: श्रीमद भगवत कथा तो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है: वेदांतीजी
Fri, Mar 3, 2023
व्यास पीठ से पुतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को वशिष्ठ पीठाधीश्वर जी ने श्रवण कराया
जहाँ धर्म न हो, संस्कार न हो, अपनी परम्पराओं का निर्वाहन न हो वहां नस्ल ख़राब हो जाती है: ब्रह्मर्षि राम विलास वेदांती महाराज
अयोध्या। रामनगरी के पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित हिंदू धाम में चल रहें श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव धूमधाम से समापन हुआ। श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर वशिष्ठ पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि राम विलास वेदांती महाराज ने पुतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। विश्राम दिवस पर महाराज श्री ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की सुंदर कथा श्रोताओं को श्रवण कराई।
वेदांती जी ने व्यासपीठ से कहा कि कथा आपको सम्पूर्ण भागवत कथा का फल देती है। ये हमारे करोड़ो जन्मो का पुण्य ही है की हमे श्रीमद भागवत कथा सुनने का अवसर प्राप्त हुआ है। क्यूंकि आप बस मानव जीवन को प्राप्त करके ही श्रीमद भगवत कथा का श्रवण कर सकतें है। श्रीमद भगवत कथा का ये ग्रन्थ तो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि जिस जीव के दिल में इच्छा होती है की वो ईश्वर के बारे में जाने वो इस श्रीमद भगवतकथा के माध्यम से ईश्वर के बारे में जान पाता है। जो व्यक्ति सिर्फ माया के पीछे भागता है वो व्यक्ति उस कुंए के मेंढक की तरह है जिसने कभी उस कुए के बाहर की दुनिया देखी ही नहीं। व्यास जी ने कहा कि वो कथा को सिर्फ एक कहानी की तरह सुनता है या फिर जब तक उसको सुनने का मन करता है तब तक कथा पंडाल में रहता है उसके बाद निकल जाता है। लेकिन वेद व्यास जी ने खुद भागवत कथा में लिखा है की अगर सातो दिन तक पूरी निष्ठा और ध्यान से आप श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करते है तो वो आपको मोक्ष की प्राप्ति कराती है। महाराज श्री ने बताया की जिस धरती पर पानी की कमी हो वहां की फसल ख़राब हो जाती है और जहाँ धर्म न हो जहाँ संस्कार न हो, जहां अपनी परम्पराओं का निर्वाहन न हो वहां नस्ल ख़राब हो जाती है। भगवान ने जो हमे ये साँसे दी है वो किसी का बुरा करने के लिए नहीं किसी को बुरा कहने के लिए नहीं, अपनी ज़िन्दगी को यूँ ही व्यर्थ करने के लिए बल्कि ये साँसे भगवान का नामजाप करने और भगवान की भक्ति के लिए दी है। ये सांस बहुत अनमोल है इन्हे आपको कोई उधार नहीं देगा इसलिए इन्हे व्यर्थ ना जाने दे। वेदांती जी ने कहा कि भक्ति करने की कोई उम्र नहीं होती जिस समय आपका जन्म हुआ था उससे पहले आपकी मृत्यु तय है किस जगह आपकी मौत होगी। यह दिव्य महोत्सव का संयोजन व आये हुए अतिथियों का स्वागत श्री महाराज जी के शिष्य वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत डॉ राघवेश दास वेदान्ती महाराज ने किया। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमान रामकिशोर पाण्डेय,अविनाश किशोर पाण्डेय,श्रीमती अनामिका, धीरेंद्र पाण्डेय,श्रीमती किरण महेश शुक्ला, राजेंद्र प्रसाद शुक्ला,ताराशंकर पाण्डेय, भोलानाथ पाण्डेय, रामानुज,श्रीमती आरती पाण्डेय,चतुर्गुण पाण्डेय,साधू चरण पाण्डेय, भीम सिंह, बसंत पाण्डेय,मुकेश कुमार, लालजीत पाण्डेय,टाण्डा से श्यामबाबू गुप्ता, अशोक पाण्डेय, बहराइच से दिलीप बाबा,अशोक पण्डा ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा में मुख्य रूप से सुरेंद्र सिंह विहिप,अमित दुबे, करुणेश मणि त्रिपाठी, संघ कार्यालय व्यवस्थापक प्रमुख कृष्णचन्द्र जी, महंत रामसेवक दास जी, जय पुरिया मंदिर के श्री महंत जी, राज चौबे आदि लोग विशेष रूप से उपस्थित रहे।
: श्रीमद्भागवत भव तारक-उद्धारक ग्रन्थ: जगद्गुरू
Fri, Mar 3, 2023
रामानुजाचार्य जी ने कहा, यह जीवन ज्ञानार्जन, धनार्जन और पुण्यार्जन के लिए है।
