पड़े? ताे वह करेंगे, ईंट से ईंट बजा देंगे। श्रीनिर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत व हरिद्वारी पट्टी के महंत मुरली दास महाराज ने कहा कि अंगद टीला की जमीन हनुमानगढ़ी हरिद्वारी पट्टी की जमीन हैै। जहां पर मंदिर में हनुमानजी और अंगद की मूर्ति विराजमान है। उस जमीन पर हमसे बहुत पहले मंदिर बना हुआ। तबसे वहां पर हम सब पूजा-पाठ करते हुए चले आ रहे हैं। लेकिन आज मंदिर की छवि काे समाप्त करने का कुचक्र रचा जा रहा है। हम हरिद्वारी पट्टी के महंत हैं। तबसे अंगद टीला की जमीन काे नजूल में दर्शाया जा रहा है। । इससे पहले महंत नारायण दास, महंत गाेकुल दास, महंत रामनेवाज दास, महंत जयकरन दास हरिद्वारी पट्टी के महंत थे। तब यह जमीन नजूल नही थी। उन्हाेंने आराेप लगाते हुए कहा कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ऐसा कुचक्र रचकर इस जमीन काे लेने की काेशिश कर रहा है, जिससे वह यहां पर हाेटल बनाकर ज्यादा रूपया कमा सके। महंत ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारी जमीन सुरक्षित रहे। सड़क चाैड़ीकरण में जिन साधुओं व व्यापारियों का मंदिर, मकान, दुकान गया है। उनकाे हम यहां पर बसाने का काम करेंगे। वहीं धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के कृपापात्र उत्तराधिकारी एवं संकटमोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास ने कहा कि हनुमानगढ़ी पंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़ा पट्टी हरिद्वारी महंत मुरली दास महाराज के नाम से यह अंगद टीला की जमीन है। जाे श्रीरामजन्मभूमि व श्रीराम हॉस्पिटल के बीचाे-बीच है, जिसमें 1320 से यह जमीन फसली है। उस समय रामनारायण दास हरिद्वारी पट्टी के महंत थे। यह जमीन नजूल में नही थी। उसके बाद 1330 में गाेकुल दास आए। तब भी यह नजूल में नही रही। फिर 1335 में जयकरन दास महंत हुए। उस दाैरान भी यह नजूल में नही था। खेवटदार उस समय महंत जयकरन दास थे। फिर 1359 में रामनेवाज दास हुए। उस समय भी जमीन नजूल में नही रही। उसके बाद महंत मुरली दास हुए। उन्होंने कहा कि प्रशासन या श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कुचक्र रचकर इस जमीन काे नजूल में दर्शा दिया। ताकि भविष्य में यह जमीन लेने के लिए यह ठीक रहे। हम लाेगाें का मुकदमा रेवेंयू एवं सदर मुंसफ के यहां चल रहा है। ऐसी स्थिति में इस जमीन पर काेई निर्माण या अन्य कार्य नही हाेना चाहिए। संजय दास ने आराेप लगाते हुए कहा कि कल यहां पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गेट खाेलने का प्रयास किया, जिसकाे हम लाेगाें ने कामयाब नही हाेने दिया। उस जगह पर आज भी ताला लगा हुआ और खुदाई भी कर रहे हैं। इस जमीन के लिए हमें जाे भी आंदोलन करना पड़ेगा। वह हम करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही ऐसा करवा रहा है। ट्रस्ट इस तरह का कार्य करे ताे अच्छा नही है। दूसरे की जमीन हड़पे मैरिज लॉन या हाेटल बनाने के लिए ताे यह गलत बात है। इस जमीन का मुकदमा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से चल रहा है। शासन-प्रशासन काे भी इसमें इंवाल्व किया है। हमारी जमीनाें काे लेने का किसी काे काेई अधिकार नही है। अगर ट्रस्ट ले रहा है ताे इसके गंभीर परिणाम हाेंगे। चाहे इसके लिए ईंट से ईंट ही क्याें ना बजाना पड़े। इस अवसर पर श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा के समस्त नागातीत माैजूद रहे।
: रामानंद सम्प्रदाय की ध्वाजा देशभर में फहराई
Thu, Sep 21, 2023
संत,धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को देगे श्रद्धांजलि, स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी होगी चर्चा
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो अपना संपूर्ण जीवन भगवत भजन में ही समर्पित कर दिया उन संतों में एक के परम पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज। हरिधाम गोपाल पीठ स्वामीजी की तपोस्थली आज भी अपने वैभव को समेटे हुए आध्यात्मिकता को चार चांद लगा रहा है। रामनगरी का आध्यात्मिक जगत जिन आचार्यों से आलोकित है उनमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज एक है। विशिष्टताद्वौत के साथ-साथ श्री हनुमत उपासना का अद्भुत संयोग उनके व्यक्तित्व का आभूषण था। उन्होंने जगद्गुरु के रूप में देश में दशकों तक रामानंद संप्रदाय की ध्वजा फहराई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी को शुक्रवार को उनकी 16वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। श्री हरिधाम गोपालपीठ मंदिर स्थित उनकी तपोस्थली पर पुण्यतिथि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संत- धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को अपनी श्रद्धांजलि देगें। इस अवसर पर स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी चर्चा होगी।
