: संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे रसिकाचार्य सीताराम शरण जी
Tue, Feb 28, 2023
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के पूर्वाचार्य की 25वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी में शिद्दत से शिरोधार्य हुए
अयोध्या। रामनगरी के आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला के पूर्वाचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 25वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनायी गई। तिथि पर लक्ष्मणकिला में आचार्य श्री को वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संतो ने नमन करते हुए कहा कि आचार्य श्री संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे। भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में अनेकों संत और साधक हुए हैं जिनकी गणना उच्च कोटि के साधकों मे होती है। इन्हीं सिद्ध साधकों में रसिकोपासना के विशिष्ट आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की गणना होती है। महंत सीताराम शरण लक्ष्मण किला के महंत बने और उसका वैभव हमेशा बढ़ाया और कथा व्यास के रूप में अपनी अमिट छाप समाज में छोड़ी। उनके अनन्य भक्तों में देश के कोने कोने से विद्वान नौकरशाह और राजनीतिक लोग जुड़े हुए थे। श्री महाराज जी हमेशा श्री सीताराम नाम जप और सेवा में विश्वास रखते थे। वह हमेशा लक्ष्मण किला में सेवा का संचालन करते रहते थे। लक्ष्मण किला इतना वैभवशाली मंदिर है कि यहां से जो भी व्यक्ति आता हुआ खाली हाथ नहीं जाता था गौ सेवा संत सेवा तो महाराज जी किस साधना का एक अंश था। महाराज जी की कथा पूरे देश में लाखों लाख श्रोता थे जो महाराज जी को अनन्य प्रेम करते थे। स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 25 पुण्यतिथि हर्षोल्लास के साथ 1 सप्ताह से लक्ष्मण किला धीश महंत मैथिली रमण शरण के संयोजन में मनाया जा रहा था जिसका आज वृहद भंडारे के साथ समापन हो गया। वर्तमान महंत मैथिली रमण शरण जी महाराज ने बताया कि 1 सप्ताह से गुरु महाराज की पुण्यतिथि मंदिर में मनाई जा रही थी जिसमें आचार्य श्री द्धारा रचित ग्रन्थों नाम महिमा व धाम महिमा सहित कई ग्रन्थों का सस्वर पाठ किया गया। पुण्यतिथि समारोह का समापन में रामनगरी के संत धर्माचार्य ने आचार्य श्री को नमन किया इसके बाद वृहद भंडारे के साथ संतो का परम्परागत तरीक़े किलाधीश महंत मैथलीरमण शरण व महंत मिथलेश नन्दनी शरण ने किया व देखरेख में युवा संत सूर्य प्रकाश शरण सहित लक्ष्मणकिला के शिष्य परिकर लगे रहें। इस अवसर पर श्रीरामबल्भाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास,महंत रामकुमार दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य,तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालुजी, महंत अवधकिशोर शरण, महंत अर्जुन दास, पुजारी रमेश दास, महंत गिरीश पति त्रिपाठी, रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपतराय, अनिल मिश्रा, संजय शुक्ला भाजपा नेता, ऋषिकेश उपाध्याय, डा अवधेश वर्मा भाजपा नेता, आलोक मिश्रा,धनश्याम दास सहित सौकड़ों संत साधक व मंदिर के शिष्य मौजूद रहे।
: क्षुद्र-स्वार्थ और व्यक्तिगत सुख वाले कभी महापुरूष नहीं बन सकते: रामानुजाचार्य
Tue, Feb 28, 2023
जानकीमहल ट्रस्ट में चल रहे श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा का हुआ समापन
