: बाहुबली को पटकनी दे बाबा मनीराम बने यूपी केसरी
Wed, Feb 22, 2023
पहलवान बाबा मनीराम दास मल्लविद्या में अपने पहलवानी दावपेंच के बलबूते न सिर्फ पूरे उत्तर प्रदेश में हनुमानगढ़ी का डंका पीटा है बल्कि आज के युवाओं के आईकॉन भी हो गये
अयोध्या। रामनगरी की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी जो मल्लविद्या का केंद्र भी है। इसी हनुमानगढ़ी से एक से एक बेजोड़ पहलवान निकले जो देश में ही नही पूरे विश्व में अपनी एक अलग अमिट छाप छोड़ी है जिसका आजतक कोई सानी नही हुआ। इन्हीं के नाम को रोशन करते हुए आज पहलवान बाबा मनीराम दास मल्लविद्या में अपने पहलवानी दावपेंच के बलबूते न सिर्फ पूरे उत्तर प्रदेश में हनुमानगढ़ी का डंका पीटा है बल्कि आज के युवाओं के आईकॉन भी हो गये है।
अभी ग्राम पंचायत टिकरी के काली मंदिर प्रांगण में राकेश सिंह टिकरी की और से आयोजित दो दिवसीय दंगल प्रतियोगिता टिकरी गांव में फाइनल मुकाबले का समापन में अयोध्या के बाबा मनीराम दास ने बाहुबली को पटकनी देकर उत्तर प्रदेश के का खिताब जीता। उन्हें गदा और 31 हजार नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।
: रामायण का मूल उद्देश्य एक आदर्श मानव का चरित्र प्रस्तुत करना: रत्नेश प्रपन्नाचार्य
Wed, Feb 22, 2023
जानकी महल ट्रस्ट में श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण कथा की हो रही अमृत वर्षा
अयोध्या। रामायण का मूल उद्देश्य एक आदर्श मानव का चरित्र प्रस्तुत करना है। अतः इस कथा का प्रारम्भ श्रेष्ठतम मनुष्य की खोज से होता है। तपस्वी वाल्मीकि, मुनिवर नारद से पूछते हैं कि इस समय संसार में गुणवान, वीर्यवान, धर्मज्ञ, सत्यवादी, चरित्रवान, आत्मजयी, प्राणिमात्र का हितैषी और जिसके कोप से देवता भी डरते हैं, ऐसा मनुष्य कौन है? ध्यातव्य है कि वाल्मीकि यहां जीते-जागते वर्तमान की बात करते हैं, किसी पुराकथा में छलांग नहीं लगाते। उक्त बातें जगद्गुरू रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने जानकी महल ट्रस्ट में चल रहें श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण कथा के दूसरे दिवस में कही। जगद्गुरू रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि यह विश्व में मानववाद के विचार का पहला बीज पडने की घटना है, जब वाल्मीकि अपनी रामकथा की भूमिका और आधार सुनिश्चित करते हैं। उनकी जिज्ञासा न तो किसी देव, गंधर्व, सुर, असुर के बारे में हैं, न वे किसी अतीत की कथा में रमना चाहते हैं। उनका उद्देश्य अलौकिक चमत्कारों के बल पर कार्यसिद्धि प्राप्त करने की कथा लिखना भी नहीं है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि के पिता वरुण थे, जो महर्षि कश्यप और अदिति के नौवें पुत्र थे। इनकी माता का नाम चर्षणी था और यह भृगु ऋषि के भाई थे। वरुण का नाम प्रचेत होने के कारण वाल्मीकि को प्राचेतस् भी कहा जाता है। इनका आश्रम तमसा नदी के तट पर था। वाल्मीकि के पूर्व में डाकू होने की कथा भी लोकप्रसिद्ध है। यह जीवनवृत्त मानव के उत्थान–पतन का ज्वलंत उदाहरण है, कि कुसंगति कैसे जीवन को पतित कर कलंकित कर देती है और सत्संगति कैसे जीवन को उन्नति की ओर ले जाकर उज्ज्वल बना देती है। कैसे वह एक खलनायक से महानायक में रूपांतरित हो गए, पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है। कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।