सिद्धार्थनगर जिले में मघा नक्षत्र में जन्मे बालक हरिनाथ त्रिपाठी किशोरावस्था में अयोध्याजी आ गये। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत रामबालक दास जी महाराज के शिष्य के रूप में वेद, वेदांत एवं व्याकरण में विशिष्टता हासिल की। कर्मकांड, ज्योतिष, वाल्मीकि रामायण, गीता व गोस्वामी तुलसीदास के द्वादश ग्रंथों का वे अध्यापन भी शिक्षार्थियों को कराते रहे।उन्होंने अयोध्या के कई संस्कृत विद्यालयों में प्राचार्य पद को सुशोभित किया। भगवान सीताराम जी की आराधना व हनुमान जी की सेवा उनके चिंतन में सदैव रची-बसी रही। स्वामी हर्याचार्य जी को सन् 1989 के प्रयाग कुंभ में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विभूषित किया गया।
महाराज श्री ने हनुमत कवच व ब्रह्मासूत्र, गीता भक्ति दर्शन का 12वां अध्याय, वेदों में अवतार रहस्य, श्री संप्रदाय दर्शन तथा श्रीरामचरित मानस में वैदिकत्व सहित दो दर्जन पुस्तकों की रचना कर हिंदू धर्म-संस्कृति को समृद्ध किया। सन् 2008 में भाद्र शुक्ल सप्तमी उनका साकेतवास हुआ। उनके उत्तराधिकारी रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते हैं कि महाराज श्री नारियल सदृश थे। यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी। महाराज के सिद्धांतों का अनुसरण करते जीवन जाय, यही प्रार्थना श्री हनुमान जी से अनवरत होती रहती है।
: गुरु सेवा के नायक महंत संजय दास का जन्म दिन मना सेवा दिवस के रुप में
Thu, Sep 21, 2023
संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मनाया सेवा दिवस,अंध विद्यालय, वृद्धा आश्रम, कुष्ठ आश्रम में फल अन्न व वस्त्र किया गया वितरण
महंत संजय बाबा का जन्म दिवस का उद्देश्य गरीबों असहायों व दीन दुखियों के सेवा से जुड़ा रहा: पुजारी हेमंत दास
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्ताराधिकारी संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास के जन्मदिन को संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास जी ने विशाल सेवा दिवस के रुप में मनाया। इस सेवा दिवस के मूल में गरीबों असहायों व दीन दुखियों के सेवा से जुड़ा रहा। जिसमें सबसे पहले हनुमानगढ़ी पर विशेष पूजा अर्चना किया गया और हनुमत यज्ञशाला के हवन कुंड में आहुतियां डाली गई। इसके बाद कनक बिहारी सरकार का पूजन हुआ। इसके बाद श्रीराम अस्पताल में भर्ती मरीजों को फल वितरण किया और उनका हालचाल जाना,वृद्धा आश्रम पहुंचकर वृद्ध महिलाओं को फल वितरण किया गया और विकलांग अंध विद्यालय में विकलांगों की सेवा की गई। सेवा दिवस में अनवरत चल रहे श्री ज्ञान अन्नक्षेत्र को और भी भव्य वृहद रुप से आज संचालित किया गया। इसके बाद बाकायदा भगवताचार्य स्मारक सदन में गोष्ठी व विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया गया।जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संतों ने महंत संजयदास को आशीर्वाद दिया।
सेवा दिवस के प्रणिता गुरु सेवा के नायक आदर्श संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि सनातन धर्म का मूल मंत्र सेवा है। यही हम अपने परम पूज्य गुरुदेव महंत ज्ञान दास जी महाराज से सीखे है। आज हम जो भी कुछ है वो पूज्य गुरुदेव भगवान के कृपा से है। इसलिए आज अपने जन्म दिवस पर हम सभी लोग सेवा दिवस के रुप में मना रहें है।निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्री महंत मुरली दास ने कहा संकट मोचन सेना का मुख्य उद्देश्य सेवा है। महंत संजय दास बहुत बधाई के पात्र है आज समाज में सेवा प्रकल्प की वजह से लोगो के दिलो में संजय दास ने जगह बनाया है। रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि संजय दास नये साधुओं के लिए एक मिशाल है। रामानंद सम्प्रदाय में सेवा ही परिचय है। बड़ा भक्त माल के महंत अवधेश दास महाराज महंत संजय दास को बधाई देने पहुंचे। बधाई देते हुए महंत अवधेश दास ने कहा सनातन धर्म की ध्वज पताका फहराने में हनुमानगढ़ी के संतो का विशेष योगदान रहा है। आज इसका नेतृत्व महंत संजयदास जी कर रहें है। महंत संजयदास जी की गुरु सेवा बहुत ही अनुकरणीय है। आज के साधु संत इनसे सीखे कि कैसे अपने गुरु की सेवा करनी चाहिए। आज हम सभी इस सेवा दिवस के शामिल होकर लोगों की सेवा कर रहें है।
गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास ने कहा संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास महाराज निरंतर उत्तरोत्तर अयोध्या में सेवा का कार्य करते रहे है। इनका जन्मोत्सव सेवा महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है वह बहुत ही सराहनीय है और मैं आशा करता हूं की निरंतर यह सेवा का कार्य अयोध्या की धरती से पूरे भारत में चलता रहेगा।संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने कहा मैं हनुमान जी से निवेदन करता हूं दिन प्रतिदिन पूज्य महंत संजय बाबा जी के ऊर्जा और उत्साह में संवर्धन करते रहें जिससे निरंतर समाज में सेवा का कार्य चलता रहे। हम सभी का संजय बाबा सदैव मार्गदर्शन ऐसे ही करते रहें जिससे लोगों की सेवा ऐसे रोती रहें। इस मौके पर इस मौके पर जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, महंत जनार्दन दास, महंत हरिभजन दास, महंत मनीष दास, कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र करण भूषण शरण सिंह,महंत रामदास, महंत छविराम दास, महंत अजीत दास, महंत सत्यदेव दास, प्रेम मूर्ति कृष्णकांत दास,अंकित दास, शिवम जी, कल्लू जी, अभिषेक दास, विराट दास, अभय दास, संगीतज्ञ राजूजी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।