अयोध्या। वाल्मीकि राम को महापुरुष कहकर नमन करते हैं।सच कहूँ तो महापुरूष ही नमन के योग्य है।महापुरूष वो है जिसके आगे सिर स्वत:झुक जाता है।आज तो स्वार्थ के लिये हर कोई हर किसी के आगे झुकने को तैयार है। पर नमस्कार की सार्थकता तो महापुरूष के ही चरणों में झुकने में हैं।कोई महापुरूष बनता कैसे है?जीवन में महत्ता आती कैसे है?ये विचारणीय है ताकि उसे जानकर प्रेरणा ली जा सके। उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी जानकीमहल ट्रस्ट में चल रहे श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के समापन सत्र में कही।उन्होंने कहा कि क्षुद्र-स्वार्थ और व्यक्तिगत सुख के लिये जीने वाले कभी महापुरूष नहीं बन सकते।उसके लिये समस्त सुख-सुविधाओं का त्याग करके घर से बाहर निकलना पड़ता है।कुश-कंटकों पर चलते हुये सर्दी, गर्मी और बरसात को सहते हुये महान् लक्ष्य की ओर अग्रसारित होते रहना पड़ता है।घर में पलंग पर लेटकर ख़्वाब गढ़ने वाले कोई बड़ी क्रान्ति नहीं करते जब तक संघर्ष की आग में तपने के लिये बाहर न निकलें। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि श्रीराम महापुरूष इसीलिये कहे गये क्योंकि समस्त अवतारों में सर्वाधिक दुख उन्होनें ही उठाये हैं।दूसरे की पीड़ा के दंश को वही समझ सकता है जो दुख की आग में स्वयं झुलसा हो।और इसका परिणाम यह हुआ कि श्रीराम सर्वाधिक सुख देने वाले भी हुये।श्रीराम के जीवन की दो बातें जो विशेष उल्लेखनीय है और हमारे लिये सबसे अधिक प्रेरक है।पहली बात तो यह कि बड़ी से बड़ी विपत्ति से वो घबराये नहीं,कभी हिम्मत नहीं हारे।ईश्वर होते हुये भी एक मनुष्य की नियति की समस्त बिडम्बनाओं का मुक़ाबला मनुष्योचित तरीक़े से अपने पौरूष-पराक्रम और बल-विक्रम से करके दिखाये।उन्होनें कभी ऊँचाई पर रहने देवताओं से कभी कोई सहायता नहीं माँगी।दूसरी बात यह कि उन्होनें ने कभी किसी को छोटा और बड़ा नहीं समझा।अपने आदर्शों की पूर्ति के लिये सबको अपनाया।अपने प्रेममय विनीत आचरण से वन में रहनेवालों को अपना बनाकर इतना निर्भय बना दिया कि वे अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध खड़े हो गये।श्रीराम अकेले रावण को मारते तो लोगों के हृदय में बैठा भय रूपी रावण कभी न मरता, उन्होनें लोगों में इतना विश्वास जगाया कि पशु पक्षी तक रावण से युद्ध के लिये तैयार हो गये।फलत: समाज से बुराई का अन्त हुआ, लोग मानवता के सहयोग के लिये सतत तैयार रहने लगे।
: राष्ट्रीय फलक पर शिरोधार्य हुए थे पूज्य किलाधीश जी महाराज
Mon, Feb 27, 2023
25 पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर स्मृति पर्व में आचार्य स्वामी श्री सीताराम शरण जी महाराज लक्ष्मणकिलाधीश जी की पुस्तक का हुआ विमोचन
गीता तात्पर्य, श्री वैषणव दर्शन, श्री सीतातत्व मीमांसा का किलाधीश महंत मैथली रमण शरण की अध्यक्षता में हुआ विमोचन
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भंजनानंदी संत हुए हैं। उन्हीं संतो में एक थे रसिकोपासना के आचार्य परमपूज्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज। जिनकी 25वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में मनाया जा रहा है। पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर स्मृतिपर्व के रुप में पूज्य किलाधीश जी की रचनाओं से सराबोर पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया।