: श्रीराम का चरित्रबल सृष्टि-जीवन में विशिष्ट बनाता है: साक्षी गोपाल
Wed, Feb 22, 2023
हनुमान बाग महंत जगदीश दास के सानिध्य में चल रहा महोत्सव
अयोध्या। महर्षि वाल्मीकि तब तक रामायण की रचना नहीं कर पाये जब तक श्रीजानकी वाल्मीकि के आश्रम पर नहीं गयी।काव्य विना पीड़ा के प्रकट नहीं होता।महर्षि वाल्मीकि के हृदय में इतनी करुणा का उदय हुआ कि एक बहेलिये के बाण से मरे क्रौंच पक्षी को देखकर उनका हृदय रो उठा और सहसा एक शोक प्रकट हुआ जो श्लोक बन गया।दुनिया की पहली कविता वाल्मीकि की पीड़ा से प्रकट हुयी।पर इतनी पीड़ा करूणामयी जानकी के चरित्र को लिखने में समर्थ नहीं हो पायी।अत: श्रीराम ने जानकी को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पर भेजा।जब महर्षि वाल्मीकि ने श्रीसीता की पीड़ा देखी तो हृदय में इतनी करूणा आयी कि वो रामायण लिखने में समर्थ हो गये। उक्त बातें श्रीमन् साक्षी गोपाल दास अध्यक्ष इस्कॉन कुरुक्षेत्र ने हनुमान बाग में श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण कथा महोत्सव के द्धितीय दिवस में कही। साक्षी गोपाल दास जी श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण की कथा को समझाते हुए कहा कि प्रश्न है कि श्रेष्ठ चरित्र किसका है?या श्रेष्ठजन किसके चरित्र का गान करते हैं?यह हमारे और आपके मन में उठने वाला ही प्रश्न नहीं है महर्षि वाल्मीकि से लेकर गोस्वामी श्रीतुलसीदास जी तक सबके मन में यही प्रश्न था।इसका उत्तर आप ढूँढने चलेंगे तो सबसे पहले जो बात आपके मन में आयेगी वो ये कि किसी के चरित्र को श्रेष्ठ माना जाय इसकी कसौटी क्या है?श्रीराम के अवतार से पहले शास्त्रों ने श्रेष्ठ चरित्र किसका माना जाय इसकी बहुत सी कसौटियाँ रखी हैं। उन्होंने कहा कि चरित्र का बल व्यक्ति को प्रभावी बनाता है। उन्होंने कहा कि संसार में बहुत सारे लोग शरीर और स्वभाव से सौन्दर्यवान् होते हैं लेकिन चरित्र से दुर्बल होते हैं।चरित्र की कमज़ोरी सौन्दर्य के सारे गौरव को नष्ट कर देती है।श्रीराम का चरित्रबल ही उन्हें समस्त सृष्टि-जीवन में विशिष्ट बनाता है। यह महोत्सव अन्तर्राष्ट्रीय श्री कृष्ण भावनामृत संघ के तत्वावधान में इस्कॉन कुरुक्षेत्र द्धारा हो रहा है। इस महोत्सव को भक्ति मय से परिपूर्ण बनाने में इस्कॉन के वर्तमान आचार्य श्रील् गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज एवं श्रीमन् महामन दास अपना आशीर्वाद देगें। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग मंदिर के भजनानंदी संत महंत जगदीश दास महाराज कर रहें। कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें।आयोजन के यजमान अतुल कृष्ण दास, गोविंद कृष्ण दास, भावना गोयल,नीरज गोयल, मीनू नरुला,अशोक नरुला, दीक्षा अरोड़ा, साधना सचदेवा, संतोष शर्मा, कृष्ण शर्मा, राज रानी, चरण दास सैनी, ममता अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, गीता शर्मा, राजीव मोहन, वीना ग्रोवर, अशोक ग्रोवर, कमलाप्रिय देवी दासी, मनु कृष्ण दास, अर्चना मित्तल, पवन मित्तल, नीता गुप्ता, महेंद्र गुप्ता, मधु सिंगला, हरबंस लाल सिंगला, स्नेह गुप्ता, बृजमोहन गुप्ता, सुभद्रा लीली देवी दासी,कृष्ण सेवक दास, रामेश्वरी दया देवी दासी, नीलम मग्गु, अशोक मग्नु, जमना देवी, सुदेश सचदेवा, मोहिनी देवी दासी, अनुराधा लक्ष्मी देवी दासी, डा राजेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।