अयोध्या। श्रीमद्भागवत भव तारक-उद्धारक ग्रन्थ है। किसी के साथ छल न करें, और आत्म छल भी न करें। अतः अपने आध्यात्मिक लक्ष्यों के प्रति जागरूक और सचेत रहें। उक्त बातें जगद्गुरू रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने सरायराशी पूराबाजार में आयोजित भागवत कथा के तृतीय दिवस में कही। उन्होंने कहा कि जो विचारशील नही है, जिसके पास सद्संकल्प नही है वह बड़ा दु:खी है, इसलिए सत्संग की महत्ता हमारी वैचारिक पवित्रता के लिए भी है। कथा श्रवण के बाद पवित्र अंतःकरण की निर्मिती होती है। उसके बाद आपमें पूर्णता आती है। जगद्गुरू जी ने कहा कि आप जो भी करेगे वो बहुत अच्छा और कलात्मक ढंग से करेंगे। आप मंत्र और मूल्य बन जायेंगे। समाज के लिए बड़े उदाहरण बन जायेंगे। भागवत आपको बल देगी कि आप बड़े और महनीय बन जायें। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि यह जीवन ज्ञानार्जन, धनार्जन और पुण्यार्जन के लिए है। धनार्जन के पूर्व ज्ञानार्जन आवश्यक है, क्योंकि ज्ञान से जीवन जीने की कला सीखी जा सकती है। यदि हमें भोगना या उपयोग करना ही नही आता तो अर्थ अथवा अन्य भौतिकीय साधन बड़ी समस्या बन जायेंगे। महाराज मनु की संतानों की कथा सुनाते हुए स्वामी जी ने कहा कि हमें नीति और नियमों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। आपके जप और साधन कभी न छूटे। उन्होंने कहा कि उत्तानपाद का आशय मन की दुर्बलता से है। जीवन में जब नीतियों का स्थान रुचियाँ ले लेती हैं तो व्यक्ति उत्तानपाद हो जाता है। सुनीति और सुरुचि का उद्धरण देते परिवार की उपादेयता भी प्रतिपादित की। स्वामीजी ने कहा कि भारत का अर्थ होता है -भा माने ज्ञान और प्रकाश ।जो ज्ञान रत है, प्रकाश रत है वही 'भारत है।तात्पर्य यह कि जहां के लोग ज्ञान और प्रकाश ,सत्य और धर्म में लगे रहते है उसी देश को भारत कहते हैं।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कथा यजमान रामजीत सिंह आयोजक चंद्रभूषण सिंह,ज़िला पंचायत अध्यक्ष आलोक कुमार रोहित,पूर्व ज़िला पंचायत सदस्य अंकुर सिंह ने किया।
: भगवान से बढ़ कर कोई और सुख और संपदा नहीं: आचार्य धरणीधर
Wed, Mar 1, 2023
अयोध्या। बेनीगंज फेस तीन अयोध्या में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण के द्वितीय दिवस कथा में अमरकथा और शुकदेवजी के जन्म का वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा प्रवक्ता आचार्य धरणीधर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप सब पर ठाकुरजी की कृपा है। जिसकी वजह से आप आज कथा का आनंद ले रहे है। कथा सुनने का अवसर गोविंद प्रदान करते हैं।कथा में यह भी बताया कि अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए, कुछ सीखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं, तो ये भागवत कथा जरूर आपको कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देगी। मनुष्य का जीवन सांसारिक भोग में नहीं कृष्णभक्ति में बिताएं। मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। आचार्य जी ने कहा कि उसका सारा ध्यान संसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शाश्वत है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है।उन्होंने कहा कि भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण करती है। भगवत कथा के समय स्वयं श्रीकृष्ण आपसे मिलने आए हैं। जो भी इस भागवत के तट पर आकर विराजमान हो जाता है, भागवत उसका सदैव कल्याण करती है। उन्होंने कहा कि बिना जाति और बिना मजहब देखे इनसे आप जो मांगे यह आपको वो मनवांछित फल देती है और अगर कोई कुछ न मांगे तो उसे मोक्ष पर्यंत तक की यात्रा कराती है। मुख्य यजमान हरीराम पाण्डेय, अयोध्या प्रसाद पाण्डेय,हरी प्रसाद पाण्डेय, शिवकुमार सिंह,डा.दिलीप सिंह, राम जग पाठक, संदीप खरे, जग्गू राम, अजीत सिंह, पतिराम वर्मा, शैलेन्द्र पाण्डेय, आचार्य सचिदानंद मिश्र, आचार्य अनिरूद्ध शुक्ल, युवा भाजपा नेता अटल तिवारी, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।