रसोपासना के आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज ग्राम्यांचल की भक्ति धारा से लेकर विश्वविद्यालयीय विचार और आलोचना तक आपकी वाणी ने अपना जादू बिखेरा। एक प्रसंग के अनुसार दक्षिण के वयोवृद्ध विद्वान ने अयोध्या की पहचान की कहा कि स्वामी सीताराम शरण जी वाली अयोध्या स्वाध्याय प्रवचन की वाचिक परम्परा के साथ ही टीका व्याख्या और पद रचना के साथ ही पूर्वाचार्यों के साहित्य का सम्पादन-प्रकाशन भी स्वामी सीताराम शरण जी महाराज का उल्लेखनीय अवदान रहा। चार दशक तक पीठ का सक्रिय आचार्यत्व निभाकर सन 1997 के वसन्त ऋतु में आचार्य श्री का साकेतवास हो गया।
आचार्य श्री की पुण्यतिथि समारोह मंगलवार को मनाया जाएगा किलाधीश जी का वैभव पूरे फलक पर रहेगा।
कार्यक्रम में जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य,हनुमत निवास के महंत अवधकिशोर शरण, मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत अर्जुन दास, डा सुनीता शास्त्री, भागवताचार्य तुलसीदास, महंत गिरीश पति त्रिपाठी, डा जनार्दन उपाध्याय, कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह सहित तमाम विशिष्ट विद्धानों ने अपने अपने विचार रखें।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथली रमण शरण जी कहते है पूज्य गुरुदेव द्धारा रचित ग्रन्थ नाम, महिमा, धाम, महिमा हमारी अमूल्य धरोहर है। जिसका स्वाध्याय निरंतर करते रहते है। पुण्यतिथि के अवसर पर नाम,रुप,लीला व धाम सहित तमाम ग्रन्थों का सस्वर पारायण पाठ किया जा गया। मंगलवार पूज्य गुरुदेव का स्मरण पूरे फलक पर रहेगा।
महंत मैथली रमण शरण ने कहा कि तप, स्वाध्याय और शरणागति की विलक्षण स्थितियों का अनुभव करने वाले पूर्वाचार्यों ने शास्त्रों का मथितार्थ कृपापूर्वक सुलभ कराया है। अपने आश्रितवात्सल्य का मान रखते हुये श्रीकिशोरी जू सबको स्वीकार करके प्रभु के सम्मुख कर देती हैं। वेदोपनिषदादि में व्याप्त श्रीजी के लोकोत्तर वैभव का इस पुस्तक में पूज्यचरण गुरुदेव ने सुन्दर निदर्शन कराया है। मधुरोपासक श्रीवैष्णवों के लिये यह नित्य अनुसन्धेय सामग्री है। रसिक जन इसका आस्वादन करके आनन्दित होंगे ऐसा विश्वास है।
स्मृति पर्व कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए पुस्तक के सम्पादक प्रख्यात साहित्यिक महंत मिथलेश नन्दनी शरण हनुमत निवास कहते है कि पूज्य किलाधीश महाराज का गायन अद्वितीय रहा उनकी कथा
विश्वविद्यालयों से लेकर खेती किसानी करने वालों के लिए रही जो अपने आप में अद्भुत है।
श्रीसम्प्रदाय अपने नाम के अनुरूप ही श्रीतत्त्व को उपास्य और अनुसन्धेय मानता है। कुछ दार्शनिक भेदों और वैचारिक आयामों में श्रीतत्त्व को जीवतत्त्व का प्रतिनिधि भी माना गया है। किन्तु, श्रीरामानन्दीय उपासना पद्धति श्रीजी को परात्पर ब्रह्म के रूप में प्रतिपादित करती है। श्रीरामानन्दीय रसिकोपासना के आचार्यपीठ का गौरव बढ़ाने वाले श्रीलक्ष्मणकिलाधीश पूज्य आचार्य स्वामी सीतारामशरणजी महाराज ने सीतातत्त्व मीमांसा का प्रणयन करते हुए श्रीविदेहराजकिशोरी, श्रीरामवल्लभा भगवती श्रीजानकीजी की परता का विलक्षण निदर्शन कराया है। आये हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर के युवा संत सूर्य प्रकाश शरण व महंत छोटू शरण ने किया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में डा परेश पाण्डेय, महंत लड्डू दास, रामानन्द दास, डा बाकेमणि त्रिपाठी, अनुज दास, कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में किला से जुड़े संत साधक मौजूद रहें।