: श्री गिरिराज जी हैं कलियुग के एकमात्र देवता: महंत श्रीधर दास
Fri, Dec 30, 2022
कहा,तीर्थ में कथा श्रवण बड़े ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है, अयोध्या बड़ी ही पवित्र भूमि है
अयोध्या। रामनगरी के राम घाट स्थित श्यामा सदन मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आज पंचम दिवस की पावन कथा का श्रवनपान करा रहे प्रख्यात कथावाचक श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास जी महाराज ने कथा में पधारे सभी भक्तों को भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए ब्रज की यादों से जोड़ा। उपस्थित सभी भक्तवृन्द ब्रज की पावन कथा से जुड़कर आनंदित हुए। साथ ही भगवान की माखन चोरी की लीलाओं का वृतांत सुनाया की किस प्रकार छोटे से कन्हैया गोपियों के घर जा जाकर ग्वाल बालों की टोली लेकर माखन की चोरी करते थे। और अपनी शरारत से सबका मन मोह लेते थे।उन्होंने कहा कि सभी ब्रजवासी कन्हैया को बहुत प्यार करते थे। अनेक बाल लीलाओं के साथ अनेक राक्षसों का उद्धार किया। कथाव्यास जी ने गोवर्धन पूजा की महिमा बताते हुए बताया कि श्री गिरिराज जी हैं कलियुग के एकमात्र देवता। जिसके ध्यान मात्र से होता है सभी बाधाओं का निवारण। बालयोगी श्रीधर दास ने कहा तीर्थ में कथा श्रवण बड़े ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है। अयोध्या बड़ी ही पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का दिव्य मंदिर बनने जा रहा है। हम लोग बड़े ही भाग्यवान है कि अपने आखों से ये सुनहरा अवसर देखने को मिल रहा है। साथ ही छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाते हुए सभी ने मस्ती में झूमते गाते हुए गिरिराज भगवान के दर्शन किये। श्रीमद् भागवत कथा में भक्तों का भारी हुजूम उमड़ा रहा।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान महेश प्रसाद गुप्ता, आशा गुप्ता समस्त पावटा परिवार ने किया। इस मौके पर श्यामा सदन के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: श्यामा सदन मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया
Thu, Dec 29, 2022
जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाते है: महंत श्रीधर दास
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्यामा सदन मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज कर रहे है। कथा के चतुर्थ दिवस महाराज श्री ने प्रभु के वामन अवतार के वृतांत का विस्तार पूर्वक वर्णन भक्तों को करवाया एवं कृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया। कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत भागवत आरती के साथ की गई।व्यासजी ने कहा कि जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाते है। महंत श्रीधर दास ने बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था। जिसमें भगवान विष्णु ने एक वामन के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। महंत श्रीधर दास ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मानव दान में पूर्णता आ जाती है, तब भगवान स्वयं याचक बन कर आ जाते हैं और चरण कमल से कल्याण करते हैं। द्वारपाल बन कर उसकी रछा करते हैंं। कथा में भक्त पहले दिन से ही आनंद में डूबकर भजनो में झूमते एवं नाचते नजर आ रहे हैं।जैसे ही कथा के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा मंदिर जयकारों से गूंज गया। महंत श्रीधर दास जी महाराज ने कहा कि प्रभू के आते ही माया मोह के बन्धन टूट जाते हैं और संसार रूपी कारागार से मुक्त हो जाता है। भक्ती रूप जमना में आकंठ निमग्न हो जाता है। कथा के दौरान कृष्ण जन्म उत्सव और भजनों पर श्रद्धालु जमकर नाचे। भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया। एक दूसरे को कृष्ण जन्म की बधाईयां दीं।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान महेश प्रसाद गुप्ता, आशा गुप्ता समस्त पावटा परिवार ने किया। इस मौके पर श्यामा सदन के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: धर्म को अलग करने के बजाए प्रत्येक कर्म को धर्म में करना सीखें :महंत श्रीधर दास
Tue, Dec 27, 2022
अयोध्या। रामघाट स्थित प्रसिद्ध पीठ श्यामा सदन मंदिर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथाव्यास श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत बालयोगी श्रीधर दास महाराज ने कहा कि धर्म को अलग करने के बजाए प्रत्येक कर्म को धर्म में करना सीखें।
आज हमारी प्रार्थना भी मात्र क्रिया बनकर रह गई है जबकि प्रत्येक क्रिया ही प्रार्थना बन जाए ऐसा कार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा व्यवहार आचरण विचार सब इतना लयबद्ध और ज्ञान मय हो कि यह सब अनुष्ठान जैसा लगने लगे। व्यासजी ने कहा कि धर्म के लिए अलग से कर्म करने की आवश्यकता नहीं अपितु जो कर्म हम कर रहे हैं उसको ऐसे पवित्र भाव से करें कि वही धर्म बन जाए। उन्होंने कहा कि समस्त समस्याओं का समाधान करने के लिए मौन ही सबसे बड़ा अस्त्र है इस अस्त्र से संसार के समस्त विवादों का समाधान हो सकता है।जो मनुष्य बाहरी बातों पर ध्यान देता है उसके घर में कलेश होता है तात्कालिक आवेश में लिया गया निर्णय हमेशा पश्चाताप का कारण बनता है जो सरलता असत्य और अन्याय का विरोध न कर सके वह समाज और स्वयं दोनों के लिए घातक है। कथा को समझाते हुए महंत श्रीधर दास ने कहा कि झूठ और अन्याय को सह लेना ही अगर सरलता होती तो भगवान श्री राम बाली के अन्याय और रावण के अत्याचार को सहते इन सब को दंडित करने के बाद भी भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम , सरल एवं संकोची कहा गया है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान महेश प्रसाद गुप्ता, आशा गुप्ता समस्त पावटा परिवार ने किया। इस मौके पर श्यामा सदन के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।